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UP News : होम्योपैथिक संस्थानों ने छात्रवृत्ति में किया 47.64 करोड़ का गबन, शिक्षण संस्थानों से होगी वसूली

Wed, 13 Jul 2022 11:45 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अजीत बिसारिया, अमर उजाला, लखनऊ
अजीत बिसारिया, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Wed, 13 Jul 2022 11:45 AM IST
सार

जिन संस्थानों को पाठ्यक्रम चलाने की अनुमति भी नहीं थी, उनके कथित विद्यार्थियों को भी भुगतान कर दिया गया। ये संस्थान होम्योपैथी में डिप्लोमा कोर्स संचालित करते हैं। मामले की जांच के लिए संयुक्त निदेशक आरके सिंह, सहायक निदेशक सिद्धार्थ मिश्रा और सीनियर ऑडिटर नीरज की कमेटी बनाई गई थी।

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UP News: Homeopathic institutions embezzled 47.64 crores in scholarship, recovery will be done from educational institutions
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

होम्योपैथिक बोर्ड के संस्थानों ने छात्रवृत्ति और शुल्क भरपाई में 47.64 करोड़ रुपये का गबन कर डाला। इसमें बोर्ड के अधिकारियों और संस्थान के प्रबंधन की भी मिलीभगत सामने आई है। जिन संस्थानों को पाठ्यक्रम चलाने की अनुमति भी नहीं थी, उनके कथित विद्यार्थियों को भी भुगतान कर दिया गया। ये संस्थान होम्योपैथी में डिप्लोमा कोर्स संचालित करते हैं। उच्चस्तर पर शिकायत के बाद इस मामले में वसूली के साथ डाटा लॉक करने वाले दोषी अधिकारियों और संस्थानों के प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का फैसला किया गया है। 

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मामले की जांच के लिए संयुक्त निदेशक आरके सिंह, सहायक निदेशक सिद्धार्थ मिश्रा और सीनियर ऑडिटर नीरज की कमेटी बनाई गई थी। कमेटी ने मंगलवार को अपनी रिपोर्ट समाज कल्याण निदेशक को सौंप दी। इस मामले में संस्थानों के खिलाफ एफआईआर के साथ ही मान्यता समाप्त करवाने की कार्यवाही भी प्रारंभ होगी।
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नियमों के खिलाफ कर दिया भुगतान
- रिपोर्ट के अनुसार, संबद्धता विहीन यानी बिना मान्यता वाले 38 संस्थानों के 531 विद्यार्थियों को 1.67 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। जबकि इन्हें भुगतान किया ही नहीं जा सकता था।
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- वर्ष 2020-21 में बिना पंजीकरण संख्या (इनरोलमेंट) वाले अनुसूचित जाति व सामान्य वर्ग के 6487 विद्यार्थियों के लिए 27.94 करोड़ का भुगतान किया गया। प्रावधान है कि बिना इनरोलमेंट के भुगतान नहीं किया जा सकता है। 
- वर्ष 2021-22 में बिना इनरोलमेंट वाले 6425 छात्रों के लिए 12.57 करोड़ का भुगतान दिखाकर गबन किया गया। उससे पहले वित्त वर्ष 2019-20 में बिना इनरोलमेंट वाले 1018 छात्रों को भुगतान दिखाकर 4.48 करोड़ का गबन किया गया। 

- यहां तक कि परीक्षा में शामिल न होने वाले 209 छात्रों को भी 9.78 करोड़ का भुगतान किया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस तरह से 47 करोड़ 63 हजार 98 हजार रुपये का गबन हुआ है।

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