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नवाबी शहर ऐसे करेगा ऋतुराज वसंत का स्वागत
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Mon, 03 Feb 2014 11:51 AM IST
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शिशिर ऋतु की विदाई और मां वागेश्वरी की आराधना का पर्व वसंत पंचमी मंगलवार को धूमधाम से मनाई जाएगी।
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ऋतुराज वसंत के स्वागत को जहां घर-घर में पूजा-अर्चना होगी, वहीं मंदिरों में मां सरस्वती की आराधना कर सद्बुद्धि का आशीर्वाद मांगा जाएगा। माघ शुक्ल पक्ष वसंत पंचमी से ही प्रकृति कलेवर बदलेगी।
साथ ही ‘आई ऋतु बसंत मतवाली, डाल-डाल पर कूकी कोयल, भर गई आम की डाली, आओ हिलमिल बसंत मनाएं, खेल-खेलकर भोजन खाएं... सरीखे गीतों के साथ फिजां में वसंती बयार बहेगी।
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आचार्य प्रदीप ने बताया कि सोमवार शाम 7:30 बजे से पंचमी का मान लग जाएगा, जो मंगलवार शाम 6 बजे के बाद तक रहेगा। उसके बाद से षष्ठी का मान शुरू हो जाएगा।
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उन्होंने बताया कि रात की लग्न मिलने से विवाह समारोह भी खूब होंगे। उधर, वसंत पंचमी पर सामूहिक विवाह सम्मेलन के साथ ही नगर में भी कई धार्मिक आयोजन होंगे।
चौराहों पर होलिका दहन के लिए लगेगी डाल
वसंत पंचमी के दिन ही गली-मोहल्लों के चौराहों पर होलिका दहन के लिए अरंड की डाल बैठाई जाती है। आचार्य प्रदीप ने बताया कि इस दिन को पुराणों में रति महोत्सव के नाम से भी जाना जाता है।
इस दिन सुबह लक्ष्मी-नारायण के साथ मां सरस्वती की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। सफेद मिष्ठान्न, पीले वस्त्र और पुष्प अर्पित कर मां वागेश्वरी से सद्बुद्धि का आशीर्वाद मांगना चाहिए। इस दिन घरों में पीले-केसरिया रंग के खाद्यान्न चखने चाहिये। घरों में लोग हरे मटर की तहरी खाने का रिवाज है।
21 जोड़े बंधेंगे विवाह बंधन में
शास्त्रीनगर दुर्गा मंदिर समिति की ओर से चौक के राम मनोहर लोहिया में 21 जोड़ों का सामूहिक विवाह होगा। 21 बरात कोनेश्वर मंदिर से निकलकर लोहिया पार्क तक पहुंचेंगी। समिति के मीडिया प्रभारी राजेंद्र गोयल ने बताया कि इससे पहले सोमवार को शाम 4 बजे कोनेश्वर मंदिर से कलश यात्रा निकलेगी, जो विभिन्न इलाकाें से होती हुई लोहिया पार्क तक पहुंचेगी।
भातखंडे में सरस्वती पूजा
भातखंडे संगीत सम विश्वविद्यालय में सुबह सुजान सभागार में मां शारदे की पूजा-अर्चना होगी। इस मौके पर छात्र प्रस्तुतियां भी देंगे। न्यू हैदराबाद स्थित उप्र संस्कृत संस्थान में भी आयोजन होंगे।
रामकृष्ण मठ में हवन, संकीर्तन
निरालानगर के रामकृष्ण मठ में सरस्वती पूजा के साथ कई धार्मिक आयोजन होंगे। मठ के स्वामी सुजयानंद ने बताया कि मां शारदे की पूजा-अर्चना के बाद बाल्य भोग हाथेकुड़ी पूजा होगी। हवन के बाद भोग बंटेगा। साथ ही देवीनाम संकीर्तन होगा।