यूपी: बिजली वितरण हानि घटी, पांच साल में 20.63 से 13.04 फीसदी पर आई; हाई लॉस फीडरों में भी 21 फीसदी सुधार
उत्तर प्रदेश में बिजली वितरण हानि वर्ष 2020-21 के 20.63 प्रतिशत से घटकर 2025-26 में 13.04 प्रतिशत रह गई। हाई लॉस फीडरों में भी करीब 21 प्रतिशत तक सुधार हुआ। निगरानी बढ़ाने, बिजली चोरी पर कार्रवाई और फीडरवार जिम्मेदारी तय करने से राजस्व वसूली में बढ़ोतरी हुई है।
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प्रदेश में वर्ष 2020-21 में 20.63 प्रतिशत रही वितरण हानि वर्ष 2025-26 में घटकर 13.04 प्रतिशत रह गई। हाई लॉस फीडरों में 21 प्रतिशत तक घाटा कम हुआ है। प्रदेश में बिजली सुधार के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। कृषि फीडरों को छोड़कर प्रदेश में फीडरों की संख्या 18,351 से बढ़कर 21,463 हो गई है। इनमें लाभकारी फीडरों की संख्या 5,772 से बढ़कर 8,104 पहुंच गई।
इसमें 2,332 अतिरिक्त फीडर लाभकारी श्रेणी में आए हैं। लाभकारी फीडरों की हिस्सेदारी भी 31 प्रतिशत से बढ़कर 38 प्रतिशत हो गई है। डिस्कॉमवार प्रदर्शन में पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम 53 प्रतिशत लाभकारी फीडरों के साथ प्रदेश में पहले स्थान पर रहा।
केस्को 39 प्रतिशत, दक्षिणांचल और मध्यांचल 37-37 प्रतिशत तथा पूर्वांचल 22 प्रतिशत पर रहा। दक्षिणांचल में वितरण हानि 25.64 प्रतिशत से घटकर 14.78 प्रतिशत और एटीएंडसी हानि 31.03 प्रतिशत से घटकर 19.57 प्रतिशत रह गई। दक्षिणांचल में वर्ष 2025-26 में 105 करोड़ रुपये तथा चालू वित्तीय वर्ष में जुलाई तक 155 करोड़ रुपये की वसूली की गई। पावर कार्पोरेशन के अध्यक्ष डा. आशीष कुमार गोयल ने कहा कि निरंतर निगरानी की जा रही है। फीडरवार घाटे के लिए अभियंताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
निगरानी बढ़ी तो हानियों में निरंतर हो रही कमी
तालबेहट टाउन-2 ललितपुर में एटीएंडसी हानि 63 प्रतिशत से घटकर 11 प्रतिशत, मणिकापुर सीरी कासगंज में 87 से 53 प्रतिशत और राल मथुरा में 83.62 से 47.82 प्रतिशत तक आ गई। आगरा, मथुरा, चित्रकूट, राठ और कोसी के टॉप-10 हाई लॉस फीडरों का घाटा 22.53 करोड़ से घटकर 17.89 करोड़ रुपये रह गया, जो करीब 21 प्रतिशत की कमी है।