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इन सरकारी कर्मचारियों को मिलेंगे लैपटॉप और स्मार्टफोन

Thu, 26 Nov 2015 09:37 AM IST
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 26 Nov 2015 09:37 AM IST
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VDO will get smartphone and laptop by UP government

प्रदेश सरकार ने सूबे के ग्राम पंचायत अधिकारियों और ग्राम विकास अधिकारियों को अब लैपटॉप और स्मार्टफोन देने का फैसला किया है। पहले इन्हें टैबलेट देने का प्रस्ताव था। शासन ने लैपटॉप व स्मार्टफोन खरीदने की कार्यवाही शुरू कर दी है। इस वित्तीय वर्ष के अंत तक कर्मियों को ये गैजेट्स मिल जाएंगे।

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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 2015-16 के बजट में पंचायतीराज विभाग में कार्यरत ग्राम पंचायत अधिकारियों (वीपीओ) और ग्राम्य विकास विभाग में काम करने वाले ग्राम विकास अधिकारियों (वीडीओ) को टैबलेट देने का एलान किया था।
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मगर, चतुर्थ राज्य वित्त आयोग और केंद्र सरकार के 14वें वित्त आयोग की सिफारिशों में पंचायतों की बैठक से लेकर निर्माण कार्य और रिपोर्ट्स को जिस तरह आमजन की पहुंच में लाने की कल्पना की गई है, उसके मद्देनजर इन कर्मियों को इससे बेहतर संसाधनों से लैस करने पर विचार किया जा रहा था।
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पंचायतीराज निदेशक उदयवीर सिंह यादव ने बताया कि पंचायतों के बेहतर कामकाज के लिए टैबलेट की जगह लैपटॉप और स्मार्टफोन देने का फैसला हुआ है। ग्राम विकास अधिकारी और ग्राम पंचायत अधिकारी, दोनों ही ग्राम पंचायतों के सचिव का काम करते हैं।

लिहाजा दोनों ही संवर्ग के इन कर्मियों को लैपटॉप व स्मार्टफोन दिए जाएंगे। दोनों संवर्गों के करीब आठ हजार कर्मी वर्तमान में कार्यरत हैं। यादव ने बताया कि राजीव गांधी पंचायत सशक्तीकरण अभियान के तहत लैपटॉप तथा आईटी डिपार्टमेंट की ई-डिस्ट्रिक्ट योजना के तहत स्मार्टफोन दिए जाएंगे।

लैपटॉप व स्मार्टफोन मिलने से न सिर्फ खुली बैठकों की मनमानी रिपोर्टिंग रुकेगी, बल्कि उन्हें बैठक की सूचना, वहां उपस्थित लोग और उसमें हुए विचार-विमर्श और लिए गए निर्णय की पूरी वीडियो रिपोर्ट तैयार करनी होगी।

सर्वे में सामने आई थी हद दर्जे की लापरवाही

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जहां निर्माण कार्य हो रहे हैं, उनकी अलग-अलग स्टेज की रिपोर्टिंग फोटो के साथ करनी होगी। पंचायतों के कामकाज की पूरी रिपोर्ट पंचायतीराज विभाग और केंद्र सरकार की वेबसाइट पर भी उपलब्ध करानी होगी।

चतुर्थ राज्य वित्त आयोग ने अपनी सिफारिशें देने के पहले एक सर्वे कराया था। उसमें 76 प्रतिशत लोगों की राय थी कि पंचायत सचिवों का काम बहुत खराब है।

82 प्रतिशत लोगों ने कहा था कि ग्राम सभा की खुली बैठकें कब आयोजित की गईं, उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। 92 प्रतिशत लोगों को यह भी नहीं पता था कि उनकी ग्राम पंचायत को कितनी रकम सरकार से मिलती है। 57 प्रतिशत लोगों ने बताया था कि ग्राम पंचायत द्वारा नियंत्रित योजनाओं में लाभार्थियों के निष्पक्ष चयन का स्तर बेहद खराब था।

वास्तव में ग्राम पंचायत के लोगों को ये सारी सूचनाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी पंचायत सचिव की ही होती है, मगर सर्वे में उनकी हद दर्जे की लापरवाही उजागर हुई।

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