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UP: उत्तर प्रदेश में निवेश मित्र 3.0 लॉन्च, उद्योग मंजूरी अब रीयल-टाइम डिजिटल मॉनिटरिंग के साथ; जानें नए अपडेट

Sat, 25 Jul 2026 10:09 AM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Sat, 25 Jul 2026 10:09 AM IST
सार

उत्तर प्रदेश सरकार ने उद्योगों की मंजूरी प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और डिजिटल बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू की है। अब निवेश प्रस्ताव से उत्पादन शुरू होने तक हर चरण की रीयल-टाइम निगरानी होगी। इससे विभागीय देरी, लंबित आवेदन, अनावश्यक आपत्तियों की पहचान आसान होगी और जवाबदेही के साथ उद्योगों को समय पर मंजूरी मिलेगी।

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UP: 'Nivesh Mitra 3.0' launched in Uttar Pradesh; industrial approvals now feature real-time digital monitorin
सीएम योगी। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

उत्तर प्रदेश सरकार कारोबार सुगमता बढ़ाने के लिए उद्योगों की मंजूरी प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बना रही है। डीरेगुलेशन-2.0 के तहत सिंगल विंडो सिस्टम में प्रस्तावित सुधारों के अंतर्गत निवेश मित्र 3.0 में आवेदन से लेकर उद्योग में व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने तक की पूरी प्रक्रिया का रीयल टाइम मॉनिटरिंग तंत्र लागू कर दिया गया है। इसके माध्यम से निवेशकों की फाइल की पूरी यात्रा ऑनलाइन दर्ज होगी, जिससे लंबित मामलों, अनावश्यक आपत्तियों और विभागीय देरी की तत्काल पहचान संभव होगी।

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डीरेगुलेशन-2.0 के तहत केंद्र सरकार ने राज्यों को सिंगल विंडो सिस्टम में एंड-टू-एंड टर्नअराउंड टाइम (टीएटी) की निगरानी, लंबित आवेदनों का विश्लेषण और अनावश्यक विलंब दूर करने की व्यवस्था लागू करने की सिफारिश की थी। उत्तर प्रदेश ने इस दिशा में पहल करते हुए निवेश मित्र 3.0 में यह सुविधा शुरू कर दी है। 
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नई व्यवस्था के तहत निवेशक की यात्रा इंटेंट फाइलिंग यानी निवेश प्रस्ताव दर्ज करने से शुरू होकर व्यावसायिक उत्पादन तक डिजिटल रूप से दर्ज होगी। प्रत्येक विभाग में आवेदन कितने समय तक लंबित रहा, किस स्तर पर आपत्ति लगी, कितनी बार अतिरिक्त जानकारी मांगी गई और स्वीकृति में कहां देरी हुई, इसका पूरा विवरण स्मार्ट डैशबोर्ड पर उपलब्ध रहेगा।

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सिंगापुर के गोबिजनेस मॉडल से प्रेरित व्यवस्था

सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से केवल आवेदन निस्तारण की गति ही नहीं बढ़ेगी, बल्कि यह भी स्पष्ट होगा कि किस विभाग या किस प्रकार की अनुमति में सर्वाधिक समय लग रहा है। बार-बार उठने वाली आपत्तियों और अस्वीकृति के कारणों का विश्लेषण कर संबंधित प्रक्रियाओं को और सरल बनाया जाएगा। निर्धारित समय से अधिक लंबित रहने वाले आवेदनों की तत्काल पहचान होने से अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी। इससे निवेशकों को विभिन्न विभागों के चक्कर भी कम लगाने पड़ेंगे।

प्रदेश सरकार ने इस सुधार के लिए सिंगापुर के गोबिजनेस मॉडल को सर्वोत्तम उदाहरण माना है। वहां व्यवसाय पंजीकरण और लाइसेंस संबंधी सभी सेवाएं एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म से संचालित होती हैं। औसत निस्तारण समय सार्वजनिक किया जाता है और उपयोगकर्ताओं की शिकायतों व प्रश्नों का विश्लेषण कर प्रक्रियाओं में लगातार सुधार किया जाता है। 

इसी मॉडल से प्रेरित होकर निवेश मित्र 3.0 को केवल ऑनलाइन आवेदन पोर्टल नहीं, बल्कि एक इंटेलिजेंट मॉनिटरिंग सिस्टम के रूप में विकसित किया गया है। अधिकारियों के अनुसार स्मार्ट डैशबोर्ड के माध्यम से शासन स्तर पर भी नियमित समीक्षा संभव होगी, जिससे उद्योगों को मंजूरी देने की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, समयबद्ध और जवाबदेह बनेगी। वहीं, निवेश प्रस्तावों को शीघ्र स्वीकृति मिलने से उद्योग तेजी से उत्पादन शुरू कर सकेंगे।

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