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Lucknow News: मरीज की मौत पर निजी अस्पताल में हंगामा... इलाज रोकने का आरोप
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प्रतीकात्मक।
लखनऊ। सुशांत गोल्फ सिटी स्थित टेंडर पॉम हॉस्पिटल में सोमवार को मरीज की मौत के बाद परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाकर हंगामा किया। परिजनों का आरोप है कि रुपये जमा नहीं करने पर इलाज रोक दिया गया, जिससे मरीज की मौत हो गई। मौत के बाद 1.50 लाख रुपये का बिल जमा करने पर ही शव देने की बात कही गई। सूचना पर पहुंची पुलिस से भी अस्पताल स्टाफ की नोकझोंक हुई। दरोगा से भी अभद्रता की। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
गोसाईंगंज के परेहटा निवासी मुश्ताक अहमद के मुताबिक, रविवार सुबह सांस लेने में दिक्कत होने पर उनके 82 वर्षीय पिता सगीर मोहम्मद को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आईसीयू में भर्ती करने से पहले 40 हजार रुपये जमा कराए गए। आरोप है कि शाम आठ बजे के बाद परिजनों को मरीज से मिलने नहीं दिया गया और दो लाख रुपये जमा कराने का दबाव बनाया गया।
मुश्ताक के मुताबिक, सोमवार सुबह उनकी बेटी अंजू किसी तरह मरीज के पास पहुंची तो इलाज बंद मिला। आरोप है कि स्टाफ ने रुपये जमा नहीं होने के कारण इलाज रोकने की बात कही। विरोध करने पर महिला स्टाफ ने अंजू को थप्पड़ मार दिया। मरीज की मौत के बाद शव देने को लेकर भी विवाद हुआ। सूचना पर पुलिस पहुंची तो दोनों पक्षों में नोकझोंक हुई। बाद में करीब दो बजे शव परिजनों को सौंप दिया गया। दोनों पक्षों ने पुलिस को तहरीर दी है।
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एसीपी गोसाईंगंज ऋषभ यादव ने बताया कि दोनों पक्षों की तहरीर मिली है। सीसीटीवी फुटेज समेत अन्य साक्ष्य जुटाकर जांच की जा रही है।
Iबिल न देने पर शव रोकने का आरोप गंभीर है। शिकायत मिलने पर जांच कराई जाएगी।I
I- डॉ. एनबी सिंह, सीएमओI
Iआरोप बेबुनियाद है। मरीज कैंसर से पीड़ित था और तीसरी बार भर्ती हुआ था। इलाज में लापरवाही नहीं हुई और शव बिल के लिए नहीं रोका गया। I
I- डॉ. शिवा श्रीवास्तव, हॉस्पिटल मैनेजरI
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गोसाईंगंज के परेहटा निवासी मुश्ताक अहमद के मुताबिक, रविवार सुबह सांस लेने में दिक्कत होने पर उनके 82 वर्षीय पिता सगीर मोहम्मद को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आईसीयू में भर्ती करने से पहले 40 हजार रुपये जमा कराए गए। आरोप है कि शाम आठ बजे के बाद परिजनों को मरीज से मिलने नहीं दिया गया और दो लाख रुपये जमा कराने का दबाव बनाया गया।
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मुश्ताक के मुताबिक, सोमवार सुबह उनकी बेटी अंजू किसी तरह मरीज के पास पहुंची तो इलाज बंद मिला। आरोप है कि स्टाफ ने रुपये जमा नहीं होने के कारण इलाज रोकने की बात कही। विरोध करने पर महिला स्टाफ ने अंजू को थप्पड़ मार दिया। मरीज की मौत के बाद शव देने को लेकर भी विवाद हुआ। सूचना पर पुलिस पहुंची तो दोनों पक्षों में नोकझोंक हुई। बाद में करीब दो बजे शव परिजनों को सौंप दिया गया। दोनों पक्षों ने पुलिस को तहरीर दी है।
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एसीपी गोसाईंगंज ऋषभ यादव ने बताया कि दोनों पक्षों की तहरीर मिली है। सीसीटीवी फुटेज समेत अन्य साक्ष्य जुटाकर जांच की जा रही है।
Iबिल न देने पर शव रोकने का आरोप गंभीर है। शिकायत मिलने पर जांच कराई जाएगी।I
I- डॉ. एनबी सिंह, सीएमओI
Iआरोप बेबुनियाद है। मरीज कैंसर से पीड़ित था और तीसरी बार भर्ती हुआ था। इलाज में लापरवाही नहीं हुई और शव बिल के लिए नहीं रोका गया। I
I- डॉ. शिवा श्रीवास्तव, हॉस्पिटल मैनेजरI