लेखपालों के लिए सरकार का फरमान, मनमानी पर होंगे सस्पेंड
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सरकार को इस बात का अंदाजा हो गया है कि बेमौसम बारिश व ओलों से प्रभावित किसानों को राहत मुहैया कराने में अब तक करीब 3000 करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद उसका श्रेय ठीक से नहीं मिल पा रहा है।
उल्टे, राजस्व कर्मियों की मनमानी की वजह से सरकार की बदनामी हो रही है। इसे देखते हुए मुख्य सचिव आलोक रंजन ने सरकार के सख्त रुख का संकेत करते हुए शिकायतों को गंभीरता से लेकर राजस्व कर्मियों को सस्पेंड कर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई करने का फरमान सुनाया है।
मुख्य सचिव का कहना है कि पीड़ित किसानों को राहत वितरण के लिए सरकार 2946 करोड़ रुपये जारी कर चुकी है। विभिन्न शासनादेशों व वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये किसानों को राहत के लिए कई बार स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए जा चुके हैं।
इसके बावजूद लगातार शिकायतें मिल रही हैं। सबसे बेहद गंभीर शिकायत यह है कि जिला प्रशासन ऐसे मामलों में कार्रवाई नहीं कर रहा है।
रोज देखी जाएंगी शिकायतें
ऐसे में मंडलायुक्तों व जिलाधिकारियों को कहा है कि वे अतिवृष्टि व ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों की शिकायतें प्राप्त करने के लिए जिला स्तर पर शिकायत पेटिका लगवाने को कहा गया है। उन्हें निर्देश दिए गए हैं कि इसमें आने वाली शिकायतों को रोज देखें।
सर्वे से राहत वितरण तक किसी तरह की शिकायत मिलती है तो लेखपालों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक अनुशासन एवं अपील नियमावली-1999 के तहत कठोर कार्रवाई की जाए।
ये शिकायतें हों तो डीएम की पेटिका में डालें चिट्ठी
-फसलों का सही सर्वे न करना
-मनमाने ढंग से सर्वे करना
-राजस्वकर्मियों द्वारा प्रभावित किसानों से पैसा मांगना
-राहत वितरण में जिसे चाहे देना और जिसे चाहे छोड़ देना (पिक एंड चूज)
-राजस्व कर्मियों का अनुचित व्यवहार