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योगी कैबिनेट ने मदरसा शिक्षा में बदलाव को दी मंजूरी, अब दीन के साथ पढ़ाया जाएगा NCERT पाठ्यक्रम

Wed, 23 May 2018 09:46 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 23 May 2018 09:46 AM IST
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uttar pradesh cabinet approves changes in madarsa education.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : amar ujala

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता वाली प्रदेश कैबिनेट ने मदरसों में दीनी तालीम के साथ एनसीईआरटी पाठ्यक्रम की पढ़ाई को भी मंजूरी दे दी है। मदरसों में उर्दू के साथ-साथ  हिंदी व अंग्रेजी माध्यम से भी पढ़ाई होगी।

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प्रदेश सरकार के प्रवक्ता व ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने कैबिनेट के फैसले की जानकारी दी। शर्मा ने बताया कि मदरसों में दीनी तालीम के अलावा गणित, विज्ञान, अंग्रेजी, कंप्यूटर व सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों की पढ़ाई नहीं होती है।
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मदरसा बोर्ड ने मदरसों के बच्चों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए दीनी-तालीम के साथ-साथ विषयवार व कक्षावार एनसीईआरटी की किताबें पाठ्यक्रम में शामिल करने और उर्दू के साथ हिंदी व अंग्रेजी माध्यम में भी पढ़ाई का प्रस्ताव किया है। कैबिनेट ने यूपी अशासकीय अरबी-फारसी मदरसा मान्यता प्रशासन एवं सेवा नियमावली के भाग एक प्रस्तर 10(ज) में इन प्रावधानों को जोड़ने की मंजूरी दे दी है।
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शर्मा ने कहा कि इससे मदरसा में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की शिक्षा का स्तर सुधरेगा। वे मुख्यधारा में आ सकेंगे। उन्होंने बताया कि मदरसा बोर्ड पोर्टल शुरू किए जाने से मदरसों की शिक्षा-प्रणाली में व्यापक सुधार आया है। पहले कक्षा 10 और 12 में जहां 4.77 लाख रजिस्ट्रेशन थे। नकल विहीन परीक्षा के प्रयास और पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था के बाद यह संख्या घटकर 2.77 लाख ही रह गई। आगे देखें कैबिनेट के अन्य फैसले-

पर्यटन विभाग हरिद्वार में बनाएगा 100 कमरों का होटल

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हरिद्वार में उप्र. पर्यटन विभाग 100 कमरों का होटल बनवाएगा। कैबिनेट ने 100 कमरों के नए पर्यटक आवास गृह बनाने व विशिष्ट कार्यों को मंजूरी दे दी है। होटल के लिए उत्तराखंड का सिंचाई विभाग 2700 वर्ग मीटर भूमि (जो कुंभ मेले के लिए उपयोग की जाती है) उप्र. पर्यटन विभाग को देगा। इसके बदले होटल अलकनंदा परिसर स्थित 2700 वर्ग मीटर जमीन कुंभ मेले के लिए सिंचाई विभाग को हस्तांतरित की जाएगी।

दरअसल, यूपी और उत्तराखंड के बीच हरिद्वार स्थित होटल अलकनंदा के स्वामित्व के विवाद पर सर्वोच्च न्यायालय ने दोनों राज्यों को आपसी सहमति से निस्तारण के आदेश दिए हैं। आदेश के बाद दोनों राज्यों के बीच हुए उच्च स्तरीय समझौते के तहत अलकनंदा होटल परिसर में 2964 वर्गमीटर भूमि पर यूपी पर्यटन विभाग की ओर से 100 कमरों का नया होटल बनाया जाएगा।

नया होटल दो वर्ष में बनकर तैयार होगा, तब तक अलकनंदा होटल का संचालन उप्र. राज्य पर्यटन विकास निगम करेगा। नया होटल बनने पर अलकनंदा होटल उत्तराखंड सरकार को हस्तांतरित किया जाएगा।

होटल निर्माण के लिए उप्र. निर्माण निगम को कार्यदायी संस्था नामित कर 26.54 करोड़ रुपये की मंजूरी भी दी गई है। इसके अलावा होटल में विदेशी पर्यटकों के लिए उच्च श्रेणी की सुविधाएं उपलब्ध कराने और वाल पेंटिंग, फाल्स सीलिंग और कार्पेट फ्लोरिंग को भी मंजूरी दी गई है। विशिष्ट कार्य कराने के लिए पर्यटन विभाग के प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में कमेटी गठित करने को भी मंजूरी दी गई है।

