यूपी: 100 दिन के काम का हिसाब देने के बाद बड़े बदलाव करेगी योगी सरकार
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यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार जनता को 100 दिन का हिसाब-किताब देने के बाद बड़े बदलाव की तैयारी पर मंथन कर रही है। इसमें मुख्य सचिव सहित शासन के अहम पदों पर फेरबदल तय माना जा रहा है।
नई सरकार के 100 दिन पूरे हो रहे हैं। सरकार ने अब तक पिछली सरकार में तैनात मुख्य सचिव राहुल भटनागर को नहीं बदला है, पर काडर के वरिष्ठतम अफसरों में शामिल राजीव कुमार-प्रथम को समय से पहले ही केंद्र से वापस बुला लिया है। माना जा रहा है कि राजीव कुमार के आते ही इस अहम पद पर बदलाव संभव है।
इसी तरह पूर्णकालिक कृषि उत्पादन आयुक्त की खोज सरकार नहीं कर पाई है। राजस्व परिषद के सदस्य वरिष्ठ आईएएस अधिकारी चंद्र प्रकाश को इस पद की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। चर्चा है कि आने वाले दिनों में इस अहम पद पर भी नियमित तैनाती की जा सकती है।
पिछली सरकार में विभिन्न पदों पर तैनाती के दौरान चर्चा में रहे अपर मुख्य सचिव संजीव सरन के पास वन एवं पर्यावरण के अलावा आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे अहम महकमे का प्रभार है। सरन अपने ही मातहत के गंभीर आरोपों से फिर सुर्खियों में हैं। उनकी जिम्मेदारी में बदलाव की अटकलें तेज हैं।
इन अफसरों का कम किया जा सकता है भार
प्रमुख सचिव नियोजन मुकुल सिंघल के पास कार्यक्रम क्रियान्वयन सहित कई विभागों के अलावा आवास जैसा अहम विभाग है। उनका भार कम किया जा सकता है। ग्राम्य विकास विभाग में नए अपर मुख्य सचिव के रूप में एनएस रवि की तैनाती हुई है। सचिवालय प्रशासन विभाग में रवि की जिस तरह की कार्यशैली रही है और सरकार को बार-बार उनके भेजे प्रस्तावों को बदलना पड़ा है, इतने अहम पद पर उनकी तैनाती को लेकर नुक्ताचीनी हो रही है।
सहकारिता विभाग खासा अहम माना जाता है। सरकार ने इसे नए सिरे से खड़ा करने की योजना का संकेत किया है। पर, यह विभाग अतिरिक्त कार्यभार के रूप में अपर मुख्य सचिव सार्वजनिक उद्यम हरिराज किशोर के पास है। राजस्व संग्रह के लिहाज से कॉमर्शियल टैक्स महकमा बेहद अहम माना जाता है। यह विभाग भी कामचलाऊ व्यवस्था में आगे बढ़ रहा है। अपर मुख्य सचिव श्रम राजेंद्र कुमार तिवारी, कॉमर्शियल टैक्स विभाग का भी काम देख रहे हैं।
प्रमुख सचिव कृषि रजनीश गुप्ता पिछली सरकार के समय से ही इस विभाग में कार्यरत हैं। उनकी कार्यशैली पर कृषि निदेशालय से विभाग के कर्मचारी तक सवाल उठाते रहे हैं। इसके अलावा प्रमुख सचिव राजस्व, राहत आयुक्त व चकबंदी आयुक्त के पद पर एक ही अधिकारी की तैनाती है। इन पदों पर अलग-अलग अधिकारियों की नियुक्ति की मांग अर्से से की जाती रही है।
माना जा रहा है कि सरकार जब नया प्रशासनिक फेरबदल करेगी तो कई अफसरों की जिम्मेदारी नए सिरे से तय हो सकती है। अफसरों के 100 दिन के काम भी उनकी तैनाती में अहम भूमिका अदा कर सकते हैं। कामचलाऊ व्यवस्था में चल रहे कई अहम विभागों में नियमित अफसर तैनात किए जा सकते हैं।
मंडलायुक्त आजमगढ़ व गन्ना आयुक्त की भी होगी नई तैनाती
आजमगढ़ मंडल की कमिश्नर नीलम अहलावत इसी 30 जून को रिटायर हो रही हैं। सरकार को नए कमिश्नर की तैनाती करनी पड़ेगी। गन्ना आयुक्त विपिन द्विवेदी भी उसी दिन रिटायर हो रहे हैं। उनके एक्सटेंशन की पैरवी भी चल रही है। पर, पैरोकार के ही कमजोर पड़ने के संकेतों के बीच यह संभावना कम ही है कि द्विवेदी आगे भी पद पर बने रह पाएंगे।
गन्ना आयुक्त के पद नई तैनाती तय मानी जा रही है। जिलों में डीएम व एसएसपी के पद पर कार्यरत कई अधिकारियों की भूमिका पर भी अंगुली उठाई जा रही है। कानून-व्यवस्था व सरकार की प्राथमिकताओं पर काम करने में सुस्त नजर आ रहे कुछ जिलों में भी बदलाव के संकेत हैं। नई सरकार ने कार्यभार संभालने के बाद पिछली सरकार की आंख-कान-मुंह की भूमिका निभाने वाले कई अफसरों को हटाकर वेटिंग में डाल दिया था।
इनमें तत्कालीन प्रमुख सचिव सूचना नवनीत सहगल, प्रमुख सचिव अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास रमा रमण, अपर मुख्य सचिव भूतत्व एवं खनिकर्म डॉ. गुरदीप सिंह, प्रमुख सचिव बाल विकास एवं पुष्टाहार डिंपल वर्मा, यूपीएसआईडीसी के एमडी अमित कुमार घोष, प्रमुख सचिव नागरिक उड्डयन एवं राज्य संपत्ति अनीता सिंह, लखनऊ विकास प्राधिकरण के वीसी सत्येंद्र सिंह व गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष विजय कुमार यादव जैसे अधिकारी शामिल हैं। इनको घर बैठाए ढाई महीने बीत चुके हैं। सरकार को इनकी भूमिका भी तय करनी होगी। वजह घर बैठाकर लंबे समय तक सरकारी खजाने से वेतन देना भी उचित नहीं माना जा सकता।
नई नीतियों को अंतिम रूप देना भी प्राथमिकता
सरकार औद्योगिक विकास, रेशव व वस्त्रोद्योग, नवीन ऊर्जा सहित कई विभागों की नीति पर तेजी से काम कर रही है। प्रदेश में रोजगार के अधिक अवसर पैदा करने को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही इन नीतियों को अंतिम रूप देना भी प्राथमिकता में होगा। इसे जल्द से जल्द कैबिनेट की मंजूरी दिलाकर लागू किए जाने की योजना है।