यूपी: बारिश से नदियों का जलस्तर बढ़ा, जिलों के गांवों में बाढ़ जैसे हालात, तटवर्ती इलाकों में हड़कंप
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यूपी में पिछले कई दिनों से हुई लगातार बारिश ने लोगों को भीषण गर्मी से राहत तो दी है पर कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात हो गए हैं। नदियों का जलस्तर बढ़ गया है जिससे दर्जनों गांव बाढ़ से घिर गए हैं। वहीं, तटवर्ती इलाकों में हड़कंप मच गया गया।
बलरामपुर जिले में भारी बारिश के चलते खरझार पहाड़ी नाला उफना गया है जिससे करीब दो दर्जन गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। बलरामपुर-तुलसीपुर हाइवे पर लौकहवा के निकट सड़क कट जाने से भारी वाहनों का आवागन प्रभावित हुआ है।
वहीं, अयोध्या जिले में सरयू नदी के जलस्तर ने चेतावनी निशान पार कर लिया है। नदी का जलस्तर दो सेंटीमीटर की रफ्तार से बढ़ रहा है। सुबह 8:00 बजे जलस्तर 91.86 मीटर रिकॉर्ड हुआ, जिससे तटवर्ती इलाकों में हड़कंप मच गया है। स्थानीय लोगों ने पलायन शुरू कर दिया है।
बहराइच में नदी उफनायी, बाढ़ के पानी से 16 गांव घिरे
बहराइच जिले में तेज वर्षा के चलते सरयू नदी उफना गई है। इससे शहर से सटे 16 गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। टिकोरामोड़-सीतापुर हाईवे बाईपास मार्ग पर घुटनों भर पानी बह रहा है। उपजिलाधिकारी ने शुक्रवार को दोपहर प्रभावित गांवों का नाव से मुआयना कर बाढ़ में फंसे लोगों को राहत सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।
सरयू नदी की शाखा शहर से सटकर बहती है। जिले में तीन दिन से हो रही तेज वर्षा से नदी का जलस्तर बढ़ गया है। इस कारण सदर तहसील क्षेत्र के शेखदहीर, पिपरिया महिपालसिंह, आगापुरवा, सिसई हैदर, मुल्लापुरवा, सराय मेहराबाद, यादवपुर, त्रिवेदीपुरवा समेत 16 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। लगभग 28 हजार की आबादी प्रभावित है। सरयू नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण टिकोरामोड़-सीतापुर बहराइच बाईपास मार्ग पर घुटनों भर पानी बह रहा है। इसके चलते आवागमन प्रभावित है।
स्कूल में भरा पानी, छात्रों ने किया प्रदर्शन
बहराइच के विकास खंड तेजवापुर के जूनियर विद्यालय केशवापुर में सरयू नदी की बाढ़ का पानी घुसा हुआ है। इसके चलते तीन दिन से पठन-पाठन कार्य प्रभावित है। शुक्रवार को छात्र-छात्राएं स्कूल पहुंचे, लेकिन बाढ़ का पानी और अधिक हो गया। इस पर क्षुब्ध छात्र-छात्राओं ने प्रदर्शन किया।
सरयू नदी के उफान की सूचना पाकर उपजिलाधिकारी कीर्ति प्रकाश भारती ने शुक्रवार को राजस्वकर्मियों की टीम के साथ नाव से प्रभावित गांवों का भ्रमण कर स्थिति जांची। हैदर सिसई, सराय मेहराबाद और आगापुरवा गांव में नाव से पहुंचकर एसडीएम ने ग्रामीणों के साथ बातचीत कर समस्याएं सुनीं और मदद का भरोसा दिलाया।
एल्गिन ब्रिज के सहायक अभियंता आशुतोष कुमार ने बताया कि नदी के जलस्तर में धीरे-धीरे इजाफा हो रहा है। खतरे का निशान 106.07 मीटर है। लेकिन अभी नदी खतरे के निशान से 52 सेंटीमीटर नीचे बह रही है। लेकिन अगर जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो नदी लाल निशान पार कर सकती है।
बाराबंकी में उफनाई घाघरा नदी
