प्रदर्शन कर प्रधानों ने मांगी 30 हजार की सैलरी व 10 हजार का वेतन
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वेतन, पेंशन, समान पंचायतीराज व्यवस्था लागू करने और सशक्तीकरण की मांग को लेकर प्रदेश भर से हजारों की संख्या में जुटे ग्राम प्रधानों ने गुरुवार को अपनी आवाज बुलंद की।
उन्होंने सरकार को दो दिन के भीतर मांगे पूरी करने का अल्टीमेटम दिया। वहीं सैकड़ों की संख्या में जुटे मदरसा शिक्षकों ने सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाया।
अखिल भारतीय प्रधान संगठन के आह्वान पर लक्ष्मण मेला मैदान में जुटे प्रधानों ने देशभर में एक समान पंचायतीराज व्यवस्था लागू करने की मांग जोरदार तरीके से उठाई।
प्रदर्शनकारियों की अगुवाई कर रहे संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष जितेंद्र चौधरी ने कहा कि ग्राम प्रधानों को भीख नहीं अब अधिकार चाहिए।
आकस्मिक निधन होने पर 20 लाख मुआवजे की मांग
सांसद व विधायक की तर्ज पर उन्हें भी जनप्रतिनिधि मानते हुए 30 हजार मासिक वेतन व 10 हजार रुपये पेंशन दी जाए। साथ ही आकस्मिक निधन होने पर 20 लाख रुपये मुआवजा भी दिया जाए।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1992 में 73वें संवैधानिक संशोधन में 29 विषय व अधिकार ग्राम पंचायतों के अधीन किए गए थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में यह अधिकार प्रधानों को अभी तक नहीं मिला।
उन्होंने सरकार पर प्रदेश की पंचायतों में भ्रष्ट माहौल बनाने का आरोप लगाया। संगठन के अध्यक्ष ने मांगें पूरी करने के लिए दो दिन का अल्टीमेटम दिया है।
साथ ही कहा कि इसके बाद हर तहसील मुख्यालय पर प्रदर्शन के साथ ही 27 नवंबर को प्रधान दिल्ली के जंतर मंतर के लिए कूच करेंगे। इस मौके पर राष्ट्रीय प्रवक्ता सुनील जागलान, महासचिव नानकचंद शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष रामसेवक आदि ने संबोधित किया।