राज्यपाल बोले- यूपी के लॉ एंड ऑर्डर में सुधार जरूरी, अगले साल से ऑनलाइन रिजल्ट व डिग्री
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जीवन के 83 बसंत देख चुके राज्यपाल राम नाईक के काम करने के जोश व जज्बे में आज भी कोई कमी नहीं दिखाई देती है। वह पूरी शिद्दत से संवैधानिक जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं। शनिवार को बतौर प्रदेश के राज्यपाल उनका तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा हो रहा है।
उनका कहना है कि राज्यपाल की शपथ लेने के बाद उन्होंने यूपी को उत्तम प्रदेश बनाने की मंशा जताई थी। अब उनका संकल्प उत्तर प्रदेश को सर्वोत्तम प्रदेश बनाने का है।
उन्होंने कहा, शेष कार्यकाल में वह इस संकल्प को पूरा करने का प्रयास करेंगे। राज्यपाल के रूप में तीन वर्ष पूरे होने के मौके पर ‘अमर उजाला’ ने उनसे विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से बातचीत की। प्रस्तुत हैं प्रमुख अंश-
सवाल : आपका तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा होने जा रहा है। किस तरह करते हैं इस कार्यकाल का मूल्यांकन?
जवाब : मुझे आत्मावलोकन करने की आदत है। वर्ष 1978 से सार्वजनिक जीवन में हूं। हर साल अपने कामकाज का कार्यवृत्त जनता के सामने जारी करता हूं। बीते साल मैंने जो काम किया, उससे संतुष्ट हूं। विधानसभा चुनाव गुजरे साल की महत्वपूर्ण घटना रही है। मैं सत्ता परिवर्तन का साक्षी रहा हूं। संविधान की दृष्टि से जो काम करना होता है और प्रदेश के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के रूप में जो भूमिका निभानी होती है, उससे पूरी तरह संतुष्ट हूं। बाकी लोगों पर हैं कि वह मेरे काम का मूल्यांकन किस तरह करते हैं।
अब बड़ी घटनाए होने पर भी नहीं बोलते...
सवाल : पिछली सरकार में कानून-व्यवस्था को लेकर आपने तमाम सवाल उठाए थे। मगर, अब बड़ी घटनाएं होने पर भी आपकी वैसी प्रतिक्रिया नहीं आ रही है?
जवाब : (मुस्कुराते हुए- आप मेरे ऊपर आरोप लगा रहे हैं) ऐसा नहीं है। वो सरकार भी मेरी थी और ये सरकार भी मेरी है। सरकार को सलाह देना राज्यपाल का काम है। इसलिए पूर्ववर्ती सरकार को भी सलाह देता था और अब की सरकार को भी दे रहा हूं। कानून-व्यवस्था के बारे में पहले भी कहा था कि सुधार की जरूरत है और आज भी कह रहा हूं कि सुधार होना चाहिए। फर्क इतना है कि वह सरकार पांच साल पूरे कर चुकी थी और इस सरकार के सिर्फ चार महीने हुए हैं। नई सरकार के काम का आकलन करने के लिए छह माह का समय तो देना ही चाहिए।
सवाल : कानून-व्यवस्था पर मौजूदा सरकार को कितना सफल मानते हैं। खासकर रायबरेली व सुल्तानपुर की घटना को ध्यान में रखते हुए?
जवाब : सरकार ने इन घटनाओं को संज्ञान लिया है। मैंने मुख्यमंत्री से चर्चा की। सपा के वरिष्ठ नेताओं ने भी ज्ञापन दिया। सरकार इस दिशा में काम कर रही है।
अखिलेश और योगी दोनों से है अच्छे संबंध
सवाल: नई सरकार में खुद की भूमिका को लेकर क्या सोचते हैं? पिछली सरकार के मुकाबले क्या इसमें कोई बदलाव महसूस करते हैं?
जवाब : नई सरकार अपने घोषणा पत्र के अनुसार काम कर रही है। पिछली सरकार में मैंने कुछ बातें कही थीं। मसलन, जवाहरबाग कांड के बाद अवैध कब्जों पर श्वेत पत्र जारी करने, अतिक्रमण हटाने, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण का ऑडिट कराने, 24 जनवरी को यूपी का स्थापना दिवस आयोजित करने जैसे मुद्दों पर अखिलेश सरकार ने कुछ नहीं किया। जबकि योगी सरकार ने इन मुद्दों पर सार्थक निर्णय किया। कार्य पद्धति में बदलाव दिख रहा है। अखिलेश से अच्छे संबंध थे और योगी से भी हैं।
सवाल : अपने तीन साल के कार्यकाल में विश्वविद्यालयों में कितना और क्या बदलाव कर पाए। भविष्य की योजनाएं क्या हैं?
