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संतों के साथ छुआछूत विरोधी अभियान चलाएगी विहिप
Wed, 02 Sep 2020 12:25 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: विक्रांत चतुर्वेदी
Updated Wed, 02 Sep 2020 12:25 PM IST
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राम मंदिर निर्माण की शुरुआत के साथ विश्व हिंदू परिषद ने अब नए मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया है। इनमें धर्मांतरण रोकने के साथ छुआछूत विरोधी समरसता अभियान को प्रमुख स्थान दिया गया है। छुआछूत विरोधी अभियान संतों के सहारे 1990 के दशक की तरह चलेगा। इसके लिए कोरोना का प्रकोप थमने पर सामूहिक भोजों के साथ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की बस्तियों व घरों में संतों और विहिप नेताओं के भोज की योजना बनाई गई है।
विहिप के प्रांत सेवा प्रमुख देवेंद्र कहते हैं कि छुआछूत के बहाने हिंदुओं को बांटने की साजिश सफल नहीं होने दी जाएगी। कोरोना के मद्देनजर फिलहाल उस तरह के भोज नहीं होंगे। तब तक इन बस्तियों में विहिप के पदाधिकारी कोविड-19 की गाइडलाइन के मद्देनजर प्रमुख संतों को लेकर जाएंगे और उन्हें तथ्यों व तर्कों से बताएंगे कि छुआछूत हिंदू संस्कृति का हिस्सा नहीं है।
इसकी शुरुआत फिलहाल सीतापुर के नैमिषारण्य से होगी। वहीं, संगठनात्मक सरोकारों पर ध्यान देते हुए तय कामों के लिए अलग-अलग एक-एक जिला छांटकर वहां मजबूती से काम करने के बाद अन्य जिलों में उसके विस्तार की योजना बनी है।
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विहिप के प्रांत सेवा प्रमुख देवेंद्र कहते हैं कि छुआछूत के बहाने हिंदुओं को बांटने की साजिश सफल नहीं होने दी जाएगी। कोरोना के मद्देनजर फिलहाल उस तरह के भोज नहीं होंगे। तब तक इन बस्तियों में विहिप के पदाधिकारी कोविड-19 की गाइडलाइन के मद्देनजर प्रमुख संतों को लेकर जाएंगे और उन्हें तथ्यों व तर्कों से बताएंगे कि छुआछूत हिंदू संस्कृति का हिस्सा नहीं है।
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इसकी शुरुआत फिलहाल सीतापुर के नैमिषारण्य से होगी। वहीं, संगठनात्मक सरोकारों पर ध्यान देते हुए तय कामों के लिए अलग-अलग एक-एक जिला छांटकर वहां मजबूती से काम करने के बाद अन्य जिलों में उसके विस्तार की योजना बनी है।
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