बाराबंकी में बारिश और नेपाल के पानी से घाघरा उफान मारने लगी है। पानी खतरे के निशान के करीब पहुंचने से प्रशासन ने तराई में अलर्ट जारी कर दिया है। हालात को देखते हुए तराई के लोग डरे हैं। नदी में पानी दो सेमी प्रतिघंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। खतरे की आशंका को देखते हुए नजदीक के आठ गांवों के लोग अपने मवेशियों के साथ सुरक्षित स्थानों पर जाने लगे हैं। उधर प्रशासन ने हालात से निपटने के लिए सभी कर्मचारियों को 12 बाढ़ चौकियों पर मुस्तैद रहने के आदेश दिए हैं।
जिले की रामनगर, सिरौलीगौसपुर व रामसनेहीघाट तहसील में प्रतिवर्ष घाघरा की बाढ़ तबाही मचाती है। दो लाख से अधिक आबादी को बाढ़ की त्रासदी झेलनी पड़ती है। ऐसे हालात फिर बन गए हैं। बारिश शुरू होने के साथ ही घाघरा में पानी उफान मारने लगा है। एलिग्न ब्रिज पर खतरे का निशान 106.076 मीटर पर है। शुक्रवार को नदी में पानी का स्तर 105.556 मीटर पर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान मात्र आधा मीटर नीचे था। बाढ़ कंट्रोल रूम के मुताबिक नदी का पानी दो सेमी प्रतिघंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है।
इन हालात में घाघरा का पानी खतरे के निशान को एक-दो दिन में पार कर सकता है। नदी में उफान बढ़ने से तराई के लोगों में हड़कंप मच गया है। तटवर्ती कमियार, परसावल, नैपुरा, बांसगांव, मांझा रायपुर आदि गांवों के लोग डर के चलते सुरक्षित स्थानों पर जाने लगे हैं। यह गांव सबसे पहले बाढ़ की चपेट में आते हैं। इसलिए ग्रामीण गृहस्थी के सामान के साथ अपने मवेशियों को भी सुरक्षित स्थानों पर भेज रहे हैं। उधर तपेसिपाह, टेपरा, कोरियनपुरवा आदि गांव के निकट कटान नदी का जलस्तर बढ़ने से कम हुई है।
अंबेडकरनगर: किसानों ने जताई खुशी पर कई क्षेत्रों में बढ़ीं दिक्कतें
अंबेडकरनगर में बारिश से मौसम को खुशगवार हो गया है, लेकिन मुसीबतें भी खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। शुक्रवार सुबह कई क्षेत्रों में पेड़ धराशायी हो गए, वहीं बिजली के खंभे व जर्जर तार भी टूट गए। कई जगह कच्ची दीवारें भी ढह गईं। इससे संबंधित क्षेत्रों की विद्युत आपूर्ति बाधित हो गई।
वहीं, खेतों में पानी भरा होने से धान रोपाई का कार्य तेज हो गया है। लगातार हो रही बारिश से खुश किसानों का कहना है कि इसी प्रकार आगे भी बारिश होती रहे तो इससे धान की उपज बेहतर होगी। हालांकि, मेंथा किसानों की चिंता बढ़ गई है। बारिश से मेंथा की फसल लगभग चौपट हो गई है।
घुटने तक भरे पानी से आवागमन को मजबूर हुए लोग
जिला मुख्यालय समेत अन्य नगरीय क्षेत्रों व बाजारों में जलभराव की समस्या खत्म नहीं हो रही है। इससे लोगों को व्यापक मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। अकबरपुर नगर के पॉश कॉलोनियों में से एक इंद्रलोक कॉलोनी में डॉ. फतेहबहादुर की क्लीनिक से इमामबाग जाने वाला मार्ग बीते दिनों पूरी तरह जलमग्न हो गया था। लोगों को घुटने तक पानी से होकर आवागमन को मजबूर होना पड़ रहा है।
वहीं गोरखपुर के देवरिया में जिलाधिकारी और जिला आबकारी अधिकारी के कार्यालय क्षेत्र में भारी बारिश के बाद जलभराव हो गया। इससे लोगों को मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है।