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Waqf law: वापस नहीं ली जाएंगी वक्फ संपत्तियां, निजी भूमि पर कब्जा भी नहीं; जानें वक्फ के नए कानून में क्या है

Sun, 06 Apr 2025 04:20 AM IST
शिव शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शुक्ला Updated Sun, 06 Apr 2025 04:20 AM IST
सार

राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद वक्फ संशोधन विधेयक अब कानून बन गया है। इस बीच, नए कानून को लेकर लोगों में विभिन्न तरह की शंकाएं हैं। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने इन तमाम शंकाओं का जवाब है। मंत्रालय का साफ कहना है कि वक्फ संपत्तियों का कुप्रबंधन रोकना और पारदर्शिता लाना ही मुख्य उद्देश्य है। 

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Waqf properties will not be taken back under the new Waqf law, know everything about it
वक्फ संपत्ति - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वक्फ का नया कानून बनने के बाद होने वाले बदलावों को लेकर अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने शनिवार को विस्तृत जानकारी दी है। इसमें लोगों के बीच बनी धारणा और कानून के प्रावधानों की सच्चाई को सामने रखते हुए सरकार ने साफ किया है कि नया कानून बनने के बाद न तो वक्फ संपत्तियां वापस ली जाएंगी और न ही निजी भूमि पर कब्जा किया जाएगा। इसी पर एक नजर...

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सवाल : वक्फ संपत्तियां वापस ले ली जाएंगी?
सच्चाई : वक्फ कानून 1995 के तहत पंजीकृत कोई भी संपत्ति वक्फ के रूप में वापस नहीं ली जाएगी। क्योंकि एक बार जब कोई संपत्ति वक्फ की घोषित हो जाती है तो स्थायी रूप से उसी रूप में रहती है। विधेयक जिला कलेक्टर को उन संपत्तियों की समीक्षा करने की अनुमति देता है जिन्हें वक्फ के रूप में गलत तरीके से वर्गीकृत किया जा सकता है, खासकर अगर सरकारी संपत्ति है तो। वैध वक्फ संपत्तियां संरक्षित रहती हैं।

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सवाल : क्या वक्फ संपत्तियों का सर्वेक्षण नहीं होगा?
सच्चाई : एक सर्वेक्षण होगा। कानून सर्वेक्षण आयुक्त की पुरानी भूमिका के स्थान पर जिला कलेक्टर को नियुक्त करता है। जिला कलेक्टर मौजूदा राजस्व प्रक्रियाओं का उपयोग करके सर्वेक्षण करेंगे। इसका उद्देश्य सर्वेक्षण प्रक्रिया रोके बिना रिकॉर्डों की सटीकता में सुधार करना है।

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सवाल : क्या मुसलमानों की निजी भूमि अधिग्रहित की जाएगी?
सच्चाई : कोई निजी भूमि अधिग्रहित नहीं की जाएगी। यह केवल उन संपत्तियों पर लागू होता है जिन्हें वक्फ घोषित किया गया है। निजी या व्यक्तिगत संपत्ति को प्रभावित नहीं करता है जिसे वक्फ के रूप में दान नहीं किया गया है। केवल स्वैच्छिक और कानूनी रूप से वक्फ के रूप में समर्पित संपत्तियां ही नए नियमों के अंतर्गत आती हैं।

सवाल : क्या वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिम बहुसंख्यक हो जाएंगे?
सच्चाई : बोर्ड में गैर-मुस्लिम शामिल होंगे लेकिन वे बहुमत में नहीं होंगे। केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्डों में पदेन सदस्यों को छोड़कर दो गैर-मुस्लिमों को सदस्य के रूप में शामिल करने की आवश्यकता होगी, जिससे परिषद में अधिकतम चार गैर-मुस्लिम सदस्य और वक्फ बोर्ड में अधिकतम तीन सदस्य हो सकते हैं। केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य बोर्डों में कम से कम दो सदस्य गैर-मुस्लिम होने चाहिए। इसका उद्देश्य समुदाय के प्रतिनिधित्व को कम किए बिना विशेषज्ञता को जोड़ना है।

सवाल : क्या सरकार इस विधेयक का उपयोग वक्फ संपत्तियों पर कब्जा करने के लिए करेगी?
सच्चाई : कानून जिला कलेक्टर के पद से ऊपर के एक अधिकारी को यह समीक्षा करने और सत्यापित करने का अधिकार देता है कि क्या सरकारी संपत्ति को गलत तरीके से वक्फ के रूप में वर्गीकृत किया गया है। लेकिन यह वैध रूप से घोषित वक्फ संपत्तियों को जब्त करने के लिए अधिकृत नहीं करता है।

इसे भी पढ़ें-  Waqf Bill: 13 घंटे चले मंथन के बाद वक्फ विधेयक राज्यसभा से भी पारित; पक्ष में पड़े 128 वोट, विपक्ष में 95

क्या कानून गैर-मुसलमानों को मुस्लिम समुदाय की संपत्ति पर नियंत्रण या प्रबंधन की अनुमति देता है?
सच्चाई : संशोधन में प्रावधान किया गया है कि केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य बोर्ड में दो कुछ ही गैर-मुस्लिम होंगे। चूंकि अधिकांश सदस्य मुस्लिम समुदाय से होंगे, जिससे धार्मिक मामलों पर समुदाय का नियंत्रण बना रहेगा।

धारणा : क्या उपयोगकर्ता  द्वारा वक्फ का प्रावधान हटाने से लंबे समय से स्थापित परंपराएं खत्म हो जाएंगी?
सच्चाई : यह प्रावधान हटाने का उद्देश्य संपत्ति पर अनधिकृत या गलत दावों को रोकना है। उपयोगकर्ता संपत्तियों (जैसे मस्जिद, दरगाह और कब्रिस्तान) द्वारा ऐसे वक्फ को सुरक्षा प्रदान की गई है जो वक्फ संपत्ति के रूप में बनी रहेंगी, सिवाय इसके कि संपत्ति पूरी तरह या आंशिक रूप से विवाद में है या सरकारी संपत्ति है। उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ से तात्पर्य ऐसी स्थिति से है, जहां किसी संपत्ति को सिर्फ इसलिए वक्फ माना जाता है क्योंकि उसका उपयोग लंबे समय से धार्मिक या धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए किया जाता रहा है, भले ही मालिक द्वारा कोई औपचारिक, कानूनी घोषणा न की गई हो।

सवाल : क्या मस्जिद, दरगाह और कब्रिस्तान की पारंपरिक स्थिति प्रभावित होगी?
सच्चाई : वक्फ संपत्तियों के धार्मिक या ऐतिहासिक चरित्र में हस्तक्षेप नहीं करता। इन स्थलों की पवित्र प्रकृति में बदलाव करना नहीं बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाना ही इसका उद्देश्य है।


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