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आजादी की उम्मीद : अभिलेख के अभाव में 46 साल से नहीं हो पा रही कैदी की रिहाई, सरकार से जवाब तलब
Sat, 06 Aug 2022 04:13 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 06 Aug 2022 04:13 AM IST
सार
UP News : बरेली जेल में हत्या के मामले में निरुद्ध है 81 वर्षीय केशव प्रसाद। सीतापुर जिला अदालत ने 1976 में सुनाई थी आजीवन कारावास की सजा। अब यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में पहुंचा है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है।
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केंद्रीय कारागार बरेली
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अभिलेख न मिलने के कारण सीतापुर के हत्या के एक मामले में 46 साल से जेल में बंद 81 वर्षीय केशव प्रसाद की रिहाई पर विचार नहीं हो पा रहा है। अब यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में पहुंचा है। मामले में संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को याची के समय पूर्व रिहाई पर विचार करने का आदेश देते हुए जवाब तलब किया है। न्यायमूर्ति राजन रॉय व न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव की खंडपीठ ने यह आदेश केशव प्रसाद की याचिका पर दिया है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 22 अगस्त की तारीख तय की है।
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वर्तमान में केशव प्रसाद बरेली जेल में निरुद्ध है। केशव सीतापुर के कोतवाली थाना क्षेत्र में वर्ष 1974 में हुए हत्या के एक मामले में आरोपी था। जिला अदालत ने 18 दिसंबर 1976 को उसे दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। याची ने इस आदेश को हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में चुनौती दी। पर 2 सितंबर 1988 को हाईकोर्ट ने उसकी अपील खारिज कर दी और आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा। याची के अधिवक्ता ने कोर्ट के समक्ष कहा कि दोषसिद्धि की तिथि से ही याची जेल में है।
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मामले की पिछली सुनवाई पर कोर्ट द्वारा हस्तक्षेप किए जाने के बाद यह तथ्य सामने आया कि 22 जनवरी 2001 को याची को सीतापुर जेल से बरेली जेल शिफ्ट कर दिया गया था। बरेली जेल प्रशासन का कहना है कि जेल में हुए एक अग्निकांड में तमाम अभिलेखों के साथ याची के भी अभिलेख नष्ट हो गए। उधर, हाईकोर्ट में भी याची से संबंधित पत्रावलियों का कोई पता नहीं चल सका है। जबकि याची की समय पूर्व रिहाई के लिए भेजा गया आवेदन भी कारागार मुख्यालय जिला अदालत द्वारा 18 दिसंबर को दिए गए निर्णय की प्रति के अभाव में वापस भेज चुका है।
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