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प्रो विनय पाठक प्रकरण : एसटीएफ मांगेगी अभियोजन स्वीकृति, गिरफ्तारी से पहले राजभवन पर भी निगाहें
Mon, 21 Nov 2022 11:43 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Mon, 21 Nov 2022 11:43 PM IST
सार
प्रोफेसर पाठक के खिलाफ एसटीएफ ने बहुत सारे साक्ष्य एकत्र किए हैं। हाईकोर्ट भी उन्हें राहत देने से मना कर चुका है। ऐसे में प्रोफेसर पाठक को अब तक कुलपति के पद से न हटाया जाना या उनके खिलाफ कार्रवाई न होने से बड़े-बड़े अफसर भी हैरान हैं।
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प्रो. विनय पाठक
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर विनय पाठक को गिरफ्तार करने के लिए यूपी एसटीएफ शासन से अभियोजन स्वीकृति मांगेगी। क्योंकि कुलपति की नियुक्ति सीधे राज्यपाल द्वारा की जाती है, इस लिए उनकी गिरफ्तारी से पहले अभियोजन स्वीकृति जरूरी है। वहीं अगर राज्यपाल द्वारा प्रोफेसर पाठक को हटा दिया जाता है तो अभियोजन स्वीकृति की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। ऐसे में प्रोफेसर की गिरफ्तारी से पहले निगाहें राजभवन पर भी लगी हुई है।
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उधर बताया जा रहा है कि विनय पाठक गिरफ्तारी से बचने और जमानत लेने के लिए सुप्रीमकोर्ट पहुंचे हैं। सुप्रीम कोर्ट राज्य सरकार की ओर से कैविएट दाखिल किया है। एसटीएफ के सूत्रों का कहना है कि प्रोफेसर पाठक के खिलाफ जो भी साक्ष्य एकत्र किए गए हैं वह सब न्यायालय में पेश किए जाएंगे और उनको जमानत देने का विरोध किया जाएगा। वहीं सूत्रों ने यह भी बताया कि विनय पाठक ने खुद को सही साबित करने के लिए जो भी निर्णय लिए या कार्रवाई की उसके लिए युनिवर्सिटी लॉ की एक्जीक्यूटिव काउंसिल से पारित कराया। ऐसे में एसटीएफ इसका भी अध्ययन कर रही है कि एक्जीक्यूटिव काउंसिल में शामिल सदस्यों की क्या जिम्मेदारियां थीं? क्या उन जिम्मेदारियों को निभाया गया? अगर नहीं तो इसके लिए जिम्मेदार सिर्फ कुलपति ही हैं या कोई और भी है?
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सारे सुबूत, हाईकोर्ट से झटका फिर भी नहीं हुई कार्रवाई
वहीं सूत्रों का कहना है कि प्रोफेसर के मामले में यूपी एसटीएफ फूंक-फूंक कर कदम बढ़ा रही है। प्रोफेसर पाठक के खिलाफ एसटीएफ ने बहुत सारे साक्ष्य एकत्र किए हैं। हाईकोर्ट भी उन्हें राहत देने से मना कर चुका है। ऐसे में प्रोफेसर पाठक को अब तक कुलपति के पद से न हटाया जाना या उनके खिलाफ कार्रवाई न होने से बड़े-बड़े अफसर भी हैरान हैं।
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