फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Up Lok Sabha Election 2024 Deoria Lok Sabha Seat Bjp Candidate Shashank Mani Tripathi Profile Education Career

UP: आईआईटी से बीटेक... स्विट्जरलैंड से MBA, अब सियासत में परीक्षा; कौन हैं देवरिया से BJP प्रत्याशी शशांक मणि

Fri, 19 Apr 2024 01:16 PM IST
शाहरुख खान महेंद्र तिवारी, अमर उजाला, लखनऊ
महेंद्र तिवारी, अमर उजाला, लखनऊ Published by: शाहरुख खान Updated Fri, 19 Apr 2024 01:16 PM IST
सार

भाजपा के देवरिया से प्रत्याशी बनाए गए शशांक मणि त्रिपाठी का मुकाबला कांग्रेस के अखिलेश प्रताप सिंह से है। शशांक मणि त्रिपाठी आईआईटी से बीटेक हैं, उन्होंने स्विट्जरलैंड से एमबीए किया है। अब सियासत में उनकी परीक्षा होगी।

विज्ञापन
Up Lok Sabha Election 2024 Deoria Lok Sabha Seat Bjp Candidate Shashank Mani Tripathi Profile Education Career
Shashank Mani Tripathi - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पिता श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) व दो बार के सांसद...। बाबा स्वर्गीय सुरत नारायण मणि त्रिपाठी आईएएस अधिकारी रहे। चाचा श्रीविलास मणि त्रिपाठी सेवानिवृत्त डीजीपी...। ...और खुद आईआईटी दिल्ली से बीटेक और आईएमडी लुसान स्विट्जरलैंड से एमबीए। यह भारी भरकम परिचय है भाजपा के देवरिया से प्रत्याशी बनाए गए शशांक मणि त्रिपाठी का। उनका मुकाबला कांग्रेस के अखिलेश प्रताप सिंह से है।
विज्ञापन


20 साल पहले 2004 में जब श्रीप्रकाश मणि के दूसरे संसदीय कार्यकाल का आखिरी साल था, शशांक शायद इसी उम्मीद में विदेश के ऐशो-आराम छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे कि बुजुर्ग पिता जब सियासत से विदा लेंगे तो विरासत में सीट उन्हें मिल जाएगी। लेकिन 2004 और 2009 में टिकट पाने के बावजूद श्रीप्रकाश मणि चुनाव हार गए। 
विज्ञापन


शशांक का इंतजार लंबा हो गया। लगातार दो हार झेलने के बाद भाजपा ने इस सीट को निकालने के लिए 2014 में अपने एक पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कलराज मिश्र को उतारा, जबकि 2019 में दूसरे प्रदेश अध्यक्ष रमापति राम त्रिपाठी का सहारा लिया। रणनीति कारगर रही। 
विज्ञापन
विज्ञापन


पिता की सियासी विरासत न पाने के बावजूद शशांक निराश नहीं हुए और पार्टी में मीडिया पैनलिस्ट सहित अलग-अलग भूमिकाओं में लगे रहे। कलराज और रमापतिराम देवरिया के लिए बाहरी थे, लिहाजा शशांक ने अपने परिवार की कमजोर हुई सियासी जमीन बनाने में इस गैप का लाभ उठाया। जागृति यात्रा की, युवाओं की टोली बनाई और उनकी मदद शुरू की। कोविड काल में आम लोगों की मदद से वह नेतृत्व की नजर में जगह बनाने में कामयाब रहे। 

रोजगार की समस्या का समाधान पहली प्राथमिकता
शशांक कहते हैं देवरिया और कुशीनगर के करीब 400 गांव घूमा हूं। गांव के लोगों में असीम ऊर्जा है। हनुमत शक्ति की तरह उनकी प्रतिभा और ऊर्जा को जगाना है। कहते हैं कि स्वावलंबी भारत अभियान प्रकल्प के काम बढ़ाकर देवरिया व कुशीनगर में रोजगार की समस्या का समाधान करना है। हिंदी-भोजपुरी कॉल सेंटर की स्थापना करा चुका हूं, जिसमें 220 लोग काम करते हैं। 

लेखक भी: शशांक ने मिडिल ऑफ़ डायमंड इंडिया व अमृत काल का भारत: उद्यमिता और भागीदारी से राष्ट्र निर्माण जैसी पुस्तकें भी लिखी हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed