लखनऊ में हुई एसपीजीआई में अतंरराष्ट्रीय यूरोलॉजी मीट
- बार-बार पेशाब जाना इस बीमारी का लक्षण
- टॉयलेट देता है कई बड़ी बीमारियों के संकेत
- आरामपरस्ती छोड़िए तभी रहेंगे स्वस्थय
- यौन गतिविधियां भी बना रही है युवाओं को बीमार
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अगर आप 24 घंटे में 8 बार से ज्यादा पेशाब जाते हैं तो यह किसी बड़ी बीमारी की ओर इशारा हो सकता है। यह कहना है दुनिया के जाने माने यूरोलॉजिस्ट्स का, जो शुक्रवार को एसजीपीजीआई लखनऊ में आयोजित इंटरनेशनल यूरोलॉजी मीट में शामिल हुए।
उन्होंने बताया कि बार-बार पेशाब जाना ओवर एक्टिव ब्लेडर का लक्षण हो सकता है, जो किडनी को भी नुकसान पहुंचा सकता है। यूरो मीट में इंपीरियल कॉलेज हेल्थ केयर लंदन से आए डॉ. रानन दास गुप्ता ने ओवर एक्टिव ब्लेडर के बारे में जानकारी देते हुए इससे संबंधित समस्याओं को सामने रखा।
उन्होंने ने बताया कि ओवर एक्टिव ब्लेडर की वजह से किडनी को नुकसान पहुंचता है। इससे बचाव के लिए जरूरी है कि ब्लेडर को ठीक रखा जाए। वहीं, पीजीआई में हर महीने दर्जनों ऐसे मामले आ रहे हैं, जिनमें ओवर एक्टिव ब्लेडर की वजह से संक्रमण और किडनी को नुकसान हो रहा है।
टॉयलेट देता है कई बड़ी बीमारियों के संकेत
उन्होंने ने कहा कि आमतौर पर दिन भर में एक सामान्य व्यक्ति को सामान्य मौसम में 3 लीटर पानी की जरूरत होती है। इसमें 1 से डेढ़ लीटर पानी हमारा शरीर उपयोग कर लेता है।
बचा हुआ पानी पेशाब के जरिये निकल जाता है। लघुशंका कब करनी है, इसके लिए हमारे रीढ़ में मौजूद नर्व दिमाग को संकेत भेजती हैं। लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब यह संकेत बार-बार आने लगे।
सामान्य तौर पर दिन भर में चार से आठ दफा यह संकेत दिमाग को पहुंचनी चाहिए। यानी ऐसे व्यक्ति का यूरिन सिस्टम सही काम कर रहा है, लेकिन इससे अधिक हो जाए तो यह ओवर एक्टिव ब्लेडर का संकेत है और इसका इलाज करवाना जरूरी हो जाता है।
आरामपरस्ती छोड़िए तभी रहेंगे स्वस्थय
दिन भर में एक -दो दफा फिज्जी कोल्ड ड्रिंक पीना या तीन-चार दफा चाय-कॉफी पी लेना सभी के लिए सामान्य हो गया है। शराब भी पीने के दौरान ज्यादा द्रव्य शरीर में जाने लगा है।
पानी के साथ-साथ यह सब शरीर में द्रव्य की मात्रा बढ़ाते हैं। इनकी वजह से भी हमारे दिमाग को बार-बार लघुशंका के संकेत मिलने लगते हैं।
यूरोलॉजिस्ट्स सलाह देते हैं कि सबसे पहले लाइफ स्टाइल में बदलाव की जरूरत है। आरामपरस्ती छोड़नी होगी ताकि शरीर में पानी का उपभोग बढ़े। दूसरी ओर पानी के अलावा अन्य ड्रिंक्स पर नियंत्रण करना होगा। वहीं चिकित्सकों की सलाह पर दवाएं लेना इलाज का प्रमुख विकल्प है।
यौन गतिविधियां भी बना रही है युवाओं को बीमार
यूरोलॉजी में क्रॉनिक पेल्विस पेन सिंड्रोम भले ही नया शब्द हो, लेकिन एसजीपीजीआई के यूरोलॉजी विभाग में हर हफ्ते आ रहे मामलों के लिए नहीं। 25 से 40 वर्ष के युवा पेशाब करते समय पेट, निचले हिस्से और पेल्विस में दर्द जैसे लक्षण लेकर आ रहे हैं।
डॉ. दास गुप्ता बताते हैं कि इसकी प्रमुख वजह अभी तक युवाओं का परिवार से दूर रहना, कॉल सेंटर में रात को जागकर काम करना, बैंकिंग और फाइनेंस सेक्टर में कुर्सी पर बैठकर काम करना और इन कामों में तनाव मुख्य रूप से सामने आया है।
कई युवा सेना या पुलिस में हैं और परिवार से दूर हैं, उनमें भी यह सिंड्रोम मिल रहा है। माना जा रहा है कि यौन गतिविधियां घटना भी एक वजह हो सकती है। सबसे बड़ी दिक्कत है इसकी पहचान।