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पत्रकार की हत्या पर 'मजबूर' हुई अखिलेश सरकार

Sat, 13 Jun 2015 02:52 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 13 Jun 2015 02:52 AM IST
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UP govt under pressure over journalist murder case.

शाहजहांपुर में पत्रकार जगेंद्र सिंह हत्याकांड में घेरे में आए राज्यमंत्री राममूर्ति सिंह वर्मा पर कार्रवाई को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है। राज्यपाल राम नाईक ने भी इस मामले में दखल देते हुए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को इसकी गहराई से जांच कराने के लिए पत्र लिखा है। राज्यपाल ने इस बाबत मुख्यमंत्री से बात भी की है।

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इसके बाद सरकारी हलकों में हलचल मची। जांच एजेंसियां हरकत में आ गईं। इसी बीच, वर्मा पर कार्रवाई को लेकर सरकार और पार्टी ने तो चुप्पी साध ली, लेकिन शाम तक शाहजहांपुर के ही पूर्व विधायक देवेन्द्र पाल सिंह को पार्टी से निकाले जाने की खबर ने इस रहस्य को और गहरा कर दिया है।
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राजभवन सूत्रों के मुताबिक राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में कहा है कि जगेंद्र हत्याकांड में दो अलग-अलग बातें सामने आ रही हैं। एक तरफ राज्यमंत्री पर उनकी हत्या का आरोप लगाया जा रहा है तो दूसरी तरफ पुलिस इसे आत्महत्या बता रही है। उन्होंने कहा है कि विषय काफी गंभीर है और गहन जांच से ही सही स्थिति सामने आ सकती है।
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उधर, मामले के तूल पकड़ने के बाद सरकार और सपा में भी इस मामले को लेकर गहन मंथन शुरू हो गया है। सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने अखिलेश व रामगोपाल यादव समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक कर इस मसले पर चर्चा की। मुलायम के आवास पर बैठक के बाद जिस तरह से देवेन्द्र पाल सिंह के निष्कासन की सूचना दी गई, उससे दोनों घटनाओं के बीच कड़ी जुड़ती दिख रही है।

'एफआईआर मतलब दोषी नहीं'

UP govt under pressure over journalist murder case.

सपा महासचिव रामगोपाल यादव ने कहा कि फिलहाल राममूर्ति वर्मा पर कोई कार्रवाई न किए जाने का संकेत दिया कि एफआईआर का मतलब किसी का अपराधी या दोषी होना नहीं है। जांच चल रही है। जांच के बाद सारे तथ्य सामने आ जाएंगे।

सूत्रों की मानें तो मुलायम के घर हुई बैठक में मुख्यमंत्री ने राममूर्ति वर्मा से त्यागपत्र लेने का सुझाव दिया लेकिन अंत में यही फैसला हुआ कि इससे सरकार पर दबाव और बढ़ेगा इसलिए अभी इंतजार करना ही ठीक रहेगा।

राममूर्ति पर कार्रवाई से परहेज क्यों ...
सीओ जियाउल हक हत्याकांड में रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया से तत्काल त्यागपत्र ले लेने वाली सपा सरकार पत्रकार जगेन्द्र सिंह हत्याकांड में आरोपी मंत्री राममूर्ति वर्मा पर कार्रवाई को लेकर चुप्पी साधे हैं।

राजनीतिक समीक्षकों की मानें तो राममूर्ति वर्मा पिछड़े वर्ग से आते हैं। साथ ही यह मामला जियाउल हक की तरह किसी ऐसे पक्ष से नहीं जुड़ा है जिससे सपा का कोई राजनीतिक नुकसान होने की आशंका हो। इसलिए पार्टी या सरकार राममूर्ति पर कार्रवाई करके खुद को कठघरे में क्यों खड़ा करना चाहेगी।

पूर्व विधायक पर गिरी गाज
हालांकि देवेन्द्र पाल सिंह को निष्कासित करने की सूचना में उन पर कार्रवाई का कारण पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहना और अनुशासनहीन आचरण बताया गया है। पर, यह तर्क लोगों के गले से नीचे नहीं उतर रहा है। माना जा रहा है कि देवेन्द्र पाल पर कार्रवाई का संबंध कहीं न कहीं इसी मामले से है। यह कार्रवाई ध्यान बंटाने के लिए और राममूर्ति वर्मा पर कार्रवाई के दबाव से मुक्ति पाने के लिए की गई है।

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