यूपी : नशीले कोडीन कफ सिरप मामले में एसटीएफ को बड़ी सफलता, लखनऊ में तस्करी से जुड़े दो सदस्य गिरफ्तार
एसटीएफ ने लखनऊ में फेन्सेडिल और कोडीन युक्त दवाओं की तस्करी करने वाले गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया। पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह फर्जी फर्मों और नकली ई-वे बिलों के जरिए दवाओं को बांग्लादेश भेजता था।
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नशीले कफ सिरप सिंडीकेट के दो सदस्यों सहारनपुर निवासी अभिषेक शर्मा और उसके भाई शुभम शर्मा को बृहस्पतिवार को आलमबाग इलाके से गिरफ्तार कर लिया। अभिषेक शर्मा पहले कफ सिरप की तस्करी करने वाले गाजियाबाद निवासी विभोर राणा और विशाल सिंह की फर्म में लोडिंग-अनलोडिंग का रिकॉर्ड मेंटेन करता था। फर्म का कारोबार बंद होने पर दोनों ने उसे दिल्ली और उत्तराखंड का सुपर स्टॉकिस्ट बनवा दिया और फिर सिरप की तस्करी करने लगे। अभिषेक के खिलाफ लखनऊ और गाजियाबाद में दो एफआईआर दर्ज हैं।
एसटीएफ को सूचना मिली थी कि एबॉट कंपनी का दिल्ली का सुपर डिस्ट्रीब्यूटर एवं कफ सिरप मामले में वांछित आरोपी अभिषेक शर्मा तथा शुभम शर्मा किसी काम से लखनऊ आए हैं। वह हजरतगंज में किसी से मिलने वाले है। सूचना पर एसटीएफ की टीम ने दोनों को आलमबाग स्थित टेढ़ी पुलिया के पास से पकड़ लिया।लोडिंग-अनलोडिंग से संबंधित रिकॉर्ड मेंटेन करता था
पूछताछ में अभिषेक ने बताया कि वह वर्ष 2019 से विशाल सिंह एवं विभोर राणा की जीआर ट्रेडिंग फर्म में लोडिंग-अनलोडिंग से संबंधित रिकॉर्ड मेंटेन करता था। फर्म द्वारा एबॉट कंपनी की अन्य दवाओं के साथ फेंसेडिल कफ सिरप मंगाकर फर्जी फर्म के माध्यम से खरीद-बिक्री दिखाकर तस्करों को सप्लाई करते थे। इसे बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल के रास्ते बांग्लादेश भेजा जाता था। इसमें सीए अरुण सिंघल भी सहयोग करता था।अरुण सिंघल ने उनके यहां काम करने वाले बिट्टू कुमार व सचिन कुमार के नाम पर सचिन मेडिकोज नाम से एक फर्म सहारनपुर में तथा सचिन मेडिकोज के ही नाम पर दूसरी फर्म भगवानपुर रुड़की में बनाई थी। फेंसेडिल सिरप को पहले उत्तराखंड एवं पश्चिम उत्तर प्रदेश की दवा फर्म को कागजों में बेचना दिखाते थे और फिर पूरा माल बिट्टू कुमार के नाम पर बनी सहारनपुर वाली फर्म सचिन मेडिकोज में खरीद लेना दिखाते थे।
फिर फर्जी ई-वे बिल तैयार कर तस्करों को बेच देते थे। वर्ष 2021 में कई जगह सिरप पकड़े जाने पर पश्चिम बंगाल पुलिस ने वर्ष 2022 में विभोर राणा को गिरफ्तार कर लिया। जेल से छूटने के बाद इन लोगों ने जीआर ट्रेडिंग से काम करना बंद कर दिया।
फार्मा कंपनियों को आवंटित होने वाले कोडीन का ब्योरा मांगा
सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स (सीबीएन) ने प्रदेश में नशीले कफ सिरप के साथ नशे में इस्तेमाल होने वाली अन्य दवाओं के कारोबार की जड़ें तलाशनी शुरू कर दी हैं। सीबीएन के लखनऊ कार्यालय ने ग्वालियर स्थित कार्यालय से फार्मा कंपनियों को आवंटित होने वाले कोडीन का ब्योरा मांगा है। वहीं दूसरी ओर उन दवा व्यापारियों और अपराधियों के रिकॉर्ड भी खंगाल रही है, जिनके खिलाफ बीते कुछ वर्षों के दौरान नशीली दवाओं की खेप बरामद की गई थी।
सीबीएन के अधिकारियों की माने तो नशीले कफ सिरप सिंडिकेट की जड़ें काफी गहरी हैं। प्रदेश में दवा के थोक मार्केट में इनकी बिक्री धड़ल्ले से होती है। बीते जुलाई माह में सीबीएन ने अमीनाबाद में छापा मारकर नशे में इस्तेमाल होने वाली 20 लाख टेबलेट और कोडीनयुक्त कफ सिरप की 5700 बोतलें बरामद की थीं। इसमें 18,47,850 टेबलेट अल्प्राजोलाम, 2,19,778 टेबलेट ट्रेमाडॉल और 1770 टेबलेट क्लोनाजेपाम की थीं।
एफएसडीए की जांच में 12 चेहरे हुए उजागर
वहीं दूसरी ओर एफएसडीए की जांच में सिंडिकेट में शामिल 12 नाम सामने आए हैं। इनमें सहारनपुर का विभोर राणा, विशाल राणा, विशाल उपाध्याय, गाजियाबाद का सौरभ त्यागी, शादाब, अभिषेक शर्मा, पप्पन यादव, वाराणसी का भोला जायसवाल, शुभम जायसवाल, आकाश पाठक, लखनऊ का मनोहर जायसवाल और कानपुर का विनोद अग्रवाल शामिल है।