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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP: Yogi Cabinet approves Chitrakoot Link Expressway; ₹1,008.67 crore to be spent.

यूपी: चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे के लिए योगी कैबिनेट की मंजूरी, किराये पर मकान-दुकान लेना-देना होगा आसान

Tue, 15 Sep 2026 09:15 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Tue, 15 Sep 2026 09:15 PM IST
सार

चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण से बुंदेलखंड के प्रारंभिक बिंदु से चित्रकूट धाम तक आवागमन आसान और तेज होने की उम्मीद है। इससे दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों को बेहतर यातायात सुविधा मिलेगी। 

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UP: Yogi Cabinet approves Chitrakoot Link Expressway; ₹1,008.67 crore to be spent.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। - फोटो : amar ujala

विस्तार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे के संशोधित प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। प्रवेश नियंत्रित छह लेन के इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण पर 1,008.67 करोड़ रुपये खर्च होंगे। परियोजना का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। इसमें केंद्र सरकार की किसी तरह की वित्तीय भागीदारी प्रस्तावित नहीं है।

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15.172 किलोमीटर लंबा होगा एक्सप्रेसवे
वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे की लंबाई 15.172 किलोमीटर होगी। इसका निर्माण इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) मोड पर कराया जाएगा। व्यय-वित्त समिति द्वारा पूंजीगत मदों के लिए संशोधित प्रस्ताव की लागत का मूल्यांकन किया गया था, जिसे अब कैबिनेट ने स्वीकृति प्रदान कर दी है। परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद निर्माणकर्ता के चयन की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके लिए ग्लोबल बिड आमंत्रित की जाएगी। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद एक्सप्रेसवे के निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया जाएगा।
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चित्रकूट धाम तक पहुंच होगी आसान
चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण से बुंदेलखंड के प्रारंभिक बिंदु से चित्रकूट धाम तक आवागमन आसान और तेज होने की उम्मीद है। इससे दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों को बेहतर यातायात सुविधा मिलेगी। प्रवेश नियंत्रित छह लेन एक्सप्रेसवे होने से यात्रियों को सुगम और व्यवस्थित सफर का लाभ मिल सकेगा। चित्रकूट धाम धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल है। एक्सप्रेसवे के निर्माण से यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए कनेक्टिविटी बेहतर होगी। इससे पर्यटन गतिविधियों को गति मिलने और क्षेत्र के आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलने की संभावना है। बुंदेलखंड के विकास में भी यह परियोजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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सालाना 10 लाख तक के किराए पर किया गया यह बदलाव

कैबिनेट बैठक में प्रदेश में किरायेदारी व्यवस्था को आसान बनाने के लिए अहम फैसला लिया गया। सालाना 10 लाख तक के किराए पर यह बदलाव किया गया है। 10 वर्ष तक की अवधि के किरायेदारी/पट्टा विलेखों पर प्रभावी स्टांप शुल्क एवं पंजीयन फीस में छूट को संशोधित करते हुए शुल्क व्यवस्था को सरल और किफायती बनाया गया है। इससे मकान, दुकान या गोदाम किराये पर लेने-देने वालों को बड़ी राहत मिलेगी।

स्टांप तथा न्यायालय शुल्क एवं पंजीयन मंत्री रवींद्र जायसवाल ने बताया कि अभी किसी व्यक्ति द्वारा मकान, दुकान या गोदाम किराये पर देने अथवा लेने पर स्टांप शुल्क की गणना सर्किल रेट के आधार पर होती थी। इससे किरायानामा तैयार कराकर उसका पंजीयन कराने में लोगों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ता था।

योगी सरकार ने अब इस व्यवस्था को सरल करते हुए निर्धारित शुल्क की व्यवस्था की है। इसके तहत दो लाख रुपये तक की सालाना किराया राशि पर 1,000 रुपये, छह लाख रुपये तक 3,000 रुपये और 10 लाख रुपये तक 4,500 रुपये वार्षिक शुल्क निर्धारित किया गया है।

300 करोड़ से 14429 प्राथमिक स्कूल बनेंगे स्मार्ट, बच्चों की पढ़ाई होगी रोचक

यूपी के 14429 परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित किया जाएगा। बेसिक शिक्षा विभाग इस परियोजना पर 300 करोड़ रुपये खर्च करेगा। हर स्कूल में 2.07 लाख रुपये से डिजिटल संसाधन लगाए जाएंगे। बेसिक शिक्षा विभाग के इस प्रस्ताव को मंगलवार को कैबिनेट ने हरी झंडी दे दी।

