बिजली कंपनियां खस्ताहाल, 41 हजार करोड़ का खर्च
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बिजली कंपनियों की खराब माली हालत सुधारने के लिए राज्य सरकार ने फिर केंद्र से मदद की गुहार लगाई है। राज्य सरकार चाहती है कि बिजली कंपनियों के वित्तीय पुनर्गठन के साथ ही बैंकों व केंद्रीय वित्तीय संस्थाओं से लिए कर्ज पर मौजूदा ब्याज दरों में कमी कर दी जाए।
मुख्य सचिव आलोक रंजन ने शासन के आला अधिकारियों के साथ शनिवार को दिल्ली में केंद्रीय बिजली राज्यमंत्री पीयूष गोयल से इस सिलसिले में मुलाकात की।
प्रदेश की बिजली कंपनियों को हर साल लगभग 10,000 करोड़ रुपये का घाटा हो रहा है। बिजली कंपनियों पर कुल मिलाकर लगभग 41,000 करोड़ रुपये का कर्ज है। हर साल होने वाले घाटे में लगभग 5400 करोड़ रुपये ब्याज का शामिल होता है।
मुख्य सचिव बोले, अभी तक नहीं हो पाया है निर्णय
सूत्रों का कहना है कि बिजली कंपनियों को 13.3 फीसदी की दर पर बैंकों और वित्तीय संस्थाओं को ब्याज का भुगतान करना पड़ रहा है।
मुख्य सचिव ने ऊर्जा विभाग और पावर कॉर्पोरेशन के आला अधिकारियों के साथ शनिवार को पीयूष गोयल से मिलकर इन मुद्दों पर चर्चा की।
बैठक में बिजली मंत्रालय की ओर से वित्तीय पुनर्गठन योजना के लिए नए सिरे से फॉर्मूला तैयार कराए जाने की बात कही गई। केंद्र की ओर से इस संबंध में वित्त मंत्रालय से भी बात करने का भरोसा दिलाया गया।
मुख्य सचिव आलोक रंजन का कहना है कि बहरहाल वित्तीय पुनर्गठन को लेकर अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है। बिजली मंत्रालय वित्त मंत्रालय से इस बाबत बात करके ही कोई फैसला करेगा। शासन ने बिजली मंत्रालय के समक्ष विस्तार से अपना पक्ष रख दिया है।