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यूपी: एक ब्रांड, एक दवा...एमआरपी अलग, अस्पतालों की फार्मेसी में एक ही दवा की एमआरपी में 27390 तक का अंतर

Thu, 08 Oct 2026 08:43 AM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Thu, 08 Oct 2026 08:43 AM IST
सार

एफएसडीए की पड़ताल : अलग-अलग अस्पतालों की फार्मेसी में एक ही दवा के एफआरपी में 27390 रुपये तक का अंतर पाया गया। पड़ताल के लिए 214 अस्पतालों की फार्मेसी से आंकड़े जुटाए गए जिसमें 167 दवाओं की कीमतों में अंतर मिला।
 

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UP: One brand, one medicine... different MRPs.
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : ANI

विस्तार

एक ही कंपनी, एक ही ब्रांड और एक ही दवा...लेकिन अलग-अलग अस्पतालों को संस्थागत आपूर्ति में एमआरपी अलग-अलग। उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की पड़ताल में 214 अस्पतालों की फार्मेसियों से जुटाए आंकड़ों के अध्ययन में 167 दवाओं की एमआरपी में अंतर मिला है। विभाग ने केंद्र और एनपीपीए से दवा कीमतों में पारदर्शिता के लिए कदम उठाने को कहा है।

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गंभीर रोगों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली महंगी दवाओं की एमआरपी में भी अंतर पाया गया है। सबसे ज्यादा अंतर फाइजर की इनोटुजुमैब ओजोगामाइसिन 1 एमजी (इनोंजा) में मिला। इसकी एमआरपी अलग-अलग संस्थागत आपूर्ति में 302610 और 330000 रुपये दर्ज हुई यानी 27390 रुपये तक का अंतर मिला है।
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रिलायंस लाइफसाइंसेज की टेनक्टे-प्लेज 40 एमजी (टेनक्टेरेल) की एमआरपी 43119 से 49060 रुपये तक मिली यानी अंतर 5940 रुपये पाया गया। इसी कंपनी की ह्यूमन एल्बुमिन 20 प्रतिशत (एल्बुराल) की एमआरपी 7986, 9749 और 10724 रुपये मिली यानी 2738 रुपये तक का अंतर मिला। एफएसडीए ने कहा कि अलग-अलग एमआरपी के कारणों की पड़ताल की जा रही है।
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बेहद जरूरी दवाओं में भी फर्क: दुर्घटना या भारी रक्तस्राव के कारण शरीर में कम हुए ब्लड वॉल्यूम की पूर्ति करने, लिवर फेलियर या सिरोसिस के इलाज में इस्तेमाल होने वाली इंटास की एल्बुसेल की एमआरपी 7986 व 10989 रुपये और बेनेटास में 56991 व 62690 रुपये मिली।

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67 दवाओं की एमआरपी अलग, एफएसडी ने केंद्र सरकार व एनपीपीए से साझा की सूची

सरकारी मेडिकल कॉलेजों और निजी अस्पतालों की फार्मेसियों में एक ही कंपनी और ब्रांड की दवाओं की संस्थागत आपूर्ति अलग एमआरपी पर होने का मामला खुलने पर एफएसडीए ने पड़ताल शुरू कर दी है। 214 अस्पतालों की फार्मेसियों से जुटाए आंकड़ों के अध्ययन में 167 दवाओं की एमआरपी में अंतर मिला है।

एफएसडीए ने केंद्र सरकार और राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) से इसकी सूची साझा की है। पड़ताल में सबसे ज्यादा 27390 रुपये का अंतर फाइजर की इनोंजा में मिला। इंटास की एल्बुसेल में 7986 व 10989 रुपये और बेनेटास में 56991 व 62690 रुपये की एमआरपी मिली।

न्यूकाइन की एमआरपी 591 और 1247 रुपये मिली। कोलिस्टिमेथेट 4.5 एमआईयू में 8018.44 से 9702.31 रुपये, पॉलीमॉक्सिन बी में करीब 3811 से 4980.94 रुपये और ट्रेजाम में 1874.06 और 1999 रुपये की एमआरपी मिली। टर्लिप्रेसिन इंजेक्शन की एमआरपी 2600 और 3050 रुपये दर्ज हुई। इसके अलावा मेनैक्ट्रा वैक्सीन में 250 रुपये, एंटी-डी 300 एमसीजी में 297 रुपये, 14-वैलेंट न्यूमोकोकल वैक्सीन में 335 रुपये और ऑक्ट्रीओटाइड 100 एमसीजी में 73.33 रुपये का अंतर मिला।

सालाना 10% तक संशोधन की गुंजाइश
एफएसडीए के मुताबिक दवाओं की कीमतों में सालाना अधिकतम 10 फीसदी तक संशोधन की गुंजाइश है। इसके बाद भी एक ही उत्पाद की संस्थागत आपूर्ति में अलग-अलग एमआरपी से कीमत निर्धारण की प्रक्रिया पर ही सवाल उठ रहे हैं। विभाग देख रहा है कि क्या अलग-अलग एमआरपी फार्मा कंपनियों और स्वास्थ्य संस्थानों के बीच तय व्यावसायिक शर्तों के कारण हैं।

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