प्रस्ताव के अनुसार परिषदीय विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल में तब्दील कर बच्चों को रोचक ढंग से पढ़ाई कराई जाएगी। स्कूलों में स्कूलों में स्मार्ट क्लास स्थापित होने से ऑडियो-विजुअल से छात्र बेहतर ढंग से पढ़ाई कर सकेंगे। वह कठिन से कठिन पाठ को आसानी से समझ सकेंगे। विद्यालयों में स्मार्ट क्लास स्थापित करने के लिए श्रीट्रॉन इंडिया लिमिटेड को कार्यदायी संस्था नामित किया गया है।

संस्था विद्यालयों में 65 इंच की इंटरैक्टिव फ्लैट पैनल, ओपीएस स्लॉट, पॉवर बैकअप सिस्टम, ऑडियो-विजुअल सहायक सामग्री, कक्षा एक से पांच तक के पूरे पाठ्यक्रम का डिजिटल कंटेंट, लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम जिसमें ई-दीक्षा व ई-विद्या भी मौजूद रहेंगी, की सुविधा विकसित करेगी। स्मार्ट क्लास का क्रय व क्रियान्वयन एकीकृत मॉडल के रूप में किया जाएगा। इसमें हार्डवेयर, साफ्टवेयर और पाठ्यक्रम आधारित डिजिटल कंटेंट उपलब्ध रहेगा।

बनाई गई समिति
बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने बताया कि अपर राज्य परियोजना निदेशक समग्र शिक्षा, संयुक्त शिक्षा निदेशक बेसिक (कैंप कार्यालय) व बेसिक शिक्षा के वित्त नियंत्रक की एक समिति गठित की गई है। जो परियोजना के निविदा, चयन, संचालन आदि का काम देखेगी। स्मार्ट क्लास को बेहतर ढंग से स्थापित करने, उसके संचालन और किसी भी तरह की समस्या के समाधान के लिए राज्य स्तरीय प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट भी स्थापित की जाएगी। नोडल एजेंसी श्रीट्रॉन इंडिया लिमिटेड हेल्प डेस्क, डिवाइस मैनेजमेंट सिस्टम और व्यापक अनुरक्षण की व्यवस्था करेगी।

गन्ना मूल्य भुगतान के लिए चीनी मिलों को सरकारी गारंटी

कैबिनेट ने पेराई सत्र 2026-27 के गन्ना मूल्य भुगतान के लिए राज्य चीनी निगम लिमिटेड की मोहिउद्दीनपुर (मेरठ) चीनी मिल को 150 करोड़, पिपराईच (गोरखपुर) को 100 करोड़ रुपये और मुंडेरवा (बस्ती) की चीनी मिल को 100 करोड़ रुपये की शासकीय गारंटी के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इससे चीनी मिलों को बैंक से ऋण प्राप्त करना आसान होगा। 

6000 वर्ग मीटर तक के भूखंडों का भू उपयोग अब प्राधिकरण ही बदल सकेंगे

प्रदेश में भू उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया अब छोटे भूखंडों के लिए आसान और तेज होगी। कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश नगर योजना और विकास (भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क का निर्धारण, उद्घ्रहण एवं संग्रहण) नियमावली-2014 में तीसरे संशोधन को मंजूरी दे दी है। इसके तहत 6000 वर्ग मीटर तक के भूखंडों के भू उपयोग परिवर्तन के प्रस्ताव शासन स्तर पर भेजने के बजाय संबंधित विकास प्राधिकरण के स्तर पर ही निस्तारित किए जा सकेंगे।

आवास विभाग के विशेष सचिव राजेश कुमार राय ने बताया कि अभी भू उपयोग परिवर्तन से जुड़े प्रस्ताव शासन स्तर पर आते हैं। इससे स्वीकृति की प्रक्रिया में अधिक समय लगता है। परियोजना शुरू करने से पहले भू उपयोग परिवर्तन की मंजूरी का इंतजार करना पड़ता है, जिससे निवेश और विकास परियोजनाओं की रफ्तार प्रभावित होती है। सरकार ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत इस व्यवस्था को सरल करने का फैसला किया है।

संशोधन के बाद विकास प्राधिकरणों को 6000 वर्ग मीटर तक के भूखंडों में भू उपयोग परिवर्तन की स्वीकृति देने का अधिकार प्रत्यायोजित किया जाएगा। इससे ऐसे प्रस्तावों को शासन तक भेजने और वहां से स्वीकृति मिलने की लंबी प्रक्रिया से राहत मिलेगी। बड़े भूखंडों से जुड़े प्रस्तावों की प्रक्रिया पहले की तरह निर्धारित व्यवस्था के अनुसार रहेगी।

संशोधन में केवल अधिकारों का विकेंद्रीकरण ही नहीं, बल्कि भू उपयोग परिवर्तन शुल्क में कमी का भी प्रस्ताव है। सरकार ने विभिन्न श्रेणियों में शुल्क को युक्तिसंगत बनाने के साथ प्रक्रिया को सरल करने और अलग-अलग चरणों के लिए समय सीमा तय करने का प्रावधान किया है। साथ ही ब्याज दरों को भी युक्तिसंगत बनाने का प्रस्ताव है।

