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यूपी: निजीकरण के विरोध में पूरे प्रदेश में बिजली कर्मियों का प्रदर्शन, टेंडर जारी होने पर जेल भरने की चेतावनी

Thu, 12 Feb 2026 09:05 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Thu, 12 Feb 2026 09:05 PM IST
सार

Electricity workers in UP: यूपी में बिजली के निजीकरण के खिलाफ पूरे प्रदेश के कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि टेंडर जारी हुआ तो वह जेल भरेंगे।

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UP: Power workers protest across the state against privatization, threaten to fill jails if tenders are issued
यूपी बिजली कर्मियों का धरना-प्रदर्शन। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने बृहस्पतिवार को नए बिल और निजीकरण के विरोध में प्रदर्शन किया। चेतावनी दी कि निजीकरण का टेंडर हुआ तो जेल भरो आंदोलन शुरू किया जाएगा।समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश सहित देश के सभी राज्यों में लाखों बिजली कर्मियों ने कार्य बन्द कर व्यापक विरोध प्रदर्शन किया। प्रदेश के सभी जनपदों में बिजली कर्मचारी, जूनियर इंजीनियर और इंजीनियर कार्यालयों से बाहर आकर बड़ी संख्या में प्रदर्शन में शामिल हुए।

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संघर्ष समिति ने कहा कि पावर सेक्टर में नियमित प्रकृति के कार्यों के लिए बड़े पैमाने पर आउटसोर्सिंग की जा रही है, जिससे न केवल कर्मचारियों की सुरक्षा प्रभावित हो रही है बल्कि बिजली व्यवस्था की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। प्रमुख मांगों में आउटसोर्सिंग पर रोक, नियमित पदों पर सीधी भर्ती तथा आउटसोर्स कर्मियों का नियमितीकरण शामिल है।
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राजधानी लखनऊ सहित प्रदेश के सभी जनपदों में बिजली कर्मियों के साथ हजारों किसानों ने भी संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले प्रदर्शन किया। लखनऊ स्थित शक्ति भवन पर आयोजित विशाल प्रदर्शन को संघर्ष समिति के पदाधिकारियों के साथ संयुक्त किसान मोर्चा के एकादशी यादव एवं दिनेश रावत ने संबोधित किया। अभियंता संघ के महासचिव जितेंद्र सिंह गुर्जर ने कहा कि प्रदेश के सभी जिलों में व्यापक भागीदारी के साथ हुए इस शांतिपूर्ण और अनुशासित आंदोलन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बिजली कर्मी निजीकरण के विरुद्ध और सार्वजनिक बिजली व्यवस्था की रक्षा के लिए निर्णायक संघर्ष के लिए तैयार हैं।

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उपभोक्ताओं को लौटाएं स्मार्ट प्रीपेड मीटर के नाम पर वसूले गए 6016 रुपये

 राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बृहस्पितवार को नियामक आयोग में लोक महत्व प्रस्ताव दाखिल किया। उन्होंने मांग की कि जिन उपभोक्ताओं से स्मार्ट मीटर के नाम पर 6016 रुपया वसूला गया है, उन्हें बिजली बिल में लौटाया जाए। साथ ही अविकसित कालोनियों में कनेक्शन के नियमों में संशोधन किया जाए।

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बृहस्पितवार को विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार से मुलाकात कर लोकमहत्व प्रस्ताव दाखिल किया। इसमें नए बिजली कनेक्शन पर बिना विद्युत नियामक आयोग अनुमोदन के स्मार्ट प्रीपेड मीटर के नाम पर 6016 रुपये वसूलने, कॉस्ट डाटा बुक के असमान अनुपालन तथा अविकसित कॉलोनियों में उपभोक्ताओं के साथ हो रहे आर्थिक उत्पीड़न पर आपत्ति जताई गई।

बताया कि 31 दिसंबर से पूरे प्रदेश में नई कॉस्ट डाटा बुक लागू कर दी गई, लेकिन उससे पूर्व स्मार्ट प्रीपेड मीटर के नाम पर वसूले गए 6016 रुपये का समायोजन बिजली बिल में किया जाना चाहिए। क्योंकि प्रदेशभर में कुल करीब 120 करोड़ की अतिरिक्त वसूली हुई है। इसी तरह अविकसित कॉलोनियों में 75 प्रति वर्ग मीटर की दर से लिया जा रहा शुल्क में भी बदलाव किया जाए।

विकसित कॉलोनियों में 300 मीटर तक बिना एस्टीमेट के बिजली कनेक्शन की व्यवस्था है। ऐसे में 300 मीटर तक अविकसित कॉलोनियों में भी नई समान व्यवस्था लागू की जाए। उन्होंने कहा कि जो लोग अविकसित कॉलोनियों में प्लॉट लेकर मकान बनाते हैं, उनमें अधिकांश आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से आते हैं। विकसित कॉलोनियों में प्लॉट या मकान खरीदने में असमर्थ होने के कारण वे ऐसे क्षेत्रों का चयन करते हैं। ऐसे में उन्हें राहत दिया जाए।
 
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