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Varun Gandhi: दस साल बाद चुनावी सीन से गायब हैं वरुण गांधी, 2019 में अपनी मौजूदगी से मां मेनका को दिलाई थी जीत

Fri, 10 May 2024 01:38 PM IST
ishwar ashish श्रीनारायण मिश्र, अमर उजाला, सुल्तानपुर
श्रीनारायण मिश्र, अमर उजाला, सुल्तानपुर Published by: ishwar ashish Updated Fri, 10 May 2024 01:38 PM IST
सार

वरुण गांधी इस बार चुनावी सीन से गायब हैं। लोग उन्हें याद कर रहे हैं। 2019 के चुनाव में अपनी मौजूदगी से उन्होंने अपनी मां को जीत दिला दी थी।

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Varun Gandhi is not present in 2024 election in Sultanpur seat.
भाजपा नेता वरुण गांधी। - फोटो : amar ujala

विस्तार

वरुण गांधी और सुल्तानपुर का रिश्ता बहुत करीबी है। पहले वे पांच साल तक संसद में सुल्तानपुर की नुमाइंदगी करते रहे और जब उनकी मां 2019 में यहां चुनाव मैदान में उतरीं तो उन्होंने प्रचार की कमान थामी। बीते दस साल तक चले इस रिश्ते के बावजूद इस बार के चुनाव में वरुण गांधी परिदृश्य से बाहर हैं। वह भी तब जबकि उनकी मां मेनका गांधी ही इस सीट से भाजपा की प्रत्याशी हैं।

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यूं तो वरुण गांधी का सुल्तानपुर जिले से बचपन का नाता है। उनके पिता अविभाजित सुल्तानपुर जिले की अमेठी सीट से सांसद रहे हैं। उनकी मां मेनका गांधी भी अमेठी से एक बार चुनाव लड़ चुकी हैं। किंतु राजनीति में उतरने के बाद पहली बार वे 2014 में भाजपा के टिकट पर सुल्तानपुर सीट से चुनाव लड़ने आए थे। सुल्तानपुर ने वरुण का दिल खोलकर स्वागत किया और उन्होंने इस सीट से भारी जीत हासिल की थी। अपने पांच साल के कार्यकाल में उन्होंने युवाओं के दिल में खास जगह बना ली थी।
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2019 के लोकसभा चुनाव में वे अपनी मां की सीट पीलीभीत से चुनाव लड़ने चले गए और उनकी मां मेनका गांधी ने भाजपा प्रत्याशी के तौर पर सुल्तानपुर से चुनाव लड़ा। यह चुनाव बेहद कांटे का हो रहा था और सपा-बसपा गठबंधन से चुनाव लड़ रहे चंद्रभद्र सिंह सोनू के गढ़ इसौली में भाजपा बेहद कमजोर नजर आ रही थी। ऐसे में प्रचार की कमान खुद वरुण गांधी ने संभाली थी और इसौली में खुद कई आक्रामक जनसभाएं कर माहौल बदलने का काम किया। जिसकी वजह से मेनका गांधी करीबी मुकाबले में जीत तक पहुंच गई थीं।

इस बार वरुण को पीलीभीत से पार्टी ने टिकट भी नहीं दिया, इसके बावजूद वरुण गांधी ने सुल्तानपुर में प्रचार से दूरी बनाए रखी। सांसद मेनका गांधी ने यह पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि पारिवारिक व स्वास्थ्य कारणवश वरुण प्रचार के लिए नहीं आएंगे।

ऊर्जा के स्रोत और स्पष्टवादी हैं वरुण...
भाजपा के युवा नेता सनी मिश्रा कहते हैं कि वरुण गांधी ऊर्जा का स्रोत हैं। वे संजय गांधी जैसे प्रखर व्यक्तित्व के धनी हैं। ऐसे में उनकी मौजूदगी युवाओं में ऊर्जा का संचार कर देती है। वे निडर और स्पष्टवादी हैं। भले ही भाजपा इस बार आसानी से चुनाव जीत रही है, किंतु वरुण गांधी को युवा याद कर रहे हैं।

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