हर जिले में बनेंगे वाहन जांच केंद्र, मशीनों से होगी फिटनेस जांच

प्रदेश में अब वाहनों की फिटनेस जांच मशीनों से होगी। इसके लिए हर जिले में ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) बनाए जाएंगे। मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में एटीएस से जुड़ी नई राज्य नीति को मंजूरी दे दी गई। फैसले के मुताबिक नई व्यवस्था के तहत वाहनों की फिटनेस जांच ऑटोमेटेड मशीनों से होगी।

इसमें किसी कर्मचारी के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं होगी जिससे जांच में पारदर्शिता आएगी और वाहनों की फिटनेस को लेकर होने वाली गड़बड़ी पर रोक लगेगी। पूरी तरह फिट पाए जाने वाले वाहनों को ही फिटनेस प्रमाणपत्र मिलेगा। नई नीति में केंद्र सरकार के मोटर वाहन नियमों में किए गए बदलावों को भी शामिल किया गया है। इसमें एटीएस की स्थापना और संचालन से जुड़े नियम शामिल हैं। नीति को मंजूरी मिलने के बाद अब प्रदेश के सभी जिलों में एटीएस बनाने का रास्ता साफ हो गया है। इसमें निजी क्षेत्र की भी मदद ली जाएगी। सरकार के अनुसार, इसके लिए राज्य सरकार पर कोई अतिरिक्त खर्च नहीं आएगा। एटीएस शुरू होने से तकनीकी और दूसरे कामों में रोजगार के नए अवसर भी बनेंगे।

भूतपूर्व सैनिकों के लिए पॉलीक्लीनिक खोलने के लिए मिलेगी निशुल्क जमीन

भूतपूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना (ईसीएचएस) के तहत पॉलीक्लीनिक के निर्माण के लिए ग्राम पंचायतों और स्थानीय प्राधिकरणों की भूमि स्थानीय सैन्य प्राधिकरण (एलएमए) सेंट्रल कमांड को निशुल्क हस्तांतरण संबंधी प्रस्ताव को कैबिनेट ने हरी झंडी दे दी है। इसका उद्देश्य भूतपूर्व सैनिकों, पेंशन भोगियों और उनके आश्रितों को निशुल्क बेहतर इलाज की सुविधा प्रदान करना है। प्रदेश में वर्तमान में 18 लाख भूतपूर्व सैनिक हैं। इस निर्णय के माध्यम से उन्हें बेहतर इलाज की सुविधा मिलेगी। ये भूमि इटावा, जालौन, लखीमपुर खीरी, बिजनौर, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, बांदा, गाजीपुर, मिर्जापुर, देवरिया, सुल्तानपुर, आजमगढ़ और गोंडा में उपलब्ध कराई जाएगी।

प्रदेश में स्थापित होंगे 900 नए न्यायालय
कैबिनेट ने प्रदेश में 900 नए न्यायालयों की स्थापना और उनमें पदों के सृजन के लिए लाए गए प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई है। प्रस्ताव के अनुसार, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 9149 विभिन्न श्रेणी के न्यायालयों के गठन का प्रस्ताव उपलब्ध कराया है। प्रदेश के लोगों के लिए शीघ्र न्याय सुनिश्चित कराने के लिए अतिरिक्त न्यायालयों के सृजन की आवश्यकता है। पहले चरण में विभिन्न श्रेणी के 900 न्यायालयों एवं पदों के सृजन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। 

नए शहरों के विकास के लिए लखनऊ, उन्नाव और रायबरेली को मिलेंगे 380 करोड़
मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नए शहर प्रोत्साहन योजना के तहत लखनऊ, उन्नाव और रायबरेली विकास प्राधिकरण के लिए 380 करोड़ रुपये की पहली किस्त को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। इस फैसले से लखनऊ, उन्नाव और रायबरेली में प्रस्तावित नई परियोजनाओं को वित्तीय सहयोग मिलेगा। विशेष सचिव आवास राजेश कुमार राय ने बताया कि योजना के तहत भूमि अर्जन में आने वाले व्यय का 50 प्रतिशत तक राज्य सरकार द्वारा सीड कैपिटल के रूप में देने का प्रावधान है। यह धनराशि अधिकतम 20 वर्ष की अवधि के लिए है। सीड कैपिटल उपलब्ध होने से विकास प्राधिकरणों पर भूमि अर्जन का तत्काल वित्तीय दबाव कम करने में मदद मिलेगी। इससे नए शहरों की परियोजनाओं को गति मिलेगी। तीनों शहरों के लिए सीड कैपिटल की अधिकतम धनराशि 655.76 करोड़ रुपये अनुमन्य की गई है। इसके माध्यम से नए शहरों के निर्माण के लिए बुनियादी सुविधाओं का विकास होगा।

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