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राज्यपाल राम नाईक ने पांच विधेयकों को दी मंजूरी

Tue, 22 Mar 2016 01:14 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 22 Mar 2016 01:14 AM IST
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UP governor approved five acts.
राज्यपाल राम नाईक - फोटो : amar ujala

राज्यपाल राम नाईक ने विधानमंडल से पारित किए गए पांच विधेयकों को सोमवार को अपनी मंजूरी दे दी। राज्यपाल ने जिन विधेयकों को अपनी मंजूरी दी है उनमें उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड (संशोधन) विधेयक 2016, उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग (संशोधन) विधेयक 2016, उत्तर प्रदेश राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंध (संशोधन) विधेयक 2016, उत्तर प्रदेश औद्योगिक क्षेत्र विकास (संशोधन) विधेयक 2016 और उत्तर प्रदेश लोकतंत्र सेनानी सम्मान विधेयक 2016 शामिल हैं।

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ये सभी विधेयक विधान सभा से 8 मार्च एवं विधान परिषद से 9 मार्च को पारित हुए थे। इसके बाद 15 मार्च को सरकार की ओर से इन्हें राज्यपाल की अनुमति के लिए राजभवन भेजा गया था।
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माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड (संशोधन) विधेयक के जरिये विभिन्न माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ा रहे अल्पकालिक और तदर्थ शिक्षकों को स्थायी करने की व्यवस्था की गई है।
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अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में 7 अगस्त 1993 से 30 दिसंबर 2000 के बीच 1408 शिक्षकों को तदर्थ नियुक्ति और 7 अगस्त 93 से 25 जनवरी 1999 के बीच 526  शिक्षकों को अल्पकालिक नियुक्ति दी गई थी। इस तरह ये 1934 शिक्षक स्थायी किए जाएंगे।

शिक्षकों को नियमित करने की व्यवस्‍था

UP governor approved five acts.

उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग (संशोधन) विधेयक के जरिये तदर्थ आधार पर 3 जनवरी 1984 से 22 नवंबर 1991 के बीच नियुक्त 38 शिक्षकों को नियमित करने की व्यवस्था की गई है।

राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंध (संशोधन) विधेयक के जरिये वित्तीय घाटे को नियंत्रित करने का प्रावधान किया गया है। लोकतंत्र सेनानी सम्मान विधेयक के जरिये आपातकाल के लोकतंत्र सेनानियों को मिलने वाली विभिन्न सहूलियतों को कानूनी जामा पहनाया गया है।

औद्योगिक प्राधिकरणों में बढ़ेगा दो फीसदी स्टांप शुल्क
औद्योगिक क्षेत्र विकास (संशोधन) विधेयक में औद्योगिक क्षेत्र में स्थित किसी अचल संपत्ति की रजिस्ट्री पर दो प्रतिशत अतिरिक्त स्टांप शुल्क की वसूली का प्रावधान किया गया है।

मौजूदा समय स्टांप शुल्क पांच फीसदी है। अब यह बढ़कर सात प्रतिशत हो जाएगा। स्टांप शुल्क के रूप में वसूल की जाने वाली इस धनराशि का इस्तेमाल औद्योगिक, वाणिज्यिक, संस्थागत व नगरीय अवस्थापना विकास के लिए किया जाएगा।

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