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UP: नक्सली नेताओं को ड्रोन देने वाले मथुरा के युवक को एनआईए ने किया गिरफ्तार, कई इलेक्ट्रानिक डिवाइस बरामद
Sun, 22 Jun 2025 07:46 PM IST
ishwar ashish
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Sun, 22 Jun 2025 07:46 PM IST
सार
एटीएस के केस की जांच को टेकओवर करने के बाद एनआईए को दूसरी बड़ी सफलता मिली है। एनआईए की जांच में सामने आया कि मथुरा निवासी विशाल सिंह ने नक्सली नेताओं को ड्रोन मुहैया कराया था।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
एनआईए ने प्रतिबंधित नक्सली संगठन सीपीआई (माओवादी) के उत्तरी क्षेत्रीय ब्यूरो को पुनर्गठित करने के प्रयास करने की साजिश के तहत ड्रोन मुहैया कराने वाले एक और अहम आरोपी को दक्षिणी दिल्ली से गिरफ्तार किया है। एनआईए की जांच में सामने आया कि मथुरा निवासी विशाल सिंह ने नक्सली नेताओं को ड्रोन मुहैया कराया था, जिसके बाद उसके ठिकानों पर छापा मारने के बाद गिरफ्तार कर लिया गया। उसके पास से मोबाइल फोन समेत तमाम इलेक्ट्रानिक डिवाइस और आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई है।
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बता दें कि यूपी एटीएस ने अगस्त 2023 में बलिया से तारा देवी, लल्लू राम, सत्य प्रकाश, राममूरत और विनोद साहनी समेत 5 नक्सलियों को गिरफ्तार किया था। बाद में इस मामले की जांच एनआईए के सुपुर्द कर दी गई थी। एनआईए ने गहनता से जांच के बाद अगस्त 2024 में हरियाणा से अमन सिंघल को गिरफ्तार किया था, जो हरियाणा और पंजाब राज्य आयोजन समिति (एसओसी) का प्रभारी था। उससे मिले सुरागों के बाद मथुरा निवासी विशाल सिंह को भी गिरफ्तार करने में सफलता मिली है।
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एनआईए के मुताबिक विशाल सिंह ने बिहार के छकरबंदा/पंचरुखिया वन क्षेत्र में प्रतिबंधित आतंकी संगठन के नेताओं को अपनी हिंसक राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के लिए ड्रोन दिया था। साथ ही, सीपीआई (माओवादी) के अन्य कैडरों को तकनीकी प्रशिक्षण दिया था और 2019 में बिहार के घने जंगल वाले इलाकों में इसके केंद्रीय समिति के सदस्यों के साथ बैठकों में भी भाग लिया था।
बता दें कि जांच में सामने आया था कि नक्सलियों का यह माड्यूल उत्तरी क्षेत्रीय ब्यूरो (एनआरबी) क्षेत्र में अपने कमजोर पड़ते प्रभाव को फिर से बढ़ाने की साजिश कर रहा था, जिसमें यूपी, उत्तराखंड, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश शामिल हैं। इसके तहत कुछ ओवर ग्राउंड वर्कर्स (ओजीडब्ल्यू) के साथ शहरी क्षेत्रों में काम कर रहे भूमिगत कैडरों के माध्यम से कैडरों की भर्ती और क्षेत्र में संगठन को मजबूत किय जा रहा था। भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने के उद्देश्य से कई फ्रंट संगठनों और छात्र विंग का भी इस्तेमाल किया गया। वे संगठन के पूर्वी क्षेत्रीय ब्यूरो (ईआरबी) से विशेषकर से झारखंड से धन प्राप्त कर रहे थे। एनआईए इस मामले में आगे जांच कर रहा है।
पूर्वांचल के जिलों में थे सक्रिय
बता दें कि एटीएस की जांच में सामने आया था कि सीपीआई (माओवादी) नक्सली संगठन की केंद्रीय कमेटी के प्रमुख नेता संदीप यादव उर्फ रूपेश उर्फ बड़का भैया की मृत्यु के बाद प्रमोद मिश्रा उर्फ बुढऊ उर्फ बन बिहारी उर्फ डाॅक्टर साहब द्वारा पूर्वांचल में एडहॉक कमेटी बनाई गई। संगठन के सचिव बलिया निवासी संतोष वर्मा उर्फ मंतोष के जरिए लगातार संगठन के विस्तार के लिए पूर्वांचल के अलग-अलग जिलों में मूवमेंट करते हुए महिला और पुरुषों की भर्ती की जा रही थी। साथ ही, पूर्वांचल में किसी सरकार विरोधी आंदोलन को चुनकर उसको सशस्त्र आंदोलन में बदलने की साजिश रची जा रही थी। उनके द्वारा कुछ लोगों को जंगल में नक्सली प्रशिक्षण भी दिया जा रहा था।