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संघ को बढ़त और भाजपा को सियासी लाभ दिलाएगा ढांचा विध्वंस पर फैसला, उपचुनाव में दिखेगा असर

Thu, 01 Oct 2020 09:44 AM IST
ishwar ashish अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 01 Oct 2020 09:44 AM IST
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Verdict on Babri demolition case will help BJP and RSS.
संघ प्रमुख मोहन भागवत व भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा। - फोटो : amar ujala

अयोध्या के ढांचा विध्वंस पर विशेष न्यायालय का फैसला राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ परिवार की विश्वसनीयता और भाजपा को सियासी बढ़त मिलने का संदेश दे रहा है। यह ध्रुवीकरण की राजनीति को हवा देने वाला साबित हो सकता है। उधर, कुछ मुस्लिम नेताओं ने फैसले के खिलाफ अपील की बात की है, उससे यह साफ नजर आ रहा है। हालांकि, संघ परिवार की चुनौतियां भी कम नहीं हैं। पिछले साल 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब संघ को काशी और मथुरा के मामलों से दूरी बनाने की घोषणा पर पुनर्विचार को मजबूर होना पड़ सकता है।

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ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य और बड़े मुस्लिम चेहरे जफरयाब जीलानी ने विशेष कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही। उधर, असुद्दीन ओवैसी ने इस फैसले को अदालत का काला दिन बताया है।
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सपा सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने भी फैसले पर असंतोष जताया है। इससे साफ है कि मुस्लिम पक्ष का एक हिस्सा अयोध्या मामले का अभी पटाक्षेप नहीं होने देना चाहता। वहीं, ढांचा विध्वंस मामले में आरोपी रहे कुछ लोगों ने काशी और मथुरा की मुक्ति की मांग उठाई गई है। यानी ये पक्ष भी अब चुप नहीं बैठने वाला।

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भाजपा और संघ को मिलेगा फायदा

राम मंदिर और ढांचा विध्वंस पर फैसले भले ही अदालतों से आए हों, लेकिन भाजपा और संघ को इसका फायदा मिलेगा। न सिर्फ इसलिए कि भाजपा सरकार ने न्यायिक प्रक्रिया को तेज करने में मदद की बल्कि उसने इन मामलों को परिणामों तक पहुंचा दिया।

यह संदेश हिंदुत्ववादी संगठनों का बिखराव रोकेगा और संघ को मजबूती देगा। वहीं, हिंदुत्ववादी संगठन काशी और मथुरा पर भी संघ से सक्रिय भूमिका के लिए दबाव डालेंगे। इसकी झलक फैसले के दिन ही दिख गई। ऐसे में संघ के लिए तटस्थ रहना आसान नहीं होगा।

उपचुनावों में सुनाई देगी गूंज: ढांचा विध्वंस के फैसले के बाद जिस तरह भाजपा व विहिप की तरफ से कांग्रेस की तत्कालीन सरकार पर निशाना साधा गया उससे यह साफ  हो गया कि आने वाले दिनों में संघ परिवार भगवा आतंकवाद को लेकर हिंदूवादी संगठनों पर खासतौर की गई कार्रवाई पर तत्कालीन कांग्रेस की केंद्र सरकार पर निशाना साधेगा। साथ ही अन्य मामलों को लेकर संघ की घेराबंदी को लेकर भी विपक्ष को निशाने पर लेगा।

यह निर्णय उस समय आया है, जब चुनाव का भी माहौल है। बिहार में पूरी विधानसभा का तो यूपी में विधानसभा की सिर्फ सात सीटों पर उपचुनाव है। पर यह भी ध्यान रखना चाहिए कि देश के दूसरे राज्यों में भी जहां भी विधानसभा की कुछ सीटों के उपचुनाव हो रहे हैं। इस निर्णय की गूंज चुनाव में सुनाई देगी।

इस तरह भाजपा को मिलेगा फायदा, विरोधियों को होगी मुश्किल

- धार्मिक रूप से सबसे बड़े और संवेदनशील मुद्दे पर 11 महीने में दो बड़े फैसले देश की न्यायिक व्यवस्था पर मामले को लटकाने और टालने के आरोप लगाने वालों का मुंह बंद करने में मददगार होंगे।

- भाजपा को राजनीतिक रूप से बढ़त दिलाएगा। फैसले पर उठने वाले विरोध के स्वर और काशी व मथुरा की मुक्ति की मांग न सिर्फ हिंदुत्व को धार देंगे, बल्कि राजनीतिक ध्रुवीकरण को भी हवा देंगे।

- विरोधी दलों की मुसीबत बढ़ेगी, क्योंकि उनके लिए न्यायालय से आए इस फैसले को लेकर संघ परिवार और भाजपा को घेरना मुश्किल होगा। पर, मुस्लिम पक्ष की ओर से उठे विरोध के स्वर उन्हें सांसत में डाल सकते हैं।

- अब जब कभी भी विपक्ष राजनीतिक कारणों से मुकदमा कराने का आरोप भाजपा पर लगाएगा तो वह उनसे न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा करने को कहेगी। भाजपा यह तर्क दे सकती है कि सरकार होने के बावजूद उसने सीबीआई के लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी आदि के खिलाफ आपराधिक मामले में मुकदमा चलाने की अनुमति के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील में हस्तक्षेप नहीं किया।

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