जवाब : विश्वविद्यालयों का शैक्षिक कैलेंडर बना, समय पर परीक्षाएं हो रही हैं और परिणाम निकल रहे हैं। नकलविहीन परीक्षा कराने की दिशा में भी पहल हुई है। समय पर दीक्षांत समारोह हो रहे हैं। इसमें गाउन की जगह भारतीय परिधान लागू हुआ है। उच्च शिक्षा में सुधार के लिए कुलपतियों की बैठक में कई सकारात्मक निर्णय किए हैं। जल्द ही इसके अच्छे नतीजे सामने आएंगे। विश्वविद्यालयों में भ्रष्टाचार पर अंकुश लिए कदम उठाए हैं। एक कुलपति को बर्खास्त किया है और एक कुलसचिव के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है। शिक्षा के व्यवसायीकरण के माहौल को बदलने का प्रयास कर रहा हूं।
यूपी को सर्वोत्तम प्रदेश बनाने की पूरी कोशिश करूंगा
सवाल : राज्यपाल के तौर पर आपका कार्यकाल दो वर्ष बचा है। प्रदेश को लेकर क्या योजनाएं हैं?
जवाब : राज्यपाल की शपथ लेते समय यूपी को उत्तम प्रदेश बनाने की बात कही थी। अब बचे कार्यकाल में यूपी को सर्वोत्तम प्रदेश बनाने का संकल्प है। इसके लिए पूरा कोशिश करूंगा।
सवाल : कहते हैं राज्यपाल केंद्र और राज्य के बीच सेतु का काम करते हैं। जब दोनों जगह एक ही पार्टी की सरकार है तो सेतु का काम बचा है कि नहीं?
जवाब : सेतु जैसा काम पहले भी था और आज भी है। फर्क इतना है कि दोनों जगह एक ही पार्टी की सरकार होने से एक-दूसरे को समझने में आसानी हो जाती है। काम में तेजी आ जाती है। विकास कार्यों को लेकर राजनीतिक आक्षेप का मौका नहीं रह जाता। पर, नतीजे देने का दबाव भी बढ़ जाता है।
सवाल: किन मोर्चों पर सुधार की गुंजाइश है और कैसे संभव है?
जवाब : सुधार की गुंजाइश हमेशा बनी रहती है। कानून-व्यवस्था के साथ ही कृषि, बिजली, सड़क व शिक्षा के क्षेत्र में विशेष ध्यान देने की जरूरत है। इसमें जितने अच्छे ढंग से काम होगा, उतना ही प्रदेश के विकास को गति मिलेगी। कानून-व्यवस्था अच्छी होगी तो निवेश का माहौल बनेगा।
अगले साल तक ऑनलाइन परीक्षा व डिग्री देने की स्थिति में होंगे
सवाल : सपा सरकार के मुकाबले क्या मौजूदा सरकार में आपकी सक्रियता कम हुई है? आमजन तो ऐसा ही सोचते हैं?
जवाब : यह तो देखने वाले के चश्मे पर निर्भर है। जब अपने तीसरे साल का कार्यवृत्त जारी करूंगा तो पता चल जाएगा। मेरी सक्रियता में कोई कमी नहीं आई है।
सवाल : विश्वविद्यालय अभी तक परंपरागत ढर्रे पर चल रहे हैं। क्या आपको नहीं लगता कि क्षेत्र विशेष में काम करने वालों को सीधे विश्वविद्यालयों में मौका दिया जाए, जिससे उनकी विशेषज्ञता के आधार पर स्किल डवलपमेंट में मदद मिल सके?
जवाब : विश्वविद्यालयों को यह करना चाहिए। विद्वानों के मार्गदर्शन से लाभ होगा। कुछ विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ एमओयू की बातचीत चल रही है ताकि यहां छात्रों को भी क्वालिटी एजुकेशन मिल सके।
सवाल : ऑनलाइन डिग्री के लिए यूजीसी ने पहल की है। यूपी में इसके लिए क्या तैयारियां हैं?
जवाब : अगले साल तक हम ऑनलाइन परीक्षा परिणाम व डिग्री देने की स्थिति में होंगे। वहीं, डिजिटलाइजेशन के जरिए यह भी व्यवस्था की जा रही है कि छात्र अपनी उत्तर पुस्तिका भी ऑनलाइन देख सकें।