कम की जाएं शहरी व ग्रामीण घरेलू बिजली दरें, 35 पैसे से एक रुपये प्रति यूनिट तक कमी का दिया प्रस्ताव
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वर्मा का कहना है कि कोरोना महामारी के मद्देनजर कई राज्यों में बिजली दरों में कमी की गई है। आयोग के समक्ष जो प्रस्ताव दिया गया है वह पिछले साल आयोग द्वारा उपभोक्ताओं का बिजली कंपनियों पर निकले 13,337 करोड़ रुपये के आधार पर तैयार किया गया है।
साथ ही, पावर कॉर्पोरेशन द्वारा बताए गए 4500 करोड़ रुपये के घाटे को घटाकर सभी उपभोक्ताओं को चार प्रतिशत रेग्युलेटरी लाभ देने, घरेलू शहरी व ग्रामीण उपभोक्ताओं का फिक्स चार्ज समाप्त करने की मांग भी रेट शिड्यूल में प्रस्तावित है। इसमें शहरी घरेलू उपभोक्ताओं के सभी स्लैब में 50 से 70 पैसे प्रति यूनिट की कमी करते हुए दरें प्रस्तावित की गई हैं।
रेट शिड्यूल में महंगी बिजली खरीद की जांच की भी मांग
इसी तरह ग्रामीण घरेलू उपभोक्ताओं के स्लैब में 35 से 65 पैसे प्रति यूनिट की कमी का प्रस्ताव दिया गया है। ग्रामीण क्षेत्र के अनमीटर्ड उपभोक्ताओं की दर 500 रुपये प्रति किलोवाट प्रतिमाह से घटाकर 400 रुपये प्रति किलोवाट प्रतिमाह करने का प्रस्ताव दिया गया है। उपभोक्ता परिषद ने कामर्शियल उपभोक्ताओं के मिनिमम चार्ज को खत्म करने, सौभाग्य के तहत कनेक्शन लेने वाले ग्रामीण घरेलू बीपीएल उपभोक्ताओं की अलग श्रेणी बनाकर उन्हें एक से डेढ़ रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली देने का प्रस्ताव रखा है।
रेट शिड्यूल में 15 से 25 रुपये प्रति यूनिट तक महंगी बिजली खरीद की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग भी की गई है। इस बाबत वर्मा ने आठ वर्षों में बिजली दरों में की गई वृद्धि का ब्यौरा दिया है। कहा, केवल किसानों व घरेलू बिजली की दरों में अधिकतम 84 से 500 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है। समय पर बिल जमा करने वाले उपभोक्ताओं को 3 प्रतिशत की छूट देने, स्मार्ट मीटर में गोलमाल पर प्रतिबंध लगाने, रीडिंग के आधार पर अनिवार्य रूप से बिल देने, लाइन हानियों में की गई बढ़ोतरी की जांच कराने का अनुरोध भी किया गया है।