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राजनीति से संन्यास ले सकती हूं पर भाजपा के साथ गठबंधन नहीं कर सकती : मायावती
Mon, 02 Nov 2020 03:19 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Mon, 02 Nov 2020 03:19 PM IST
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बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती।
- फोटो : amar ujala
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आगामी विधान परिषद चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के समर्थन से जुड़े बयान पर मचे हाहाकार के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने सोमवार को अपनी सफाई देकर डैमेज कंट्रोल की कोशिश की। उन्होंने कहा कि विरोधी उनके बयान की गलत व्याख्या कर दुष्प्रचार कर रहे हैं, इस साजिश को कामयाब नहीं होने देंगे। बसपा कभी भी भाजपा से मिलकर चुनाव लड़ने वाली नहीं है।
मायावती के बयान को सपा व कांग्रेस ने तूल देना शुरू कर दिया था। मुस्लिमों में बसपा के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश शुरू हो गई थी। बिहार विधानसभा चुनाव तथा यूपी व एमपी के विधानसभा उपचुनाव में अपने बयान के नकारात्मक असर के आकलन के बाद बसपा सुप्रीमो ने कहा कि पार्टी किसी भी कीमत पर बीजेपी जैसी संकीर्ण विचारधारा वाली ताकत का साथ नहीं दे सकती।
उन्होंने कहा, मैं राजनीति से संन्यास ले सकती हूं, पर बीजेपी से मिलकर कभी चुनाव नहीं लड़ सकती। जब तक जिंदा हूं, यह संभव नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि वह राजनीति से संन्यास लेने वाली नहीं हैं। वह बहुत मजबूत, तगड़ी और स्वाभिमानी हैं। कांग्रेस, सपा व भाजपा कितना भी दबाए, वह दबने वाली नहीं हैं। पूंजीवादी, जातिवादी व संकीर्ण विचारधारा वाली ताकतों से मुकाबला करती रहेंगी।
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मायावती के बयान को सपा व कांग्रेस ने तूल देना शुरू कर दिया था। मुस्लिमों में बसपा के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश शुरू हो गई थी। बिहार विधानसभा चुनाव तथा यूपी व एमपी के विधानसभा उपचुनाव में अपने बयान के नकारात्मक असर के आकलन के बाद बसपा सुप्रीमो ने कहा कि पार्टी किसी भी कीमत पर बीजेपी जैसी संकीर्ण विचारधारा वाली ताकत का साथ नहीं दे सकती।
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उन्होंने कहा, मैं राजनीति से संन्यास ले सकती हूं, पर बीजेपी से मिलकर कभी चुनाव नहीं लड़ सकती। जब तक जिंदा हूं, यह संभव नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि वह राजनीति से संन्यास लेने वाली नहीं हैं। वह बहुत मजबूत, तगड़ी और स्वाभिमानी हैं। कांग्रेस, सपा व भाजपा कितना भी दबाए, वह दबने वाली नहीं हैं। पूंजीवादी, जातिवादी व संकीर्ण विचारधारा वाली ताकतों से मुकाबला करती रहेंगी।
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बसपा के सत्ता में रहते हमेशा भाजपा का नुकसान
मायावती ने मुसलमानों को यह समझाने की कोशिश की कि बसपा ने जब भी भाजपा से मिलकर सरकार बनाई, भाजपा का ही नुकसान हुआ और जब सपा सत्ता में आई तब भाजपा का फायदा हुआ। उन्होंने कहा कि बसपा सत्ता में अकेले रही या भाजपा के सहयोग से, मुसलमानों को टिकट से लेकर सत्ता में उनकी आबादी के हिसाब से हिस्सेदारी दी। यूपी की 7 सीटों के उपचुनाव में भी 2 सीटें मुस्लिम समाज को दी हैं। 1995 में सपा छोड़कर अन्य दलों के साथ मिलकर सरकार बनाई, पर विचारधारा व मूवमेंट से समझौता नहीं किया।
कांग्रेस तो भाजपा की भी बाप निकली
मायावती ने कहा कि 2003 में जब भाजपा से मिलकर लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा तो केंद्र की तत्कालीन भाजपा सरकार ने सीबीआई व ईडी का इस्तेमाल कर उन्हें परेशान किया। तब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने फोन कर आश्वासन दिया था कि वह न्याय दिलाएंगी, लेकिन कांग्रेस बीजेपी की भी बाप निकली। कुछ नहीं किया। मायावती ने कहा, हमारे खून में दबना स्वीकार करना नहीं है। हम सुप्रीम कोर्ट गए और न्याय मिला। 2003 में उनके साथ जो हुआ उसे भूली नहीं हैं। बीजेपी के साथ जाने का सवाल ही नहीं।