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150 डॉलर में पुरखों को ढूंढें, न मिलें तो आधी रकम वापस

Wed, 18 Nov 2015 08:05 PM IST
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 18 Nov 2015 08:05 PM IST
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UP government launches discover your roots

वे अप्रवासी जिनका दिल अपनी माटी के लिए धड़कता है, सगे-संबंधियों को भूल चुके हैं, लेकिन उनसे नाता जोड़ने की चाहत है, अपने पूर्वजों, उनके पड़ोसियों का गांव-घर जानना चाहते हैं तो यूपी सरकार उनकी पूरी मदद करेगी।

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इसके लिए उसने ‘डिस्कवर योर रूट्स’ (अपनी जड़ों को खोजें) स्कीम शुरू की है। इसके लिए अप्रवासियों को 150 अमेरिकी डॉलर (करीब 8500 रुपये) जमा कराने होंगे।
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सरकार उनके पुरखों के गांव-घर को ढूंढने में मदद करेगी। अगर नहीं ढूंढ सकी तो खोज की रिपोर्ट समेत 75 डॉलर लौटा दिए जाएंगे।

एनआरआई विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अप्रवासियों को इस स्कीम में रजिस्ट्रेशन के लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा। वे उप्र पर्यटन विभाग में नि:शुल्क अपना रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं।

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तीन महीने में मिलेगी जानकारी

UP government launches discover your roots

हालांकि जड़ों की खोज तभी शुरू हो पाएगी जब वे खोज शुल्क के रूप में 150 अमेरिकी डॉलर बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से यूपीएसटीडीसी लिमिटेड लखनऊ को अदा कर देंगे।

महकमा तीन महीने के भीतर अप्रवासियों को उनकी जड़ों तक पहुंचाने का काम करेगा। अगर पर्यटन विभाग दशकों पहले विदेश जाकर बस गए अप्रवासी के पूर्वजों की जड़ों तक पहुंचने में सफल नहीं हुआ, तो खोज शुल्क की 50 फीसदी रकम अप्रवासी को लौटा दी जाएगी।

साथ ही उसे खोज के लिए किए गए प्रयासों की रिपोर्ट भी दी जाएगी। यूपी सरकार को उम्मीद है कि इस स्कीम से अप्रवासियों को बड़ी मदद मिलेगी। अपनी जड़ों से जुड़ने के लिए अभी तक वे व्यक्तिगत प्रयास करते थे, पर अब उन्हें एक सिस्टम मदद करेगा।
 
इसके पहले सरकार अप्रवासियों के लिए कई सुविधाओं का एलान कर चुकी है। इसमें एनआरआई कार्ड व सम्मान देना और बिना आईजी स्तर के अधिकारी की अनुमति के एनआरआई के खिलाफ एफआईआर दर्ज न करना जैसे कदम शामिल हैं।

जानकार बताते हैं कि सैकड़ों साल पहले देश से बड़ी संख्या में लोग दक्षिण अफ्रीका, फिजी, त्रिनिनाद, मॉरीशस, दक्षिण कोरिया आदि देशों में पलायन कर गए थे।

गिरमिटिया मजदूर बन कर गए लोगों ने विदेशों में न सिर्फ अपने कामकाज से स्थान बनाया, बल्कि संस्कृति व संस्कार की छाप भी छोड़ी। ऐसे लोगों की तादाद करीब एक करोड़ बताई जाती है।

इनमें यूपी मूल के अप्रवासियों की अच्छी खासी संख्या है। पूर्वी यूपी से ज्यादा लोग इन देशों में गए थे। ऐसे लोग यूपी आने पर पूर्वजों की मातृभूमि, नाते-रिश्तेदारों के बारे में जानने की जिज्ञासा रखते हैं।

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