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UP: यूपी के अवध में धर्मांतरण के लिये मधेशी मॉडल का प्रयोग, अयोध्या के साथ प्रदेश के इन जिलों में गहरी पैठ
Tue, 31 Dec 2024 08:12 AM IST
रोहित मिश्र
अभिषेक राज, अमर उजाला, लखनऊ
अभिषेक राज, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Tue, 31 Dec 2024 08:12 AM IST
सार
Christian missionaries: यूपी में ईसाई मिशनरियां मतांतरण कराने में सक्रिय हैं। अयोध्या के साथ लखनऊ से सटे बाराबंकी, सीतापुर, बलरामपुर, श्रावस्ती और बहराइच में इनकी जड़े गहरी हो रही हैं।
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यूपी में ईसाई मिशनरियां।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
अवध क्षेत्र में अब नेपाल का मधेशी मतांतरण मॉडल अपनाया जा रहा है। ईसाई मिशनरियों को यहां मतांतरण के साथ ही वोटिंग पैटर्न बदलने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मधेश में सफल इस रणनीति को आगामी चुनाव में यहां आजमाया जा सकता है। मिशनरियों की सक्रियता से सीतापुर, बाराबंकी, बहराइच, श्रावस्ती, सुल्तानपुर और अंबेडकरनगर भी अछूता नहीं है। बलरामपुर, श्रावस्ती व बहराइच का बुरा हाल है।
सुरक्षा एजेंसियों ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी रिपोर्ट में मिशनरियों के बदले तरीके पर सचेत किया है। लखनऊ के एक चर्चित पब्लिशिंग हाउस की गतिविधियों को संदिग्ध बताया है। एक और अहम बदलाव दर्शाया है कि यहां कोरियन पास्टरों को मतांतरण की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो बंगलुरु, पंजाब के जालंधर व केरल तक की मजबूत कड़ी बने हुए हैं। ब्राजील, अमेरिका व साउथ कोरिया से मिले फंड को खर्च किया जा रहा है। निशाने पर मतांतरण के लिए ईसाई मिशनरियों के निशाने पर गरीब, असहाय, दलित, सीमावर्ती थारू जनजाति व रायसिख समाज है। अवध क्षेत्र में सामने आए मतांतरण के मामलों में इन्हीं की सर्वाधिक भागीदारी रही है।
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सुरक्षा एजेंसियों ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी रिपोर्ट में मिशनरियों के बदले तरीके पर सचेत किया है। लखनऊ के एक चर्चित पब्लिशिंग हाउस की गतिविधियों को संदिग्ध बताया है। एक और अहम बदलाव दर्शाया है कि यहां कोरियन पास्टरों को मतांतरण की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो बंगलुरु, पंजाब के जालंधर व केरल तक की मजबूत कड़ी बने हुए हैं। ब्राजील, अमेरिका व साउथ कोरिया से मिले फंड को खर्च किया जा रहा है। निशाने पर मतांतरण के लिए ईसाई मिशनरियों के निशाने पर गरीब, असहाय, दलित, सीमावर्ती थारू जनजाति व रायसिख समाज है। अवध क्षेत्र में सामने आए मतांतरण के मामलों में इन्हीं की सर्वाधिक भागीदारी रही है।
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चंगाई का महिमामंडन
सीतापुर के अनुभव पहले हिंदू थे। दो वर्ष पहले उन्होंने ईसाई धर्म अपना लिया। उनका कहना है कि बाइबिल पढ़ने के बाद जीवन में व्यापक बदलाव आया। आर्थिक स्थिति सही हुई। स्वास्थ्य भी सही रहने लगा। इस चमत्कार ने उन्हें ईसाई बनाया। ऐसी ही कहानी अयोध्या क्षेत्र के सुरेश की भी है। ये वे ईसाई हैं, जिन्होंने हाल के वर्षों में चमत्कार से चंगाई हासिल करने के दावे के बाद धर्म परिवर्तन किया है।
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