UP:पान मसाला उद्योग के सामने चुनौती, छोटे प्लास्टिक सैशे पर रोक लगाने की तैयारी; टिन या कांच में होगी बिक्री
Pan Masala Industry: पान मसाला उद्योग के सामने नई चुनौती आने जा रही है। पान मसाला या गुटखा जिन छोटे पैकेटों में बिकता है उस पर पूरी तरह से प्र
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केंद्र सरकार ने पान मसाला उद्योग की पैकेजिंग पर सख्ती बढ़ाते हुए प्लास्टिक आधारित सैशे और मेटलाइज्ड परतों पर रोक लगाने की तैयारी शुरू कर दी है। पैकेजिंग संशोधन विनियम-2026 का मसौदा जारी कर पान मसाला की पैकिंग केवल प्राकृतिक सामग्री जैसे कागज, पेपर बोर्ड और सेलूलोज में करने का प्रस्ताव रखा है। प्लास्टिक, सिंथेटिक पॉलिमर, लैमिनेटेड पैकेजिंग और एल्युमिनियम फॉयल के उपयोग पर प्रतिबंध का प्रावधान किया गया है। टिन और कांच के कंटेनर विकल्प होंगे। 30 दिन में सुझाव मांगे गए हैं। हालांकि सवाल उठ रहे हैं कि जब नमकीन, चिप्स और अन्य खाद्य उत्पाद अब भी प्लास्टिक रैपर में बिक रहे हैं तो सिर्फ पान मसाला उद्योग पर ही इतनी सख्ती क्यों की जा रही है।
केंद्र सरकार ने पान मसाला उद्योग की पैकेजिंग व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक (पैकेजिंग) संशोधन विनियम, 2026 का मसौदा जारी कर पान मसाला की पैकेजिंग में प्लास्टिक आधारित सामग्री के उपयोग पर व्यापक प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव रखा है। इस कदम को सिंगल यूज प्लास्टिक और मल्टी-लेयर पैकेजिंग कचरे पर नियंत्रण की दिशा में अहम माना जा रहा है।
28 अप्रैल 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार, यह संशोधन खाद्य सुरक्षा एवं मानक (पैकेजिंग) विनियम, 2018 में किया जाएगा। मसौदा केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति के बाद खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 23 और धारा 92 के तहत जारी किया गया है। एफएसएसएआई ने मसौदे में स्पष्ट किया है कि पान मसाला की पैकेजिंग केवल प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त सामग्री में ही की जा सकेगी। इसके तहत कागज, पेपर बोर्ड, सेलूलोज और अन्य प्राकृतिक सामग्री का उपयोग अनुमन्य होगा, लेकिन इनमें किसी भी प्रकार की प्लास्टिक सामग्री शामिल नहीं होनी चाहिए।
इन पाउच को रीसाइकिल करना होता है कठिन
प्रस्तावित नियमों में पॉलीएथिलीन (पीई), पॉलीप्रोपिलीन (पीपी), पॉलिएस्टर (पीईटी), पॉलीविनाइल क्लोराइड (पीवीसी) तथा किसी भी प्रकार के सिंथेटिक पॉलिमर, को-पॉलिमर और लैमिनेटेड सामग्री के उपयोग पर रोक लगाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा एल्युमिनियम फॉयल और मेटलाइज्ड लेयर वाली पैकेजिंग को भी प्रतिबंधित करने की तैयारी है। वर्तमान में पान मसाला उद्योग में बड़े पैमाने पर मल्टी-लेयर प्लास्टिक सैशे का उपयोग होता है, जिन्हें रीसाइकिल करना बेहद कठिन माना जाता है।
मसौदा विनियम में उद्योग को वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर टिन और कांच के कंटेनरों के उपयोग की अनुमति दी गई है। यानी कंपनियों को अब प्लास्टिक सैशे की जगह पर्यावरण अनुकूल और पुनर्चक्रण योग्य पैकेजिंग अपनानी पड़ सकती है। इससे उत्पादन लागत और पैकेजिंग ढांचे में बड़े बदलाव की संभावना भी जताई जा रही है।
एफएसएसएआई ने इस संशोधन में प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के प्रावधानों को भी शामिल किया है। नियम 4(1)(f) के अनुसार प्लास्टिक सामग्री से बने सैशे का उपयोग गुटखा, तंबाकू और पान मसाला के भंडारण, पैकिंग और बिक्री के लिए नहीं किया जा सकेगा। वहीं नियम में विनाइल एसीटेट-मेलिक एसिड-विनाइल क्लोराइड को-पॉलिमर सहित किसी भी प्रकार की प्लास्टिक सामग्री के उपयोग पर रोक का प्रावधान किया गया है।
अधिसूचना में कहा गया है कि मसौदा नियमों पर 30 दिनों के भीतर आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं। तय समय सीमा में प्राप्त सुझावों पर विचार करने के बाद अंतिम अधिसूचना जारी की जाएगी। यह कदम सिंगल यूज प्लास्टिक और मल्टी-लेयर पैकेजिंग कचरे को कम करने में मददगार साबित हो सकता है। हालांकि उद्योग जगत में इस बात को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं कि जब नमकीन, चिप्स, बिस्किट और अन्य खाद्य उत्पाद अब भी बड़े पैमाने पर मल्टी-लेयर प्लास्टिक रैपर में बेचे जा रहे हैं, तब केवल पान मसाला उद्योग पर इतनी कड़ी पाबंदियां लगाने के पीछे क्या तर्क है। कई विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पर्यावरण संरक्षण उद्देश्य है तो सभी खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग के लिए समान नीति लागू की जानी चाहिए।