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शिक्षक समायोजन की सूची से टीचर सहित प्रधानाचार्यों के माथे पर भी खिंची चिंता की लकीरें
अभिषेक सिंह/अमरउजाला, लखनऊ
Updated Fri, 28 Jul 2017 03:32 PM IST
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केस-1:
राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, मलिहाबाद में गृह विज्ञान की 280 छात्राएं हैं। यह विषय पढ़ाने वाली यहां पर एक ही शिक्षिका हैं, जिनका नाम समायोजन की सूची में है। यदि उनका समायोजन होता है तो यहां गृह विज्ञान पढ़ाने वाली कोई शिक्षिका नहीं बचेगी।
केस-2:
राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, शाहमीना में गरिमा मिश्रा विज्ञान की एक ही शिक्षिका हैं और इनका नाम भी समायोजन की सूची में डाल दिया गया है। वे रसायन विज्ञान पढ़ाती हैं। वहीं प्रधानाचार्य के पास जीव विज्ञान का भी प्रभार है। इंटरमीडिएट में 418 छात्राएं हैं। गरिमा मिश्रा का समायोजन होता है तो विज्ञान की पढ़ाई पर संकट आ जाएगा। बाकी पद भी खाली हैं।
केस-3:
राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, नरही में भी गृह विज्ञान की एक ही शिक्षिका हैं। इनका नाम भी समायोजन की सूची में है। यदि इनका भी किसी अन्य विद्यालय में स्थानांतरण होता है तो छात्राओं को खुद ही गृह विज्ञान की पढ़ाई कर बोर्ड परीक्षा देनी होगी।
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ये उदाहरण बताते हैं कि राजकीय विद्यालयों के शिक्षकों के समायोजन की सूची किस तरीके से बनाई जा रही है। इससे न केवल शिक्षक परेशान हैं बल्कि प्रधानाचार्यों के माथे पर भी चिंता की लकीरें खिंच गई हैं।
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राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, मलिहाबाद में गृह विज्ञान की 280 छात्राएं हैं। यह विषय पढ़ाने वाली यहां पर एक ही शिक्षिका हैं, जिनका नाम समायोजन की सूची में है। यदि उनका समायोजन होता है तो यहां गृह विज्ञान पढ़ाने वाली कोई शिक्षिका नहीं बचेगी।
केस-2:
राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, शाहमीना में गरिमा मिश्रा विज्ञान की एक ही शिक्षिका हैं और इनका नाम भी समायोजन की सूची में डाल दिया गया है। वे रसायन विज्ञान पढ़ाती हैं। वहीं प्रधानाचार्य के पास जीव विज्ञान का भी प्रभार है। इंटरमीडिएट में 418 छात्राएं हैं। गरिमा मिश्रा का समायोजन होता है तो विज्ञान की पढ़ाई पर संकट आ जाएगा। बाकी पद भी खाली हैं।
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केस-3:
राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, नरही में भी गृह विज्ञान की एक ही शिक्षिका हैं। इनका नाम भी समायोजन की सूची में है। यदि इनका भी किसी अन्य विद्यालय में स्थानांतरण होता है तो छात्राओं को खुद ही गृह विज्ञान की पढ़ाई कर बोर्ड परीक्षा देनी होगी।
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ये उदाहरण बताते हैं कि राजकीय विद्यालयों के शिक्षकों के समायोजन की सूची किस तरीके से बनाई जा रही है। इससे न केवल शिक्षक परेशान हैं बल्कि प्रधानाचार्यों के माथे पर भी चिंता की लकीरें खिंच गई हैं।
समायोजन के लिए 158 शिक्षक सरप्लस
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सबसे बड़ा सवाल है कि अगर सब्जेक्ट का एक ही टीचर है और उसका भी समायोजन कर दिया गया तो पढ़ाएगा कौन? अगर इस तरह से समायोजन होता है नि:संदेह इसका खामियाजा छात्र-छात्राओं को ही भुगतना पड़ेगा।
शिक्षा विभाग ने समायोजन प्रक्रिया के लिए जो सूची जारी की थी उसको लेकर राजकीय विद्यालयों के शिक्षकों में जबरदस्त विरोध देखने को मिला। सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां मिलीं। जिले में 48 राजकीय विद्यालय हैं, जिसमें से 19 बालकों के और 29 बालिकाओं के हैं।
