{"_id":"64be88064f48d88dd80120c5","slug":"up-news-st-status-of-rajbhars-will-depend-on-their-relationship-with-gond-2023-07-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"UP News : गोंड से रोटी-बेटी के रिश्ते पर निर्भर करेगा राजभरों को एसटी का दर्जा, राज्य सरकार ने कराया सर्वे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
UP News : गोंड से रोटी-बेटी के रिश्ते पर निर्भर करेगा राजभरों को एसटी का दर्जा, राज्य सरकार ने कराया सर्वे
Tue, 25 Jul 2023 12:13 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Tue, 25 Jul 2023 12:13 AM IST
सार
यूपी में भर और राजभर को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा गोंड जनजाति से उनके रोटी-बेटी के रिश्ते पर निर्भर करेगा। इसके लिए राज्य सरकार ने उन 17 जिलों में सर्वे कराया है, जहां गोंड को जनजाति का दर्जा प्राप्त है।
विज्ञापन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
यूपी में भर और राजभर को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा गोंड जनजाति से उनके रोटी-बेटी के रिश्ते पर निर्भर करेगा। इसके लिए राज्य सरकार ने उन 17 जिलों में सर्वे कराया है, जहां गोंड को जनजाति का दर्जा प्राप्त है। डाटा विश्लेषण के बाद यह रिपोर्ट केंद्र को भेजी जाएगी। इसके साथ ही भर और राजभर जातियों को एसटी में शामिल होने के लिए पांच निर्धारित मानकों पर भी खरा उतरना होगा।
विज्ञापन
अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल भर और राजभर समेत 18 जातियों को अनुसूचित जाति का दर्जा दिए जाने का प्रस्ताव दो बार भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय (ओआरजीआई) से खारिज हो चुका है। अब भर और राजभर से जुड़ी संस्था ने ओआरजीआई में पुनः आवेदन देकर उन्हें एसटी का दर्जा दिए जाने की मांग की है।
विज्ञापन
इनका कहना है कि तीन राज्यों महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में भर को एसटी का दर्जा प्राप्त है। भर, राजभर और गोंड एक ही हैं। जब गोंड को यूपी के 17 जिलों में एसटी का दर्जा प्राप्त है तो भर और राजभर को यह हक क्यों नहीं दिया जा रहा है। संबंधित याचिका पर हाईकोर्ट भी दो माह में निर्णय लेने का आदेश दे चुका है। इसे देखते हुए सरकारी मशीनरी भी सक्रिय हो गई है।
विज्ञापन
ब्रिटिश इंडिया में भर को क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट में शामिल जातियों के अंतर्गत रखा गया था। बाद में इन्हें विमुक्त जाति के रूप में परिभाषित किया गया और उत्तर प्रदेश में ओबीसी श्रेणी दी गई। राजभर विमुक्त जाति में शामिल नहीं है, पर यह जाति भी यहां ओबीसी में ही शामिल है। पारंपरिक रूप से भर और राजभर को एक ही माना जाता है और दोनों के बीच रोटी-बेटी के भी संबंध हैं।
इन जिलों में गोंड को एसटी का दर्जा
उत्तर प्रदेश में गोंड जाति को महराजगंज, सिद्धार्थनगर, बस्ती, गोरखपुर, देवरिया, मऊ, आजमगढ़, जौनपुर, बलिया, गाजीपुर, वाराणसी, मिर्जापुर, सोनभद्र, संत कबीरनगर, कुशीनगर, चंदौली और भदोही में एसटी का दर्जा मिला हुआ है। इसलिए ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट के जरिये इन 17 जिलों में गोंड और भर व राजभर के बीच रोटी-बेटी के रिश्तों की जानकारी के लिए सर्वे कराया जा चुका है। दोनों समुदायों के लोगों से बातचीत भी की जा चुकी है।
विश्लेषण के नतीजे और राजनीतिक परिस्थितियां निभाएंगी अहम रोल
समाज कल्याण विभाग के सूत्रों का कहना है कि 17 जिलों से इकट्ठा किए गए डाटा का विश्लेषण किया जा रहा है। इस विश्लेषण को आधार बनाते हुए मौजूदा राजनीतिक परिस्तिथियों को देखते हुए राज्य सरकार की ओर से ओआरजीआई को सिफारिश भेजी जाएगी। यहां बता दें इस मामले में अंतिम निर्णय लेने का अधिकार संसद को ही है।
एसटी के लिए ये हैं मानक
किसी भी जाति को अनुसूचित जनजाति में तभी शामिल किया जा सकता है, जब वह पांच मानक पूरे करती हो। ये मानक हैं-उसकी प्रवृत्ति आदिम हो। विशिष्ट संस्कृति हो। शेष दुनिया से कटे हुए स्थानों पर उसका वास हो। मुख्य धारा में शामिल लोगों से घुलने-मिलने में संकोच हो और समाज में स्पष्ट तौर पर पिछड़ापन दिखता हो। राज्य सरकार की सिफारिश के बाद ओआरजीआई इन पांच मानकों के आधार पर भी प्रस्ताव का आकलन करती है।