सोच समझ कर करें इन दिनों सरसों के तेल का प्रयोग
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रमजान के महीने में तेल और रिफाइंड ऑयल की मांग बढ़ती देख धंधेबाज शहर में खुलेआम ब्लेंडेड ऑयल को सरसों का तेल बता कर बेच रहे हैं। इसके लिए वे उपयोग किए जा चुके टिनों को ही बाहर से साफ सुथरा कर उसमें मिलावटी और घटिया तेल भरने का खेल कर रहे हैं।
प्रतिबंध के बावजूद धड़ल्ले से चल रहे री-पैकिंग के इस गोरखधंधे पर रोकथाम को लेकर जिला प्रशासन से लेकर एफएसडीए प्रशासन तक के अधिकारी आंखें मूंदे हैं,जबकि उनकी कार्रवाइयां सिर्फ सैंपलिंग तक सीमित हैं।
एफएसडीए अधिकारियों की उदासीनता के कारण कानपुर और लखनऊ से जुड़े खाद्य तेल कारोबारी मोटा मुनाफा कमाने के इस खेल में 15 किलो के एक टिन पर 150 से 200 रुपये फायदा उठाया रहे हैं।
पढ़िए,ऐसे बन रहा है जहरीला सरसों का तेल
इतना ही नहीं,ज्यादा मुनाफा पाने के लिए धंधेबाज ब्लैंडेड ऑयल को सरसों के तेल की तरह दिखाने के लिए प्रतिबंधित घुलनशील रंग,बटर ऑयल व हाइड्रोसायनिक अम्ल मिलाने से भी गुरेज नहीं कर रहे हैं।
तेल और घी से जुड़े धंधेबाज खाली टिनों के इस खेल से लाखों की कमाई कर रहे हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि शहर में रोज 25 से 30 हजार खाली टिनों की खरीद की जा रही हैं। कबाड़ी को 15 से 20 रुपये प्रति टिन देकर धंधेबाज तेल और घी के खाली टिन खरीद लेते हैं। फिर प्रति टीन 10 रुपये खर्च कर उसे पानी और कास्टिक सोडा से साफ करवा देते हैं और रि-फिलिंग के लिए पहुंचा देते हैं।
टिनों पर चस्पा कागज के लेबिल को थिनर या दूसरे केमिकल से छुड़वाकर बाहरी सतह को बिल्कुल नया जैसा बना देते हैं। फिर उस पर नए ब्रांड का लेबल लगा दिया जाता है। हालांकि छोटे छेद के कारण टिन के अंदर की सफाई मात्र पानी डाल कर ही पूरी मान ली जाती है। नया टिन तैयार करने में 70 से 80 रुपये खर्च होते हैं।
क्या कहता है कानून
खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम की धारा 49 उपधारा 5(6) में एक बार उपयोग में आने के बाद किसी भी टिन या प्लास्टिक कंटेनर का दोबारा इस्तेमाल प्रतिबंधित है।