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बिल्डरों की धोखाधड़ी पर लगेगी लगाम, बुकिंग के समय ही बताना होगा सुविधाओं के बारे में

Thu, 11 Oct 2018 10:14 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 11 Oct 2018 10:14 AM IST
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uttar pradesh government decides rule for buyers of flats.

बिल्डर की धोखाधड़ी से बचाने के लिए प्रदेश सरकार ने बिल्डर के साथ ही खरीदार के भी अधिकार तय कर दिए हैं। इसके तहत ‘उप्र भू-संपदा (विनिमय और विकास) अधिनियम’ (यूपी रेरा) में रियल एस्टेट की परियोजनाओं का पंजीकरण कराने के समय ही ‘विक्रय अनुबंध’ (एग्रीमेंट फॉर सेल) जमा करना अनिवार्य कर दिया गया है।

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इस अनुबंध में खरीदी जाने वाली संपत्ति के बारे में पूरा ब्यौरा दर्ज करना जरूरी है। आवास एवं शहरी नियोजन विभाग द्वारा तैयार ‘द उप्र रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंव डवलपमेंट) (एग्रीमेंट फॉर सेल रूल्स)’ को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी।
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फैसले के अनुसार बिल्डर और खरीदार के बीच जो अनुबंध किया जाएगा, उसमें फ्लैट या प्लॉट बुक करते समय प्रमोटर को उन सभी शर्तों का उल्लेख करना अनिवार्य होगा, जिनपर उसने बुकिंग की है।
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अनुबंध में प्रमोटर को यह भी बताना होगा कि प्रोजेक्ट से संबंधित भूमि पर उसका पूर्ण स्वामित्व है और सक्षम स्तर से यह परियोजना स्वीकृत है। साथ ही संबंधित भूखंड पर किसी तरह का न कर्ज है और न ही किसी तरह का विवाद अदालत में लंबित है। परियोजना की भूमि, कंपनी, पार्टनरशिप फर्म का भी ब्यौरा देना होगा। कोई भी बिल्डर संपत्ति की कुल कीमत का 10 प्रतिशत से अधिक पंजीकरण शुल्क नहीं ले सकेगा।

अनुबंध के बाद नहीं बढ़ा सकेंगे कीमत न कर सकेंगे बदलाव

- अपार्टमेंट के कारपेट एरिया व प्लॉट के एरिया के आधार पर कुल मूल्य और प्रतिवर्ग मीटर व प्रति वर्ग फीट की दर।
- कवर्ड गैराज या पार्किंग की कीमत अलग से दर्ज की जाएगी।

- कॉमन एरिया के लिए आवंटी से लिए जाने वाले टैक्स व मेंटेनेंस चार्ज का पूरा ब्यौरा
- अनुबंध के समय लागू जीएसटी दर को बढ़ोतरी होने पर भी कब्जा देने तक नहीं बढ़ाया जा सकेगा।
- प्रमोटर नहीं बदला जा सकेगा।

- अनुबंध के बाद संपत्ति की कीमत नहीं बढ़ाई जा सकेगी। हालांकि विकास प्राधिकरणों के
विकास शुल्क बढ़ाने पर उसे आवंटी से लिया जाएगा। यदि बढ़ोतरी प्रोजेक्ट के पूर्ण होने की घोषित तिथि के बाद होती है तो आवंटी से बढ़ा शुल्क नहीं लिया जा सकेगा।

-आवंटित संपत्ति के साथ ही कॉमन एरिया में आवंटी का अनुपातिक क्षेत्र पर स्वामित्व होगा
- प्रोजेक्ट कापूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त होने के दो महीने के भीतर आवंटी को कब्जा देना और तीन महीने में संपत्ति की रजिस्ट्री करना अनिवार्य होगा।

-यदि आवंटी तय समय पर फ्लैट पर कब्जा नहीं लेता तो तीन माह बाद कारपेट एरिया के प्रति वर्गफीट पर दो रुपये के हिसाब से होल्डिंग चार्ज देना होगा।

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