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बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार निदेशालय में लीपापोती का खेल शुरू, शासन ने मांगी रिपोर्ट

Mon, 16 Sep 2019 05:18 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Mon, 16 Sep 2019 05:18 PM IST
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UP government asked report from ICDS.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। - फोटो : amar ujala

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देश के बाद भी बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार (आईसीडीएस) निदेशालय में संविदा पर तैनात 282 कर्मिकों की सेवा अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव समय से न भेजने वाले कार्मिकों की जिम्मेदारी तय करने के मामले में लीपापोती शुरू हो गई है। शासन स्तर से एक बार फिर निदेशालय को इस मामले में दोषी कार्मिकों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए इसकी जानकारी 16 सितंबर तक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

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विभाग में रिक्त पदों पर नियमित भर्ती न होने से परियोजनाओं के संचालन में आ रही दिक्कत को देखते हुए सरकार ने पिछले साल विभिन्न श्रेणी के 282 कार्मिकों को संविदा पर नियुक्त किया था। इनमें बाल विकास परियोजना अधिकारी के 48, मुख्य सेविका के 138, कनिष्ठ सहायक के 92, वरिष्ठ संप्रेक्षक व कंप्यूटर ऑपरेटर के 1-1 पद शामिल हैं।
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इनकी सेवा अवधि 31 जुलाई 2019 तक बढ़ाने के लिए बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग ने 2 नवंबर 2018 को प्रस्ताव मुख्यमंत्री को भेजा था। इसे मंजूरी देने के साथ ही मुख्यमंत्री ने सख्त हिदायत दी थी कि भविष्य में संविदा कर्मियों की सेवा अवधि बढ़ाने से संबंधित प्रस्ताव समय से उपलब्ध कराया जाए।
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इसके बावजूद निदेशालय स्तर से इस साल 31 जुलाई को समाप्त हो रही सेवा अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव 22 जुलाई को शासन को भेजा गया। प्रस्ताव पर प्रधान सहायक अजय कुमार बाजपेयी के अलावा अपर परियोजना प्रबंधक कल्पना पांडेय के हस्ताक्षर हैं।

यह प्रस्ताव जब मुख्यमंत्री के समक्ष मंजूरी के लिए रखा गया तो उन्होंने निर्देश के बावजूद इसे देर से भेजने पर नाराजगी जताई। सीएम के विशेष सचिव शुभ्रांश शुक्ला ने विभाग की प्रमुख सचिव को समय से प्रस्ताव न भेजने पर संबंधित अधिकारी या कर्मचारी का उत्तरदायित्व निर्धारित करते हुए कार्रवाई करने को कहा।

निदेशक ने कहा, प्रस्ताव भेजने में नहीं हुआ विलंब

निदेशक शत्रुघ्न सिंह की ओर से शासन को भेजे गए लिखित जवाब में कहा गया है कि प्रस्ताव भेजने में न तो विलंब हुआ है और न इसके लिए कोई दोषी है। निदेशक के इस जवाब को शासन ने खारिज कर दिया है।

शासन की ओर से विशेष सचिव गया प्रसाद ने दुबारा निदेशक को पत्र लिखकर कहा है कि जो प्रस्ताव भेजे गए हैं, वह अधूरे और सरसरी तौर पर तैयार किए गए हैं। इससे स्पष्ट है कि इस मामले में दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के संबंध में निदेशक की ओर से दी गई सूचना सही नहीं है। इसलिए 16 सितंबर तक दोषी कार्मिकों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए शासन को इससे अवगत कराएं। 

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