एक से अधिक शादी करने वाले नहीं बन सकेंगे दरोगा

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उत्तर प्रदेश उप निरीक्षक और निरीक्षक नागरिक पुलिस सेवा नियमावली में चतुर्थ संशोधन को कैबिनेट ने अपनी मंजूरी दे दी है। प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार ने बताया कि यूपीएससी के पैटर्न पर इसमें संशोधन किया गया है। इसके तहत ऐसे अभ्यर्थी जिनकी एक से अधिक पत्नी हैं वह आवेदन नहीं कर सकेंगे। हालांकि इसमें मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत आने वाले अभ्यर्थियों को छूट दी जाएगी।

महिला और पुरुष के लिए अलग-अलग नहीं निकलेगी वैकेंसी
अरविंद कुमार ने बताया कि उक्त नियमावली में एक और संशोधन किया गया है। इसके तहत अब पुलिस विभाग में महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग वैकेंसी नहीं निकलेंगी बल्कि महिला आरक्षण के तहत उसी में 20 प्रतिशत का समायोजन कर एक साथ निकाली जाएंगी।

अब जिला स्तर पर होगा पाठ्य पुस्तकों का भुगतान
बेसिक शिक्षा के विद्यार्थियों को निशुल्क वितरित पाठ्य पुस्तकों का भुगतान अब जिला स्तर पर होगा। योगी कैबिनेट ने पाठ्य पुस्तक प्रकाशन के ठेकेदारों को 25 लाख रुपये के बिल पर 75 प्रतिशत भुगतान करने की मंजूरी दी है। बेसिक स्कूलों में कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को निशुल्क पाठ्य पुस्तकों का वितरण होता है।

विभाग ने 1 फरवरी 2018 को निर्धारित नीति के तहत शत प्रतिशत आपूर्ति होने पर प्रथम किस्त के रूप में 75 प्रतिशत भुगतान एक महीने में करने का निर्णय किया था। विलंब से आपूर्ति की स्थिति में नियमानुसार कटौती कर भुगतान किया जाना था। मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में पिछले आदेश में संशोधन कर शैक्षिक सत्र 2018-19 में किताबों के प्रकाशन व वितरण के सापेक्ष जिला स्तर पर 25 लाख रुपये के बिल पर 75 प्रतिशत (18.75 लाख रुपये) का भुगतान रनिंग पेमेंट के आधार पर करने की मंजूरी दी गई है।

संस्कृति स्कूल की मान्यता के लिए जमीन हस्तांतरण को मंजूरी

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प्रदेश कैबिनेट ने संस्कृति स्कूल की 10 एकड़ जमीन स्कूल की संचालक संस्था ‘सीएसआई एजुकेशनल सोसाइटी राजभवन’ के नाम हस्तांतरित करने को मंजूरी दे दी है। यह स्कूल चकगंजरिया में आईएएस अधिकारियों के बच्चों व अन्य सरकारी कर्मचारियों के बच्चों की पढ़ाई के लिए स्थापित किया गया है।

राज्य सरकार के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने बताया कि संस्था के नाम जमीन का हस्तांतरण सीबीएसई की मान्यता के लिए जरूरी है। जमीन का हस्तांतरण एक रुपये के सांकेतिक प्रीमियम पर होगा। हस्तांतरण के लिए स्टांप शुल्क में भी छूट दी जाएगी। जमीन की लीज अवधि 30 वर्ष के लिए होगी।

इसका दो बार 30-30 वर्ष के लिए नवीनीकरण कराया जा सकेाग। यानी नवीनीकरण सहित लीज अवधि 90 वर्ष की होगी। इस स्कूल का निर्माण लखनऊ विकास प्राधिकरण करा रहा है। इसके लिए सरकार ने 65 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए हैं। स्कूल का संचालन 2017-18 से शुरू हो चुका है।

अयोध्या में माध्यमिक शिक्षा विभाग की जमीन पर बनेगा 220 केवी का उपकेंद्र

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अयोध्या में सुचारु बिजली आपूर्ति के लिए 220 केवी का एक ट्रांसमिशन विद्युत उपकेंद्र बनेगा। प्रदेश कैबिनेट ने इसके लिए जमीन खरीदने को हरी झंडी दे दी है।

ग्राम मलिकपुर में बिजली विभाग इस उपकेंद्र के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग की 2.633 हेक्टेयर जमीन सर्किल रेट पर 84 लाख 25 हजार 600 रुपये भुगतान कर लेगा। इस उपकेंद्र को बनवाने के लिए बिजली विभाग 70 प्रतिशत रकम की व्यवस्था वित्तीय संस्थानों से ऋण लेकर जुटा सकेगा। 30 प्रतिशत निजी माध्यम से विभाग को खर्च करनी होगी।

