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यूपी: मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने वक्फ कानून को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती, कानून को बताया संविधान विरोधी

Mon, 07 Apr 2025 10:39 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Mon, 07 Apr 2025 10:39 PM IST
सार

Muslim Personal Law Board: मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने हाल ही में संसद से पास होकर कानून बने वक्फ कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। 

 

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UP: Muslim Personal Law Board challenges Waqf Act in Supreme Court, calls the law anti-constitutional
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने दाखिल की याचिका। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर संसद में हाल ही में पारित वक्फ अधिनियम को चुनौती दी है। बोर्ड के प्रवक्ता डॉ. कासिम रसूल इलियास ने बताया कि याचिका में संसद की ओर से पारित संशोधनों पर कड़ी आपत्ति जताई गई है और उन्हें मनमाना, भेदभावपूर्ण बताया। 

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बोर्ड ने जोर देकर कहा कि संशोधन न केवल भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत मील मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं, बल्कि वक्फ के प्रशासन पर पूर्ण नियंत्रण रखने की सरकार की मंशा को भी प्रकट करते हैं, ताकि मुस्लिम अल्पसंख्यकों को अपने धार्मिक बंदोबस्त के प्रबंधन से वंचित किया जा सके। याचिका में कहा गया कि संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 अंतरात्मा की स्वतंत्रता, धर्म का पालन करने, प्रचार करने और धार्मिक और धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए संस्थानों की स्थापना और प्रबंधन करने का अधिकार सुनिश्चित करते हैं। 
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नया कानून मुसलमानों को इन मौलिक अधिकारों से वंचित करता है। केंद्रीय वक्फ परिषद और वक्फ बोर्ड के सदस्यों के चयन के संबंध में संशोधन इसका स्पष्ट प्रमाण है। इसके अलावा वक्फ (दाता) के लिए पांच साल तक प्रैक्टिसिंग मुस्लिम होना आवश्यक है, जो भारतीय कानूनी ढांचे और संविधान के अनुच्छेद 14 और 25 के साथ इस्लामी शरिया सिद्धांतों के भी विपरीत है। डॉ. इलियास ने कहा कि याचिका में कानून को भेदभावपूर्ण और संविधान के अनुच्छेद 14 के साथ असंगत बताते हुए कहा गया है कि अन्य धार्मिक समुदायों हिंदू, सिख, ईसाई, जैन और बौद्ध के बंदोबस्तों को दिए गए अधिकार और सुरक्षा मुस्लिम वक्फ को नहीं दी गई है। 

बोर्ड ने संवैधानिक अधिकारों के संरक्षक के रूप में सर्वोच्च न्यायालय से इन विवादास्पद संशोधनों को रद्द करने, संविधान की पवित्रता को बनाए रखने और मुस्लिम अल्पसंख्यकों के अधिकारों को कुचले जाने से बचाने की अपील की है।
 

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