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नए सिरे से अपडेट होगी टीकाकरण कराने वाले स्वास्थ्य कर्मियों की सूची
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स्वास्थ्य विभाग ने टीकाकरण का ग्राफ बढ़ाने के लिए नई रणनीति अपनाई है। अब सभी अस्पतालों के चिकित्सा अधीक्षक को कहा गया है कि वे सूची में शामिल स्वास्थ्य कर्मियों को फोन कर 28 या 29 जनवरी को केंद्र पर पहुंचने के बारे में जानकारी दे दें। जो लोग पहुंचने में असमर्थता जता रहे हैं, उनका नाम अलग कर दिया जाए। स्वास्थ्य विभाग ने सभी चिकित्सा अधीक्षकों को इस संबंध में पत्र भेज दिया है।
टीकाकरण के पहले अभियान में करीब 70 फीसदी और दूसरे अभियान में करीब 57 फीसदी स्वास्थ्यकर्मी ही बूथ पर पहुंचे थे। टीकाकरण का ग्राफ गिरने के पीछे अलग-अलग कारण सामने आए हैं। इसमें एक बड़ी वजह यह है कि सूची करीब तीन महीने पहले तैयार की गई थी। इस दौरान कई स्वास्थ्य कर्मियों के मोबाइल नंबर बदल गए। इस वजह से उनके पास टीकाकरण के संबंध में भेजा गया मेसेज नहीं पहुंच पाया। इसी तरह कुछ लोग टीकाकरण के दिन शहर से बाहर थे तो कुछ व्यक्तिगत कारणों से टीकाकरण कराने नहीं पहुंच पाए। टीकाकरण के ग्राफ में हुई गिरावट की समीक्षा के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अपनी रणनीति बदल दी है।
सभी अस्पतालों के चिकित्सा अधीक्षकों को पत्र भेजा है। इसमें कहा गया है कि 28 और 29 जनवरी को जिन लोगों का टीकाकरण होना है उन्हें फोन करके जानकारी दी जाए। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि संबंधित स्वास्थ्यकर्मी टीकाकरण के दिन बूथ पर पहुंच पाएगा या नहीं। जो असमर्थता जता रहे हैं उनका नाम पहले ही अलग कर लिया जाए। ऐसे में स्वाभाविक है कि टीकाकरण कराने वालों के ग्राफ में बढ़ोतरी होगी।
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आशा, एएनएम और चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की वजह से गिरा ग्राफ
स्वास्थ्य विभाग की ओर से की गई समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई कि जिन केंद्रों पर आशा कार्यकर्ता, एएनएम और चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की संख्या ज्यादा थी वहां के ग्राफ में बड़ी गिरावट हुई है। इनकी वजह से पूरी राजधानी का ग्राफ नीचे आ गया। इस दौरान यह भी पता चला कि जिन लोगों के नाम सूची में थे, उसमें से तमाम लोग संबंधित अस्पताल छोड़कर दूसरी जगह जा चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि महिला कर्मचारियों में कई गर्भवती थीं, इस वजह से भी उनका टीकाकरण नहीं हो सका है।
तीन माह पुरानी सूची बड़ी वजह
सूची करीब तीन महीने पहले तैयार की गई थी। ऐसे में स्वाभाविक है कि कुछ के नंबर बदल गए हैं या कुछ अलग-अलग कारणों से बूथ पर नहीं पहुंच पाए। अब सभी चिकित्सा अधीक्षकों को सूची अपडेट करने के लिए कहा गया है।
- डॉ. संजय भटनागर, सीएमओ लखनऊ
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टीकाकरण के पहले अभियान में करीब 70 फीसदी और दूसरे अभियान में करीब 57 फीसदी स्वास्थ्यकर्मी ही बूथ पर पहुंचे थे। टीकाकरण का ग्राफ गिरने के पीछे अलग-अलग कारण सामने आए हैं। इसमें एक बड़ी वजह यह है कि सूची करीब तीन महीने पहले तैयार की गई थी। इस दौरान कई स्वास्थ्य कर्मियों के मोबाइल नंबर बदल गए। इस वजह से उनके पास टीकाकरण के संबंध में भेजा गया मेसेज नहीं पहुंच पाया। इसी तरह कुछ लोग टीकाकरण के दिन शहर से बाहर थे तो कुछ व्यक्तिगत कारणों से टीकाकरण कराने नहीं पहुंच पाए। टीकाकरण के ग्राफ में हुई गिरावट की समीक्षा के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अपनी रणनीति बदल दी है।
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सभी अस्पतालों के चिकित्सा अधीक्षकों को पत्र भेजा है। इसमें कहा गया है कि 28 और 29 जनवरी को जिन लोगों का टीकाकरण होना है उन्हें फोन करके जानकारी दी जाए। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि संबंधित स्वास्थ्यकर्मी टीकाकरण के दिन बूथ पर पहुंच पाएगा या नहीं। जो असमर्थता जता रहे हैं उनका नाम पहले ही अलग कर लिया जाए। ऐसे में स्वाभाविक है कि टीकाकरण कराने वालों के ग्राफ में बढ़ोतरी होगी।
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आशा, एएनएम और चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की वजह से गिरा ग्राफ
स्वास्थ्य विभाग की ओर से की गई समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई कि जिन केंद्रों पर आशा कार्यकर्ता, एएनएम और चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की संख्या ज्यादा थी वहां के ग्राफ में बड़ी गिरावट हुई है। इनकी वजह से पूरी राजधानी का ग्राफ नीचे आ गया। इस दौरान यह भी पता चला कि जिन लोगों के नाम सूची में थे, उसमें से तमाम लोग संबंधित अस्पताल छोड़कर दूसरी जगह जा चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि महिला कर्मचारियों में कई गर्भवती थीं, इस वजह से भी उनका टीकाकरण नहीं हो सका है।
तीन माह पुरानी सूची बड़ी वजह
सूची करीब तीन महीने पहले तैयार की गई थी। ऐसे में स्वाभाविक है कि कुछ के नंबर बदल गए हैं या कुछ अलग-अलग कारणों से बूथ पर नहीं पहुंच पाए। अब सभी चिकित्सा अधीक्षकों को सूची अपडेट करने के लिए कहा गया है।
- डॉ. संजय भटनागर, सीएमओ लखनऊ