KGMU: ‘वेंटिलेटर’ ने ले ली मरीज की जान
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केजीएमयू पहुंचे फेफड़े की बीमारी से ग्रसित एक मरीज को वेंटिलेटर न मिलने से मौत हो गई। केजीएमयू में सभी वेटिंलेटर फुल होने से एम्बुबैग से जिंदगी बचाने की कोशिश की गई लेकिन कामयाबी नहीं मिली।
परिवारीजनों ने मामले की शिकायत करने की बात कही है। लखीमपुर, धरहौरा के राजेंद्र गुप्ता (45) को सांस लेने में दिक्कत के बाद सोमवार रात दस बजे बलरामपुर अस्पताल में भर्ती कराया गया।
भतीजे अमित गुप्ता ने बताया कि मंगलवार को डॉक्टर ने फेफड़े की समस्या बता ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया। ट्रॉमा सेंटर में इलाज चला और बुधवार सुबह डॉक्टरों ने पल्मोनरी वार्ड रेफर कर दिया।
वहां डॉक्टरों ने वेंटिलेटर सपोर्ट की जरूरत बताई। पता चला कि वेंटिलेटर सभी फुल हैं। इसके बाद डॉक्टरों ने एम्बुबैग लगा दिया।
पहले भी जा चुकी है कई लोगों की जान
एम्बुबैग लगाने के बाद सुबह साढ़े नौ बजे मौत हो गई। परिवारीजनों का कहना था कि समय पर वेंटिलेटर मिल गया होता तो मरीज की जान न जाती।
केजीएमयू में वेंटिलेटर की समस्या बहुत पुरानी है और गांधी वार्ड समेत कई दूसरे वार्ड में दस से अधिक मरीजों की सांस वेंटिलेटर के भरोसे चल रही है।
वहीं केजीएमयू में सात से आठ वेंटिलेटर खराब चल रहे हैं। ट्रॉमा सेंटर में गंभीर रोगियों की भीड़ अधिक होने से वेंटिलेटर मिलना मुश्किल होता है।
मालूम हो कि कुछ समय पहले सड़क हादसे में घायल संदीप नाम के युवक को ऑपरेशन के 26 घंटे बाद वेंटिलेटर नहीं मिला था और उसकी मौत हो गई थी।