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यूपी एसटीएफ ने 'तत्काल' में सेंध लगाने वाले गिरोह का किया पर्दाफाश, दो गिरफ्तार

Tue, 08 May 2018 01:04 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 08 May 2018 01:04 AM IST
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UP STF arrested two for making tatkal tickets.
गिरफ्तार आरोपी सुरेश व राकेश। - फोटो : amar ujala

यूपी एसटीएफ ने भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) की खामियों का फायदा उठाकर सैकड़ों टिकट निकालने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए सोमवार को चारबाग रेलवे स्टेशन से दो शातिरों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार युवकों में सुरेश कुमार मौर्या प्रतापगढ़ का और राकेश कुमार गुप्ता जौनपुर का मूल निवासी है।

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एसटीएफ के एसएसपी अभिषेक सिंह ने बताया कि यह गिरोह हजार रुपये में खरीदे गए सॉफ्टवेयर के माध्यम से सेकंडों में सैकड़ों तत्काल टिकट निकाल लेते थे और फिर प्रति टिकट 500 से 2000 रुपये के मुनाफे के साथ बेच देते थे। इसकी शिकायत बराबर एसटीएफ को मिल रही थी। दो साल पहले भी इसी तरह के मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
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प्रॉक्सी आईपी से करते थे खेल
आईआरसीटीसी की वेबसाइट से एक माह में छह टिकट ही बुक कराए जा सकते हैं। तत्काल टिकटों के लिए सुबह 10 बजे एसी टिकट और 11 बजे नॉन एसी बुक किए जाते हैं, लेकिन विंडो खुलते ही सेकंडों में उपलब्ध सीटें वेटिंग में दिखने लगती हैं। इसके लिए ये लोग विशेष प्रकार के सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते थे।
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ब्लैक टीएस, रेडमिर्ची, चाइना क्लाउड, काउंटर, एचपी, स्पार्क, क्राउन, एचआईटी, पीएनआर के नाम से यह वर्चुअल बाजार में एक हजार से 1500 रुपये में उपलब्ध हैं। इस सॉफ्टवेयर के साथ प्रॉक्सी आईपी का इस्तेमाल करते हुए एक ही कंप्यूटर से सैकड़ों टिकट एक बार में बुक कराए जा रहे थे। ये टिकट छोटे ट्रेवल्स एजेंड को बेच दिए जाते थे।

आईआरसीटीसी की वेबसाइट में हैं खामियां
साइबर कॉप डॉ. त्रिवेणी सिंह ने बताया कि यह सब आईआरसीटीसी की खामियों की वजह से है। वेबसाइट पर तत्काल टिकट का फॉर्म भरने के लिए केवल 32 सेकंड का समय दिया जाता है। इसमें फॉर्म भरना मुश्किल होता है। यह समय बढ़ाकर डेढ़ मिनट करना होगा। इसके अलावा आईडी को फिल्टर कर अधिक से अधिक टिकट खरीदने वालों की स्क्रूटनी की जानी चाहिए।

एक क्लिक पर एक बार में सैकड़ों टिकट बनाए जाते थे

UP STF arrested two for making tatkal tickets.

सॉफ्टवेयर में दूरी के अनुसार पहले से ही फॉर्म भरा जाता था। आईपी रिफ्लेक्ट न हो इसके लिए अलग-अलग प्रॉक्सी आईपी का इस्तेमाल करते थे। जैसे ही ऑनलाइन तत्काल टिकट के लिए बुकिंग शुरू होती, वैसे ही एक क्लिक पर एक बार में सैकड़ों टिकट बनाए जाते थे। सॉफ्टवेयर के जरिए ही कैप्चा और ओटीपी को भी बाईपास कर टिकटों की बुकिंग की जा रही थी।

यही वजह थी कि आम आदमी टिकट से वंचित रह जाते थे। एसएसपी के अनुसार, आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वे हामिद और शमशेर से सॉफ्टवेयर खरीदते थे। एसएसपी ने बताया कि ये दोनों बड़े ही शातिराना तरीके से वीओआईपी कॉल के जरिए कस्टमर से संपर्क करते हैं। यह धंधा लघु उद्योग की तरह खूब फल-फूल रहा है।

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