पीएनजी के लिए भूमिगत पाइप बिछाने की मंजूरी
सरकार ने ग्रीन गैस लिमिटेड द्वारा शहर में पाइप नेचुरल गैस (पीएनजी) बिछाने की कैबिनेट ने सशर्त मंजूरी दी है। इसके लिए मानक का निर्धारण भी किया गया है। सरकार का मानना है कि भूमिगत पाइप लाइन के जरिए घरेलू गैस आपूर्ति की व्यवस्था शुरू होने से सड़कों पर यातायात का दबाव कम होगा, वहीं गैस रिसाव के खतरों से भी बचा जा सकेगा। इससे नागरिकों को सस्ते व सुरक्षित इंधन की आपूर्ति हो सकेगी। सड़क खुदाई के लिए संबंधित कंपनी को सरकार की तरफ से निर्धारित गाइडलाइन का पालन भी करना होगा।

ग्रामीण क्षेत्रों की राशन दुकानों पर लगेंगी ई पॉज मशीनें, टेंडर फाइनल

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ग्रामीण क्षेत्रों की राशन दुकानों पर ई पॉज मशीनों की आपूर्ति का टेंडर फाइनल हो गया। मशीनों की आपूर्ति ओएसिस साइबर नेटिक प्राइवेट लिमिटेड और आर्मी इंफोटेक प्राइवेट लिमिटेड कंपनियां कराएंगी। इस प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।

सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि ई पॉज मशीन लगने से हर माह करीब 100 करोड़ रुपये की बचत होगी। अब तक नगरीय क्षेत्र में 13044 मशीनें लगाई गई हैं। मशीनों के लगने के बाद से लगभग पांच लाख कार्ड धारक कम हो गए हैं।

खाद्य आयुक्त आलोक कुमार ने बताया कि प्रदेश को छह जोन में बांटकर चार जोन का काम ओएसिस को और दो जोन का काम आर्मी इंफोटेक को दिया गया है। दोनों कंपनियां मिलकर प्रदेश के 68 हजार से अधिक सरकारी गल्ले के दुकानदारों के यहां यह मशीनें लगाएंगी।

उन्होंने बताया कि अगस्त के अंत तक इसे लगाने का काम शुरू हो जाएगा जो अक्तूबर के अंत तक पूरा होगा। पांच साल तक मशीनों के रखरखाव की जिम्मेदारी भी इन्हीं कंपनियों की होगी।

मिर्जापुर और एटा में नए मेडिकल कॉलेज की स्थापना को हरी झंडी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आम बजट में यूपी में आठ नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना का एलान किया था। इनमें से कैबिनेट ने मिर्जापुर व एटा में मेडिकल कॉलेजों की स्थापना को अपनी मंजूरी दे दी है।
सरकार के प्रवक्ता व स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि ये मेडिकल कॉलेज तीन-तीन संसदीय क्षेत्रों के बीच सबसे पिछड़े जिले में चयनित किए गए हैं।

मेडिकल कॉलेजों के लिए 20 एकड़ जमीन की जरूरत होती है। एटा में जिला अस्पताल के अलावा प्रशासनिक भवन के लिए जमीन की व्यवस्था की गई है। यहां मेडिकल कॉलेज के लिए आवश्यक 16.44 एकड़ जमीन गांधी स्मारक इंटर कॉलेज से ली गई है।

इसी तरह मिर्जापुर में जिला अस्पताल के अलावा 21.185 एकड़ जमीन कृषि विभाग से ली जाएगी। उन्होंने बताया कि  प्रत्येक मेडिकल कॉलेज पर 250 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसमें केंद्र 60 प्रतिशत और प्रदेश 40 प्रतिशत राशि खर्च खरेंगे।

अब जिला स्तर पर होगा पाठ्य पुस्तकों का भुगतान

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बेसिक शिक्षा के विद्यार्थियों को निशुल्क वितरित पाठ्य पुस्तकों का भुगतान अब जिला स्तर पर होगा। योगी कैबिनेट ने पाठ्य पुस्तक प्रकाशन के ठेकेदारों को 25 लाख रुपये के बिल पर 75 प्रतिशत भुगतान करने की मंजूरी दी है। बेसिक स्कूलों में कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को निशुल्क पाठ्य पुस्तकों का वितरण होता है।

विभाग ने 1 फरवरी 2018 को निर्धारित नीति के तहत शत प्रतिशत आपूर्ति होने पर प्रथम किस्त के रूप में 75 प्रतिशत भुगतान एक महीने में करने का निर्णय किया था। विलंब से आपूर्ति की स्थिति में नियमानुसार कटौती कर भुगतान किया जाना था।

मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में पिछले आदेश में संशोधन कर शैक्षिक सत्र 2018-19 में किताबों के प्रकाशन व वितरण के सापेक्ष जिला स्तर पर 25 लाख रुपये के बिल पर 75 प्रतिशत (18.75 लाख रुपये) का भुगतान रनिंग पेमेंट के आधार पर करने की मंजूरी दी गई है।

प्रदेश में लागू होगा एनर्जी कंजर्वेशन बिल्डिंग कोड

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व्यावसायिक भवनों में बिजली की मांग कम करने के उद्देश्य से सरकार ने यूपी में भी ‘उप्र एनर्जी कंजर्वेशन बिल्डिंग कोड-2018’ (यूपी ईसीबीसी) लागू करने का फैसला किया है। यानी अब  होटल, अस्पताल व शैक्षिक संस्थाओं जैसे वाणिज्यिक भवनों का निर्माण ‘एनर्जी कंजर्वेशन बिल्डिंग कोड’ के मुताबिक किया जाएगा। कैबिनेट से इसे मंजूरी दे दी है। प्रदेश में यूपी ईसीबीसी अधिसूचना जारी होने के दिन से लागू माना जाएगा।

यूपी ईसीबीसी उन भवनों में या परिसर में लागू होगा, जहां विद्युत भार 100 किलोवाट या इससे अधिक होगा। कांट्रेक्ट डिमांड 120 किलोवाट या उससे अधिक वाले भवनों और 1000 से 2000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल के वाणिज्यिक भवनों में भी यह कोड लागू होगा। निजी आवासीय भवनों को इस कोड से छूट दी गई है। सरकार का मानना है कि ईसीबीसी के मानक के मुताबिक भवनों का निर्माण कराने पर लागत में करीब 5 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी हो सकती है, लेकिन उसकी भरपाई बिजली खपत में होने वाली कमी से पूरा किया जाएगा।

इस तरह से भवनों में लागू होगा कोड
होटल, अस्पताल, अनुसंधान संस्थान, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन, रैपिड ट्रांजिट सिस्टम, व्यावसायिक व शैक्षणिक संस्थान और शापिंग कॉम्पलेक्स के अलावा ऐसे भवन जहां पर लोग धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक व अन्य सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए एकत्र होते हैं।

25 से 50 प्रतिशत तक कम होगी बिजली की खपत
ईसीबीसी कोड के मुताबिक डिजाइन के आधार पर निर्मित भवनों में 25 से 50 प्रतिशत तक बिजली की खपत कम हो सकती है। ईसीबीसी के मानकों के मुताबिक भवनों को ईसीबीसी, ईसीबीसी प्लस और सुपर इसीबीसी श्रेणी में बांटा गया है। तीनों श्रेणी के भवनों में क्रमश: 25, 35 व 50 प्रतिशत तक कमी का आकलन किया गया है।

सभी नगरीय निकायों में घर-घर पहुंचेगी पाइप लाइन से गैस

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प्रदेश सरकार ने सभी नगरीय निकाय क्षेत्रों में घर-घर पाइप लाइन से गैस पहुंचाने का फैसला किया है। ग्रीन गैस लिमिटेड सभी नगर निगमों, नगर पालिका परिषदों और नगर पंचायतों में घर-घर पाइप नेचुरल गैस (पीएनजी) पहुंचाने के लिए पाइप लाइन बिछाएगी। आगरा और लखनऊ से इसकी शुरुआत होगी। कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि पाइप लाइन बिछाने के लिए  गाइडलाइन को भी मंजूरी दी गई है। निकायों में भूमिगत पाइप लाइन बिछाते समय सुरक्षा का पर्याप्त बंदोबस्त ही होगा। वर्तमान में फिलिंग स्टेशनों से सड़क परिवहन से एलपीजी गैस घर-घर पहुंचाई जा रही है। इससे सड़क पर यातायात का दबाव व पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

भूमिगत पाइप लाइन बिछाने से सस्ते व सुरक्षित ईंधन की आपूर्ति हो सकेगी। पर्यावरण पर कोई प्रतिकूल प्रभाव भी नहीं पड़ेगा। प्रवक्ता ने बताया कि पाइप लाइन आधुनिक तकनीक से डाली जाएगी जिससे जमीन की सहत पर होने वाले क्रियाकलाप में बहुत कम बाधा आएगी और समय भी कम लगेगा। जहां यातायात में रुकावट की आशंका होगी वहां चैंबर व पोल मार्कर बनाने की अनुमति नहीं होगी। किसी तरह की दुर्घटना या नुकसान के लिए कंपनी जिम्मेदार होगी। अगर कंपनी पोल मार्कर या आरसीसी मार्कर पर कोई विज्ञापन लगाती है तो इसके लिए उसे निकाय से अनुमति लेनी होगी और तय शुल्क अदा करना होगा।

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