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UP News : ई- नैम पोर्टल पर सभी राज्यों के कारोबारी खरीद सकेंगे यूपी का आलू

Sun, 12 Mar 2023 09:32 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Sun, 12 Mar 2023 09:32 PM IST
सार

उद्यान एवं कृषि निर्यात राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि सरकार आलू किसानों के साथ खड़ी हैं। उन्हें नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। इसके लिए जहां सोमवार से सात जिलों में आलू की खरीद शुरू की जा रही है तो वहीं दूसरे प्रदेश और देशों में भी आलू भेजा जा रहा है।

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UP News: Traders of all states will be able to buy potatoes from UP on e-NAM portal
आलू - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ई - नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट (ई-नैम) के तहत ई नीलामी में अब यूपी का आलू दूसरे राज्यों के लाइसेंसधारी कारोबारी भी खरीद सकेंगे। इसके लिए उप्र सरकार ने ई-नैम के राज्य कोआर्डिनेटर से अनुरोध किया था जिसकी स्वीकृति मिल गई है।

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आलू की स्थिति सुधारने में लगी प्रदेश सरकार को अच्छी सफलता मिली है। मंडी परिषद निदेशक अंजनी कुमार सिंह ने बताया कि नियमानुसार ई-नैम पर केवल अपने ही राज्य के कारोबारी बोली लगा सकते थे। इसके लिए हमने अनुरोध किया तो यह स्वीकृति मिल गई कि दूसरे राज्य के कारोबारी भी इस पर यूपी के आलू की बोली लगा सकते हैं। 
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शर्त यह रहेगी कि वह अपने-अपने राज्य से लाइसेंसप्राप्त हों। इसके लिए अब दूसरे राज्यों के कारोबारी आगे आ रहे हैं। फिलहाल केवल आलू पर यह व्यवस्था हुई है। धान, गेहूं, चावल आदि के लिए इसके प्रयास किए जा रहे हैं। रविवार को मंडी निदेशक, कन्नौज, फर्रुखाबाद समेत कई जिलों में पहुंचे और ई नैम पर नीलामी की व्यवस्था कराई। आलू की बिक्री के लिए सरकार ने फर्रुखाबाद, कन्नौज, इटावा, औरेया, बाराबंकी आदि में ई नीलामी शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
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यह है ई- नैम
ई नैम पोर्टल भारत सरकार ने विकसित किया है। यह ऐसी व्यवस्था है जिस पर ऑनलाइन कृषि उत्पाद की नीलामी होती है। किसान अपने उत्पाद को मंडी में ले जाता है। उसकी फसल का फोटो खींचकर, ग्रेडिंग कर, किसान के मांगे गए न्यूनतम मूल्य के साथ पूरा विवरण मंडी परिषद ई नैम पोर्टल पर डालती है। ऑनलाइन ही नीलामी होती है जिसमें दूसरे कारोबारी बोली लगाते हैं। जिसकी बोली सबसे ज्यादा होती है उसी के पक्ष में नीलामी छोड़ दी जाती है। खरीदार पूरे माल का भुगतान ऑनलाइन ही सीधा किसान के खाते में करता है। खरीदे गए उत्पाद को अपने यहां मंगाने की व्यवस्था खरीदार की होती है।

दिनेश प्रताप सिंह ने कहा, दुबई की टीम आगरा आकर करेगी आलू के सौदे

उद्यान एवं कृषि निर्यात राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि सरकार आलू किसानों के साथ खड़ी हैं। उन्हें नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। इसके लिए जहां सोमवार से सात जिलों में आलू की खरीद शुरू की जा रही है तो वहीं दूसरे प्रदेश और देशों में भी आलू भेजा जा रहा है। दुबई की एक टीम आगरा में आ रही है जो यहां आलू के सौदे करेगी। इसमें लुलु ग्रुप भी शामिल रहेगा। रविवार को मंत्री आलू संकट पर मीडिया कर्मियों से बात कर रहे थे।

अपने आवास पर मंत्री ने कहा कि किसानों से बात करने पर पता चला कि कुछ प्रमुख आलू व्यापारी, आढ़ती एवं शीतगृह स्वामी मिलकर आलू की खरीद कम दामों पर कर रहे हैं। वह किसानों के आलू को भंडारित कराने में अवरोध डालने का प्रयास कर रहे हैं। उनका इरादा सस्ती दर पर आलू खरीदकर बाद में महंगा बेचना है पर ऐसा नहीं होने दिया जाएगा।

अभी तक उप्र के शीतगृहों में 45.80 प्रतिशत यानी 74 लाख मीट्रिक टन आलू की भंडारण क्षमता शेष है। सोमवार से फर्रुखाबाद, कौशांबी, उन्नाव, मैनपुरी, एटा, कासगंज तथा बरेली में केंद्रों पर आलू की खरीद की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर अन्य जनपदों में भी खरीद होगी। फिलहाल सरकार 10 लाख मीट्रिक टन आलू खरीदेगी।

यह एमएसपी नहीं, लागत है
मंत्री ने कहा कि कुछ विपक्षी कह रहे हैं कि आलू का दाम दो हजार रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए। बीज के हिसाब से दाम दें। शिमला मिर्च का बीज तो एक लाख रुपये प्रति किलो होता है। तो उसका क्या इतना दाम दिया जा सकता है। वे लोग ऐसा कह रहे हैं जिनक सरकार में आलू सड़कों पर फेंका जाता था। हम ऐसा नहीं होने देंगे। दरअसल 650 रुपये प्रति क्विंटल की दर किसानों को उनकी लागत दी जा रही है ताकि उनका नुकसान न हो। केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान ने यह रकम तय की है। यह न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं एमएसपी यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं है। यह बाजार हस्तक्षेप योजना है।

सौ रुपये प्रति क्विंटल का अनुदान, ऑपरेशन ग्रीन शुरू
मंत्री ने बताया कि यदि अपने जिले में कोल्ड स्टोर में जगह न होने पर किसान को दूसरे जनपद में अपना आलू कोल्ड स्टोर में ले जाना पड़ता है तो सरकार उन्हें 100 रुपये प्रति क्विंटल सहायता राशि देगी। साथ ही ‘आपरेशन ग्रीन योजना’ में आलू के भंडारण एवं विपणन के लिए किसानों, एफपीओ, खाद्य प्रसंस्करणकर्ता, लाइसेंसशुदा कमीशन एजेंट, फुटकर व्यवसायी, सहकारी समितियां, विपणन संघ एवं निर्यातकों को 50 प्रतिशत तक ट्रांसपोर्ट पर अनुदान दिया जाएगा।

इसमें आलू क्लस्टर के 17 जनपद प्रयागराज, बाराबंकी, जौनपुर, फिरोजाबाद, फर्रुखाबाद, मथुरा, कन्नौज, अलीगढ़, मैनपुरी, आगरा, हाथरस, कानपुर नगर, शाहजहांपुर, हरदोई, बदायूं, इटावा, संभल को शामिल किया गया है। इस मौके पर निदेशक उद्यान आरके तोमर, एमडीए हाफेड अंजनीकुमार श्रीवास्तव आदि मौजूद थे।

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