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UPPSC: नौकरियों के इंटरव्यू के दौरान पुरानी व्यवस्था से ही मिलेंगे नंबर
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Mon, 11 Sep 2017 05:18 PM IST
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यूपी
- फोटो : source
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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) इंटरव्यू के दौरान नंबर देने की प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं करेगा।
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यूपीपीएससी के पूर्व सचिव के कार्यकाल के दौरान इंटरव्यू प्रक्रिया में बदलाव किए जाने के निर्णय की आयोग ने अपने स्तर से दोबारा समीक्षा की और पुरानी व्यवस्था को ही बरकरार रखने का फैसला किया।
कुछ दिनों पहले शासन स्तर पर हुई बैठक में आयोग के अफसरों ने इस बाबत शासन को भी अवगत करा दिया।
आयोग की परीक्षाओं में इंटरव्यू के दौरान साक्षात्कार बोर्ड के सभी सदस्य अभ्यर्थियों को ग्रेड देते हैं। यह ग्रेड आपसी सहमति से दिया जाता है। इसी ग्रेड के आधार पर नंबर तय किए जाते हैं, जिसके लिए इंटरव्यू बोर्ड के अध्यक्ष को अधिकृत किया जाता है।
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प्रत्येक सदस्य की ओर से दिए गए ग्रेड के तहत न्यूनतम और अधिकतम नंबर में पांच अंक का अंतर होता है। यह अध्यक्ष के विवेक पर निर्भर करता है कि वह इन पांच अतिरिक्त अंकों में अभ्यर्थियों को कितना नंबर देते हैं।
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बदलाव का हुआ था प्रस्ताव
पूर्व सचिव के कार्यकाल में इस प्रक्रिया में बदलाव का प्रस्ताव पारित किया गया। तय हुआ कि अध्यक्ष के साथ इंटरव्यू बोर्ड के सदस्य भी सीधे नंबर देंगे और कुल अंकों का औसत नंबर अभ्यर्थी को दिया जाएगा। हालांकि यह प्रस्ताव पारित करते वक्त नियमों पर ध्यान नहीं दिया गया।
आयोग में नए अफसरों की तैनाती के बाद इस निर्णय की दोबारा समीक्षा की गई और पाया गया कि नंबर देने की मौजूदा व्यवस्था को सुप्रीम कोर्ट भी सही ठहरा चुका है।
इसके अलावा यूपी ऐक्ट 1985 और आयोग की नियमावली 2011 में भी ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत बदलाव के प्रस्ताव को सही ठहराया जा सके।
ऐसे में समीक्षा के बाद आयोग ने निर्णय लिया कि पुरानी व्यवस्था को ही बरकरार रखा जाएगा। यानी नंबर बोर्ड के अध्यक्ष ही देंगे और सदस्य पहले की तरह ग्रेड देने के लिए अधिकृत होंगे।
इस बात की पुष्टि आयोग के सचिव जगदीश ने की है। पिछले दिनों शासन स्तर पर हुई बैठक में भी आयोग के अफसरों ने इस बाबत शासन को अवगत करा दिया है।
आयोग में नए अफसरों की तैनाती के बाद इस निर्णय की दोबारा समीक्षा की गई और पाया गया कि नंबर देने की मौजूदा व्यवस्था को सुप्रीम कोर्ट भी सही ठहरा चुका है।
इसके अलावा यूपी ऐक्ट 1985 और आयोग की नियमावली 2011 में भी ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत बदलाव के प्रस्ताव को सही ठहराया जा सके।
ऐसे में समीक्षा के बाद आयोग ने निर्णय लिया कि पुरानी व्यवस्था को ही बरकरार रखा जाएगा। यानी नंबर बोर्ड के अध्यक्ष ही देंगे और सदस्य पहले की तरह ग्रेड देने के लिए अधिकृत होंगे।
इस बात की पुष्टि आयोग के सचिव जगदीश ने की है। पिछले दिनों शासन स्तर पर हुई बैठक में भी आयोग के अफसरों ने इस बाबत शासन को अवगत करा दिया है।