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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP: Wrongful recovery of ₹2,800 crore; Consumer Council files a proposal of public importance with the UP Elec

UP: 2800 करोड़ की गलत वसूली, उपभोक्ता परिषद ने UP विद्युत नियामक आयोग में दाखिल किया लोक महत्व का प्रस्ताव

Wed, 24 Jun 2026 08:55 PM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Wed, 24 Jun 2026 08:55 PM IST
सार

विद्युत उपभोक्ताओं से पिछले 14 महीनों में की गई ईंधन अधिभार वसूली को लेकर विवाद गहरा गया है। उपभोक्ता पक्ष ने गणना की विशेष जांच और पुनर्गणना की मांग की है। साथ ही अतिरिक्त वसूली गई राशि उपभोक्ताओं को लौटाने तथा भविष्य में ऐसी त्रुटियां रोकने के लिए सख्त व्यवस्था की मांग उठाई गई है।

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UP: Wrongful recovery of ₹2,800 crore; Consumer Council files a proposal of public importance with the UP Elec
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने नियामक आयोग में लोक महत्व प्रस्ताव दाखिल किया है। उन्होंने 14 माह से गलत तरीके से वसूली गई रकम उपभोक्ताओं को लौटाने की मांग की है। इसमें आयोग के एक दिन पहले के आदेश की प्रति भी लगाई गई है।

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परिषद ने उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग से अप्रैल 2025 से जून 2026 तक ईंधन और बिजली खरीद लागत समायोजन (एफपीपीसीए) गणना की विशेष जांच मांगी है। इसकी पुनर्गणना कराने को भी कहा गया है। गलत गणना से हुई वसूली का लाभ उपभोक्ताओं को मिलना चाहिए। नियामकीय ढांचे के अंतर्गत पॉवर कॉरपोरेशन की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। 
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उत्तर प्रदेश पॉवर कॉरपोरेशन ने 19 जून को आयोग के समक्ष स्वीकार किया था। उसने बताया कि जून 2026 में अपनाई गई गणना पद्धति ही पिछले 14 माह से लागू थी। आयोग ने 23 जून 2026 को अपने आदेश में स्पष्ट किया था। एफपीपीसीए गणना केवल वास्तविक विद्युत क्रय लागत और ट्रांसमिशन शुल्क पर आधारित होनी चाहिए। किसी अन्य माह की देनदारी या समायोजन इसमें शामिल नहीं हो सकता।

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गलत वसूली का आकलन

अप्रैल 2025 से जून 2026 तक अपनाई गई गणना पद्धति पर गंभीर प्रश्न उठे हैं। यह नियामकीय प्रावधानों के अनुरूप नहीं थी। इस अवधि में उपभोक्ताओं से लगभग 2801 करोड़ रुपये की वसूली की गई। उन्हें केवल 684 करोड़ रुपये का लाभ दिया गया। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, यदि आयोग के आदेश के अनुरूप पुनर्गणना की जाए तो उपभोक्ताओं के पक्ष में लगभग 2000 करोड़ रुपये या अधिक की राशि निकल सकती है।

 

परिषद की प्रमुख मांगें

परिषद ने संपूर्ण 14 माह की एफपीपीसीए गणना का विशेष ऑडिट मांगा है। वास्तविक देयता की पुनर्गणना भी इसकी मांगों में शामिल है। माहवार वसूली और समायोजन का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करने के निर्देश देने को कहा गया है। अतिरिक्त वसूली को उपभोक्ताओं के बिलों में समायोजन के माध्यम से वापस करने की मांग है। भविष्य में ऐसी त्रुटियां रोकने के लिए सख्त नियामकीय व्यवस्था भी चाही गई है।

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