डर से बड़ा कोई वायरस नहीं है, सकारात्मकता पर करें फोकस
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इनर स्माईल केयर ग्रुप के डायरेक्टर व लाइफ़ आर्ट एक्सपर्ट विशेष कुमार लगातार कोविड काल में लोगों को डिप्रेशन से निकालने का कार्य कर रहे हैं जिसका फायदा हजारों लोग ले रहे हैं। उनका कहना है कि यह समय महामारी का है जब हम बाहर नहीं जा सकते तो बेहतर खुद को जानने का प्रयास करें।
वो कहते हैं कि यह समय अपने भीतर जाने का है अपने मन को स्थिर और ज्यादा से ज्यादा मजबूत बनाने का है। हम घर पर ही रहकर अपने आभामंडल को मजबूत बनाएं। आपका आभामंडल जितना मजबूत होगा आप तमाम प्रकार की नकारात्मक चीजों से उतना ही बच पाएंगे।
वो कहते हैं कि अगर घर रात में खुला है। दरवाजे खुले हैं तो कोई भी घुसा चला आएगा। ऐसे ही आपका शरीर है इस शरीर के चारों तरफ जो आभामंडल (औरा) है वो जितना सकारात्मक और पॉजिटिव होगा आप उतना ही चीजों को सही से कर पाएंगे। आभामंडल को मजबूत करने के लिए योग प्राणायाम ध्यान जरूर करें घर पर रहते हुए सरकार द्वारा बताए गए नियमों का पालन करें।
सकारात्मक चीजों पर ध्यान बनाए रखें
कोविड काल में पांच ज्ञानेंद्रियों में से ये तीन नाक, कान व आंखें सबसे महत्वपूर्ण हैं तो अपनी नाक कान और अपनी आंखों पर सबसे विशेष तौर पर ध्यान देना है। हम क्या देख रहे हैं सुन रहे हैं उसका असर सीधे हमारे मन पर अंकित हो रहा है जिससे डर के नकारात्मक हार्मोन्स पैदा हो रहे हैं जो हमारी ही इम्युनिटी को और कम करते जा रहे हैं इसलिए सकारात्मक चीजों पर ध्यान बनाए रखें।
वायु तत्व को बना ले मजबूत
शरीर के पांचों तत्वों में पानी सबसे महत्वपूर्ण होता है लेकिन इस समय वायु तत्व की ज्यादा महत्ता हो गई है यानी कि शरीर में ऑक्सीजन वायु तत्व को भी बैलेंस करें।
पानी की उचित मात्रा का रखें ध्यान
शरीर में 60 से 65% पानी है लेकिन अधिकांश लोग अत्यधिक पानी पीने लगते हैं जो कि गलत है पानी हमेशा अपने वजन के अनुसार ही पिये और इस समय गुनगुना पानी ही पिये।
प्राण ऊर्जा बड़ा कर नकारात्मक विचारों पर लगाएं लगाम
प्राणायाम अर्थात प्राणों का आयामबढ़ते ही मन और शरीर को जबरदस्त सकारात्मक ऊर्जा मिलने लगती है। भ्रामरी प्राणायाम आपके नकारात्मक विचारों पर लगाम लगा देता है।
सुबह की धूप से ले फायदा
सुबह सूर्य की रोशनी जरूर लें इससे विटामिन डी तो मिलता ही है और संक्रमण काल में भी व्यक्ति को बहुत सी सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
डर से बड़ा वायरस और कोई नहीं
प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में भय होना लाजमी है। अगर यह भय लगातार बना रहे तो इसका असर सीधे व्यक्ति की इम्युनिटी पर पड़ता है और इस कोविड काल में भी ये ही हो रहा है जो लोगों को सबसे ज्यादा परेशान कर रहा है। भय से बड़ा वायरस दुनिया में और कोई भी नहीं है।
प्रतिदिन 15 मिनट का मेडिटेशन बदल देगा मन
स्मार्टफोन का जमाना है स्मार्ट फोन में डाटा ज्यादा भर जाएगा तो स्पीड भी स्लो हो जाएगी और हैंग भी करेगा ठीक उसी प्रकार हमारा मन है मन में जब विचारों की संख्या ज्यादा होने लगेगी तो निश्चित रूप से दिक्कत होना लाजमी है प्रतिदिन का किया हुआ 15 दिन का मेडिटेशन आपके लिए एंटीवायरस का काम करेगा और सकारात्मक ऊर्जाओं से लबरेज रखेगा।