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हमें सरकारी संतों की नहीं, असरकारी संतों की जरूरत : अविमुक्तेश्वरानंद

Thu, 12 Mar 2026 02:48 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 12 Mar 2026 02:48 AM IST
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We don't need government saints, we need effective saints: Avimukteshwarananda
राजधानी के कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक स्थल में हुआ कार्यक्रम। 
लखनऊ। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि हमें सरकारी संतों की नहीं बल्कि असरकारी संतों की जरूरत है। कुछ साधु-संत अपना घर-परिवार छोड़कर निकल गए लेकिन गेरुआ वस्त्र पहनने के बाद भी लौटकर प्रोफेसर, विधायक, सांसद, मंत्री और मुख्यमंत्री बन रहे हैं। वापस अगर संसार में जाना है तो हमारा गेरुआ वस्त्र उतार दो। अगर करना ही है तो न्याय के मार्ग पर रहकर शासन करो।
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राजधानी के कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक स्थल में बुधवार को आयोजित कार्यक्रम में देशभर से जुटे संत, धर्माचार्य और गो रक्षकों को संबोधित करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि अन्यायप्रतिकारो हि धर्मः खलु सनातनः अर्थात अपराध को सहना अधर्म को बढ़ावा देना है। उन्होंने राजा परीक्षित का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह उन्होंने गो माता के आंसू पोंछते हुए कलि को दंडित किया था, आज के शासकों को भी उसी मार्ग पर चलना होगा। जिस राज्य में गाय रोती है, उस राज्य का विनाश निश्चित है।
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कितने कांग्रेसी, सपाई, बसपाई और भाजपाई हैं यहां

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मंच से सामने बैठे लोगों से बारी-बारी से पूछा कि यहां कितने कांग्रेसी, सपाई, बसपाई और भाजपाई मौजूद हैं तो सबसे ज्यादा हाथ भाजपा के लिए उठे। इस पर उन्होंने पूछा कि क्या आप अब भी भाजपाई हैं तो कुछ लोगाें ने कहा कि कल तक थे, अब नहीं हैं। इस पर शंकराचार्य ने कहा कि कुछ लोग हम पर आरोप लगा रहे थे कि आपको कांग्रेस और सपा का समर्थन मिल रहा है लेकिन यहां तो उन लोगों की पोल ही खुल गई। हालांकि जब उन्होंने यह पूछा तो कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा के साथ आए पार्टी के कार्यकर्ता जा चुके थे।
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आज हमें कांशीराम जैसे समर्पण की आवश्यकता

शंकराचार्य ने कहा, आज हमें बसपा के संस्थापक कांशीराम जैसे समर्पण की आवश्यकता है। उन्होंने कंधे पर झोला टांगकर जन कल्याण की राजनीति शुरू की और अपनी शिष्या मायावती को मुख्यमंत्री बनाया।

राजधानी के कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक स्थल में हुआ कार्यक्रम। 

राजधानी के कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक स्थल में हुआ कार्यक्रम। 

राजधानी के कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक स्थल में हुआ कार्यक्रम। 

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