शिक्षा विभाग ने इन विद्यालयों के 158 शिक्षकों को सरप्लस सूची में डाला है। इसमें राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, शाहमीना में 12, राजकीय जुबली इंटर कॉलेज में 34, राजकीय इंटर कॉलेज, निशातगंज में 15, राजकीय इंटर कॉलेज, हुसैनाबाद में 24, राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, नरही में 10, राजकीय इंटर कॉलेज, सरोजिनीनगर के 10 और राजकीय बालिका इंटर कॉलेज सिंगार नगर की 15 शिक्षिकाओं को सरप्लस दिखाया गया है।
निदेशक ने जब यह सूची जारी की तो शिक्षकों ने जबरदस्त विरोध किया। विभाग ने छात्रों की संख्या के आधार पर सूची तैयार कर डाली है। इस बात का ध्यान नहीं रखा गया कि किस विषय के कितने छात्र हैं और उन विषयों को पढ़ाने वाले शिक्षक कितने हैं। ऐसे में समायोजन की सूची में काफी संख्या में वे शिक्षक भी आ गए जो अपने मूल विद्यालय में अपने विषय को पढ़ाने वाले एकल शिक्षक हैं।
शिक्षा विभाग ने समायोजन प्रक्रिया के लिए जो सूची जारी की थी उसको लेकर राजकीय विद्यालयों के शिक्षकों में जबरदस्त विरोध देखने को मिला। सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां मिलीं। जिले में 48 राजकीय विद्यालय हैं, जिसमें से 19 बालकों के और 29 बालिकाओं के हैं।
शिक्षा विभाग ने इन विद्यालयों के 158 शिक्षकों को सरप्लस सूची में डाला है। इसमें राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, शाहमीना में 12, राजकीय जुबली इंटर कॉलेज में 34, राजकीय इंटर कॉलेज, निशातगंज में 15, राजकीय इंटर कॉलेज, हुसैनाबाद में 24, राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, नरही में 10, राजकीय इंटर कॉलेज, सरोजिनीनगर के 10 और राजकीय बालिका इंटर कॉलेज सिंगार नगर की 15 शिक्षिकाओं को सरप्लस दिखाया गया है।
निदेशक ने जब यह सूची जारी की तो शिक्षकों ने जबरदस्त विरोध किया। विभाग ने छात्रों की संख्या के आधार पर सूची तैयार कर डाली है। इस बात का ध्यान नहीं रखा गया कि किस विषय के कितने छात्र हैं और उन विषयों को पढ़ाने वाले शिक्षक कितने हैं। ऐसे में समायोजन की सूची में काफी संख्या में वे शिक्षक भी आ गए जो अपने मूल विद्यालय में अपने विषय को पढ़ाने वाले एकल शिक्षक हैं।
अपनाया अपना मापदंड
डेमो
सूची में गृह विज्ञान के कई शिक्षकों को शामिल किया गया है। यह हाईस्कूल में अनिवार्य विषय है। इसको पढ़ाने वाले हर विद्यालय में केवल एक ही शिक्षक हैं। एलटी ग्रेड के शिक्षक कक्षा 10 तक के विद्यार्थियों को पढ़ाते हैं।
विभाग ने हाईस्कूल में 65 छात्रों पर एक शिक्षक और इंटर में 80 छात्रों पर एक शिक्षक का आधार मानकर सूची तैयार की है। शिक्षकों का कहना है कि विभाग को चाहिए था कि वे विषय वार छात्रों की संख्या के आधार पर शिक्षकों की सूची तैयार की है।
‘सूची को लेकर शिक्षकों की समस्याएं सुनी गई हैं और विचार भी किया गया है। छात्रों के हित को देखते हुए ही समायोजन कराया जाएगा। शिक्षकों की व्यावहारिक परेशानियों को भी ध्यान में रखा जाएगा।’ - सुरेंद्र तिवारी, जेडी
विभाग ने हाईस्कूल में 65 छात्रों पर एक शिक्षक और इंटर में 80 छात्रों पर एक शिक्षक का आधार मानकर सूची तैयार की है। शिक्षकों का कहना है कि विभाग को चाहिए था कि वे विषय वार छात्रों की संख्या के आधार पर शिक्षकों की सूची तैयार की है।
‘सूची को लेकर शिक्षकों की समस्याएं सुनी गई हैं और विचार भी किया गया है। छात्रों के हित को देखते हुए ही समायोजन कराया जाएगा। शिक्षकों की व्यावहारिक परेशानियों को भी ध्यान में रखा जाएगा।’ - सुरेंद्र तिवारी, जेडी