UP: जहां छात्र ज्यादा, वहां पास के कॉलेज से पढ़ाने जाएंगे शिक्षक, जिलों में शिक्षकों का बनेगा क्लस्टर
उच्च शिक्षा निदेशक ने बताया कि हम जिलों के शिक्षकों का एक क्लस्टर बनाएंगे। इसका उद्देश्य शिक्षकों का सही ढंग से उपयोग करना है। अगर किसी जिले में या उसके पास के जिले में दो या उससे अधिक कॉलेज हैं। एक जगह छात्र कम हैं और शिक्षक ज्यादा। दूसरे जगह शिक्षक कम हैं और छात्र ज्यादा। ऐसी स्थिति में यह शिक्षक आसपास के महाविद्यालयों व जिलों में जरूरत के अनुसार जाकर वहां कक्षाएं ले सकेंगे।
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उत्तर प्रदेश के राजकीय व अनुदानित महाविद्यालयों में छात्रों की संख्या के अनुपात में पढ़ाने वाले शिक्षक भी होंगे। इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग ने शिक्षकों का जिलों में क्लस्टर बनाने की कवायद शुरू की है। इसके तहत जहां छात्र ज्यादा और शिक्षक कम हैं। वहां जरूरत के अनुसार पास के कॉलेज से शिक्षकों को भेजकर छात्रों को पढ़ाया जाएगा।
उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. बीएल शर्मा ने बताया कि हम जिलों के शिक्षकों का एक क्लस्टर बनाएंगे। इसका उद्देश्य शिक्षकों का सही ढंग से उपयोग करना है। अगर किसी जिले में या उसके पास के जिले में दो या उससे अधिक कॉलेज हैं। एक जगह छात्र कम हैं और शिक्षक ज्यादा। दूसरे जगह शिक्षक कम हैं और छात्र ज्यादा। ऐसी स्थिति में यह शिक्षक आसपास के महाविद्यालयों व जिलों में जरूरत के अनुसार जाकर वहां कक्षाएं ले सकेंगे।
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जिन महाविद्यालयों में छात्रों की संख्या बेहतर है और शिक्षकों की संख्या अपेक्षाकृत बहुत कम है। वहां पर हम जल्द ही अतिरिक्त शिक्षक तैनात करेंगे। डॉ. शर्मा ने बताया कि इसके साथ ही बेसिक व माध्यमिक विद्यालयों की तर्ज पर महाविद्यालयों में भी छात्र संख्या बढ़ाने के लिए व्यापक स्तर पर अभियान चलाया जाएगा। नए सत्र 2026-27 में छात्रों का प्रवेश बढ़ाने के लिए व्यापक कार्ययोजना बनाई जा रही है। जल्द ही इसे लागू किया जाएगा।
कॉलेजों में अब ई कंटेंट से भी होगी पढ़ाई
प्रदेश के राजकीय व अनुदानित महाविद्यालयों में शिक्षा के स्तर को और बेहतर किया जाएगा। कॉलेजों में शिक्षकों की पर्याप्त तैनाती के साथ ही कॉलेजों में ई कंटेंट का भी प्रयोग बढ़ाया जाएगा। अधिकतर कॉलेजों में स्मार्ट क्लास हैं। ऐसे में ज्यादा से ज्यादा ई कंटेंट इनको उपलब्ध कराया जाएगा। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. बीएल शर्मा ने बताया कि हमारे पास 89 हजार ई कंटेंट उपलब्ध हैं। कॉलेजों को इसके बेहतर प्रयोग के लिए प्रेरित करेंगे। छात्र खाली समय में इससे भी पढ़ाई कर सकेंगे। इसके लिए स्टूडियो में शिक्षकों के लेक्चर भी तैयार कराने की योजना है।
कॉलेजों का होगा औचक निरीक्षण
डॉ. शर्मा ने बताया कि राजकीय व अनुदानित महाविद्यालयों में बेहतर संसाधन स्मार्ट क्लास, अत्याधुनिक लैब, जिम आदि की सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां अपेक्षाकृत शुल्क भी कम होता है। ऐसे में प्रचार-प्रसार कर व शिक्षकों की संख्या बढ़ाकर हम छात्रों को आकर्षित करेंगे। कॉलेजों का औचक निरीक्षण कर वहां की व्यवस्थाएं भी सुधारने का प्रयास करेंगे।
पारंपरिक नहीं, प्रोफेशनल कोर्स ही बढ़ाएंगे छात्र संख्या: प्रदेश के उच्च शिक्षण व तकनीकी संस्थानों में छात्रों की घटती संख्या का बड़ा कारण पारंपरिक कोर्स का संचालन है। इन संस्थानों द्वारा प्रोफेशनल कोर्स के माध्यम से ही छात्रों को आकर्षित किया जा सकता है। अधिकतर राजकीय महाविद्यालयों में बीए, बीएससी, बीकॉम की ही पढ़ाई हो रही है। यह भी एक वजह है कि इस तरफ छात्र आकर्षित नहीं हो रहे हैं। पूर्व क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी आलोक श्रीवास्तव ने कहा कि आज छात्र बीबीए, बीसीए, बीटेक आदि प्रोफेशनल कोर्सों की तरफ जा रहे हैं। ताकि इसको करने के बाद उन्हें सीधे रोजगार मिल सके। हमें इन कोर्स के साथ कौशल विकास पर फोकस करना होगा।
निजी कॉलेज और विवि भी दे रहे चुनौती: प्रदेश के युवाओं को उनके पास ही बेहतर उच्च शिक्षा देने के लिए निजी क्षेत्र को बढ़ावा व सुविधाएं दी गई। किंतु तेजी से बढ़ रहे निजी कॉलेज व विश्वविद्यालय अब सरकारी संस्थानों के लिए बड़ी चुनौती पेश कर रहे हैं। प्रदेश में निजी विश्वविद्यालयों की संख्या बढ़कर 53 और कॉलेजों की संख्या 7520 से ज्यादा हो गई है। इसकी अपेक्षा सरकारी विश्वविद्यालयों की संख्या 24 और राजकीय कॉलेजों की संख्या 216 है। इसमें भी 70 राजकीय कॉलेज अभी नए शुरू हुए हैं। यही वजह है कि उनके सामने छात्रों की संख्या का बड़ा संकट है।
(अमर उजाला ने प्रदेश के राजकीय महाविद्यालयों में कहीं छात्र तो कहीं शिक्षकों की कमी से जुड़ी खबरें प्रकाशित की हैं। इसका संज्ञान लेते हुए विभाग कॉलेजों व शिक्षकों पर सख्ती शुरु करने के साथ ही नई योजना तैयार करने में जुट गया है।)