देश में सर्वाधिक 21 लाख बाल मजदूर उत्तर प्रदेश में
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सूबे में करीब 21 लाख बच्चे मजदूरी कर रहे हैं। यह खुलासा बच्चों के लिए काम करने वाली संस्था चाइल्ड राइट्स एंड यू (क्राई) ने वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों के विश्लेषण के बाद किया है।
बुधवार को जारी संस्था की रिपोर्ट में कहा गया है कि इनमें से 7.5 लाख बच्चे या कभी स्कूल नहीं गए या फिर बीच में पढ़ाई छोड़ चुके हैं। इससे इनके विकास पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, देश में सर्वाधिक बाल श्रमिक यूपी में हैं। प्रदेश में पिछले 10 साल में 13 फीसदी बाल श्रमिक बढ़े हैं। वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक यूपी में 21 लाख 76 हजार 706 बाल श्रमिक हैं।
इनमें से 60 फीसदी सीमांत मजदूर हैं जोकि छह महीने या उससे कम काम करते हैं। जबकि शेष 40 फीसदी बच्चे छह महीने से अधिक श्रम करते हैं।
इनमें से तीन लाख बच्चे ऐसे जो पढ़ लिख नहीं सकते
अगर उम्र के हिसाब से देखें तो 7 से 14 साल की आयु वर्ग के करीब तीन लाख बच्चे लिख और पढ़ नहीं सकते हैं। वहीं 4.7 लाख से अधिक बाल श्रमिक ऐसे हैं, जिनके लिए पढ़ाई प्राथमिकता में नहीं है। जबकि 5-14 साल के आयु-वर्ग में 64.1 प्रतिशत बच्चे कृषि या फिर घरेलू काम में लगे हुए हैं।
संस्था की क्षेत्रीय निदेशक सोहा मोइत्रा का कहना है कि यूपी में 33 फीसदी बाल श्रमिक निरक्षर हैं। अगर इस स्थिति में बदलाव नहीं हुआ तो ये बच्चे गरीबी व बेरोजगारी के पीढ़ी दर पीढ़ी चलने वाली परंपरा का हिस्सा बन जाएंगे। लिहाजा केंद्र व राज्य सरकार को चाहिए कि वह बाल श्रम निरोधक कानून की मजबूती से पालना कराए।
5-9 आयु वर्ग में सर्वाधिक बाल श्रमिक बढ़े
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 10 साल में सबसे अधिक बाल श्रमिक 5-9 आयु वर्ग में बढ़े हैं। इनकी संख्या में 37 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।