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UP: हाईकोर्ट का अहम फैसला, गंभीर अपराधों के आरोपियों को पुलिस में नौकरी नहीं, भले ही दोषसिद्धि न हुई हो
Wed, 20 May 2026 01:00 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: Ishwar Ashish Bhartiya
Updated Wed, 20 May 2026 01:00 PM IST
सार
न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की एकल पीठ ने कहा कि पुलिस जैसी अनुशासित सेवा में चयन के लिए अभ्यर्थी का निष्कलंक चरित्र आवश्यक है। यदि गंभीर आरोपों का सामना कर रहा व्यक्ति पुलिस सेवा में नियुक्त हो जाए, तो इससे जनता का विश्वास प्रभावित हो सकता है।
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- फोटो : ANI
विस्तार
हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक अहम फैसले में कहा कि गंभीर अपराधों के मामलों में आरोपी व्यक्ति को पुलिस जैसे अनुशासित बल में नियुक्ति नहीं दी जा सकती। न्यायालय ने कहा कि पुलिस विभाग सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि जनता के विश्वास और कानून-व्यवस्था से जुड़ी संवेदनशील सेवा है।
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न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की एकल पीठ ने यह फैसला शेखर नाम के एक अभ्यर्थी की याचिका खारिज करते हुए पारित किया। याची का तर्क था कि उसके विरुद्ध दर्ज आपराधिक मुकदमा दुर्भावना से प्रेरित है और अभी तक उसकी दोषसिद्धि नहीं हुई है, इसलिए उसे नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता।
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कोर्ट ने कहा कि सिर्फ दोषसिद्धि न होना किसी अभ्यर्थी को स्वतः नियुक्ति का अधिकार नहीं देता। पुलिस जैसी अनुशासित सेवा में चयन के लिए अभ्यर्थी का निष्कलंक चरित्र आवश्यक है। न्यायालय ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के विरुद्ध गंभीर प्रकृति के आपराधिक आरोप लंबित हैं तो सक्षम प्राधिकारी उसके आचरण और पृष्ठभूमि का मूल्यांकन कर उसे नियुक्ति के लिए अनुपयुक्त मान सकता है।
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न्यायालय ने निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि सरकारी सेवाओं, विशेषकर पुलिस बल में नियुक्ति के मामलों में चरित्र सत्यापन अत्यंत महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया में राज्य को यह अधिकार है कि वह ऐसे व्यक्तियों को सेवा में प्रवेश से रोके जिनकी पृष्ठभूमि से विभाग की साख और अनुशासन प्रभावित होने की संभावना हो।
कोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिस बल समाज में कानून लागू करने वाली संस्था है। ऐसे में यदि गंभीर आरोपों का सामना कर रहा व्यक्ति पुलिस सेवा में नियुक्त हो जाए, तो इससे जनता का विश्वास प्रभावित हो सकता है।